रविवार को गुजरात के साबरमती जेल से प्रयागराज के लिए रवाना किए गए कुख्यात अपराधी अतीक अहमद को एसटीएफ की टीम ने सोमवार की शाम को सुरक्षित तरिके से प्रयागराज पहुंचाया। जिसके बाद अब मंगलवार यानी कि 28 मार्च को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को कुछ ही देर में नैनी जेल से प्रयागराज की MP-MLA कोर्ट ले जाया जाएगा। जिसके बाद कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। जेल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों को अलग-अलग वैन से अलग-अलग रास्ते से कोर्ट ले जाया जाएगा। जिससे किसी भी प्रकार की कोई समस्या पैदा ना हो सके। हालांकि, पुलिस की तरफ से इस बारे में कोई भी ऑफिशियल डिटेल नहीं दी गई है। पुलिस ने जेल के मुख्य गेट के आसपास बैरिकेडिंग लगा दी है, साथ ही अधिक मात्रा मेंं पुलिस बल की तैनाती भी की गई है। जेल में बंदियों से परिजनों की मुलाकात भी पूरी तरह से बंद है।
बता दें कि 17 साल पहले यानी कि 28 फरवरी, 2006 को हुए उमेश पाल के अपहरण केस में आज MP-MLA कोर्ट फैसला सुनाएगी। सबकी निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। इस मामले में अतीक-अशरफ समेत कुल 10 आरोपियों पर फैसला आना है। सोमवार शाम को आरोपी माफिया अतीक अहमद को अहमदाबाद की साबरमती जेल से और उसके भाई अशरफ को बरेली जेल से प्रयागराज लाया गया है। दोनों को नैनी सेंट्रल जेल में हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा को लेकर खासा इंतेजाम भी किये गए हैं। पुलिस के सीनियर अफसर भी मौके पर पहुंच गए हैं। हालांकि, जेल के बाहर किसी को रुकने नहीं दिया जा रहा है। पुलिस लोगों को वहां से हटा दे रही है। कोर्ट कैंपस में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अंदर चेकिंग के बिना किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है। जिस रास्ते से अतीक और अशरफ को लेकर जाया जाएगा उसे पूरी तरह से खाली करा दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक बता दें कि इस मामले को काफी गंभीरता के साथ देखा जा रहा है। साथ ही ACP करछना ने बताया कि कोर्ट 12:30 बजे सुनवाई करेगा। अतीक और अशरफ को 11 बजे के बाद सेंट्रल जेल से कोर्ट के लिए ले जाया जाएगा।नैनी सेंट्रल जेल से कोर्ट की 10 किलोमीटर की दूरी में सिक्योरिटी के पुख्ता इंतजाम हैं। पुलिस को शंका थी कि अतीक-अशरफ के समर्थक जेल के बाहर इकट्ठा हो सकते हैं। इसलिए, फोर्स लगी थी। लेकिन, अब तक वहां उसका कोई समर्थक नहीं पहुंचा है। नैनी जेल के बाहर दो प्रिजव वैन पहुंच गई हैं। बताया जा रहा है कि इन्हीं दोनों वैन में अतीक और अशरफ को ले जाया जाएगा।

क्या है मामला, कौन- कौन धारा लगे हैं अतीक और अशरफ पर ?
1 मार्च, 2006 को उमेश पाल ने अतीक के पक्ष में गवाही दी। उस समय सपा की सरकार थी। उमेश अपनी और परिवार की जान की रक्षा के लिए सालभर चुप रहा। 2007 में विधानसभा चुनाव हुए और सपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। मायावती की नेतृत्व वाली बसपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनी। जिसके बाद ही उमेश ने इस कदम को उठाने का फैसला लिया। इसके बाद अपने विधायक राजू पाल की हत्या से अतीक पर बिफरीं मायावती ने सबसे पहले अतीक अहमद का चकिया स्थित दफ्तर तुड़वा दिया। उमेश पाल को लखनऊ बुलवाया और हिम्मत दी। उमेश पाल ने एक साल बाद 5 जुलाई, 2007 में अतीक अहमद उसके भाई अशरफ समेत 10 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।

उमेश पाल की तहरीर पर धूमनगंज थाने में धारा 147/148/149/364A/323/341/342/504/506/34/120 B and 7 Criminal law Amendment Act के तहत मामला दर्ज हुआ था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट शाश्वत आनंद ने बताया कि अपहरण करने वालों पर ही हत्या का भी आरोप लग गया है। ऐसे में धारा 364A में फांसी की सजा का प्रावधान भी है। चूंकि वादी उमेश पाल की हत्या भी हो चुकी है और हत्या का आरोप भी अपहरण कराने वालों पर ही है। ऐसे में अपराध और गंभीर हो जाता है। उन्होंने बताया, अगर अतीक अहमद उसके भाई अशरफ पर दोष सिद्ध होता है, तो 10 साल की कैद से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है। इस केस में जीवित रहते उमेश पाल ने अपनी गवाही पूरी कर ली थी। ऐसे में अतीक को गुजरात से जब लाया जा रहा था तो उसे पहले ही डर लग रहा था की कहीं उसकी गाड़ी पलट ना जाए। इसलिए अतीक का काफिला 1300 किलोमीटर के रास्ते को 24 घंटे में पूरा किया। साथ ही भय के कारण अतीक काफीले को बार-बार रुकवा रहा था। काफीला लगभग 8 बार रुका था।
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