नई दिल्ली -दिल्ली विधानसभा का दो दिवसीय सत्र आज से शुरू हो गया है. यह सत्र कई मायनों में खास है. दिल्ली की सत्ता में आम आदमी पार्टी सरकार में अभी तक विधानसभा सत्र में अरविंद केजरीवाल बतौर मुख्यमंत्री शिरकत करते रहे हैं आज आतिशी पहली बार बतौर दिल्ली की नयी मुख्यमंत्री विधानसभा में होंगी।
विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज दिल्ली विधानसभा में दिल्ली के रिज से चोरी छिपे काटे गए करीब 1100 पेड़ों का हिसाब मांगा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मामला चल रहा है और आरोप है कि भाजपा शासित डीडीए और उपराज्यपाल की मिलीभगत के चलते पेड़ काटे गए हैं.
विधानसभा का यह सत्र एक औपचारिकतावश आनन-फानन में बुलाया गया है. क्योंकि मार्च महीने में बजट सत्र के बाद से लेकर सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी. उसके बाद अरविंद केजरीवाल जेल चले गए थे. नियमानुसार 8 अक्टूबर से पहले अगर सत्र नहीं बुलाया जाता तो संवैधानिक संकट उत्पन्न हो सकता था. इसलिए आतिशी के मुख्यमंत्री बनने और मंत्रिमंडल का गठन होने के तुरंत बाद यह सत्र बुलाया गया है.
सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग
विधानसभा सत्र बुलाए जाने के बाद विपक्ष में बैठे बीजेपी के विधायक इस बात की लगातार मांग कर रहे हैं कि सत्र की अवधि को बढ़ाया जाए और इसमें प्रश्नकाल भी हो, ताकि दिल्ली की जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो सके और मंत्री भी जवाब दें. मगर अभी तक सत्र की अवधि बढ़ाने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है. इसके अलावा विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता दिल्ली में पानी के मुद्दे, गरीबों को पेंशन, राशन कार्ड, दिल्ली की खस्ताहाल सड़कें, आदि जनसमस्याओं को लेकर सरकार से जवाब चाहते हैं.
दिल्ली के मुद्दों पर चर्चा हो-कांग्रेस
कांग्रेस की भी मांग है कि दिल्ली विधानसभा के दो दिवसीय सत्र में आतिशी दिल्ली के लोगों की समस्याओं पर चर्चा करें. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि विशेष विधानसभा सत्र में दिल्ली के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के जेल में रहने के कारण पिछले 8 महीनों से कोई कैबिनेट की बैठक भी नहीं हुई, जिससे पिछले एक साल से भी अधिक समय से दिल्ली की जनता की परेशानियों का हल निकालने के लिए कोई फैसला नही लिया गया. कांग्रेस की ये भी मांग है कि आतिशी को उपराज्यपाल के निर्देशानुसार कैग के निष्कर्षों पर चर्चा करने के लिए विधानसभा में 12 लंबित कैग रिपोर्ट पेश करनी चाहिए.
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