अनिल मिश्र/पटना
बिहार प्रदेश में हाल में हुए सम्पन्न विधानसभा चुनाव के बाद अब 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव पर आम लोगों के साथ -साथ जनप्रतिनिधियों की निगाहें टिकी हुई हैं।जिसकी तैयारी बिहार प्रदेश निर्वाचन आयोग ने अभी से ही तैयारियां तेज कर दी है । इस बीच पूरे प्रदेश भर में पंचायत प्रतिनिधियों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के बीच हलचल बढ़ गई है। इस बार होने वाला पंचायत चुनाव कई बड़े बदलावों का साक्षी बनने जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और तकनीक-आधारित बनाने के तहत पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का उपयोग करने का फैसला किया है। दरअसल पंचायत चुनावों में अब तक बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन 2026 में होने वाले इस चुनाव में ‘मल्टी पोस्ट ईवीएम’ का प्रयोग किया जाएगा, जिसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।इस बीच प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बार लगने वाली मल्टी पोस्ट ईवीएम में एक कंट्रोल यूनिट (सीयू) और छह बैलेट यूनिट (बीयू) होंगी। इसका मतलब है कि मतदाता एक ही कंट्रोल यूनिट से जुड़े अलग-अलग छह पदों के लिए अलग-अलग बैलेट यूनिट में वोट डाल सकेंगे।
पंचायत चुनाव में वार्ड सदस्य, पंच, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और सरपंच—इन सभी छह पदों के लिए एक साथ अलग-अलग मशीनों पर मतदान होगा। इससे मतदान प्रक्रिया तेज होगी और मतगणना भी पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक एवं त्रुटिरहित होने की उम्मीद है।आपको बताते चलें कि बिहार में वर्तमान में 38 जिला परिषद, लगभग 534 पंचायत समितियां और 8387 ग्राम पंचायतें हैं, जो पंचायती राज व्यवस्था के तहत काम करती हैं।जिला परिषद सबसे ऊपरी स्तर पर होती है और पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है। वहीं बिहार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी तरह की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर सक्रिय होकर काम करती है। वहीं इन्हीं लोगों उदासीनता के कारण ही ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी देखा जाता है।इस बीच वर्तमान पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल अक्टूबर-नवंबर 2026 में पूरा होने वाला है। आरक्षण श्रेणी का निर्धारण किए जाने की प्रक्रिया मार्च के बाद शुरू होने की संभावना है। पंचायत सरकार के लिए 6 पदों के चुनाव होते हैं। इसमें सबसे हॉट सीट जिला परिषद सदस्य की होती है। उसके बाद मुखिया यानी ग्राम प्रधान का पद होता है।इसके साथ ही पंचायत समिति, सरपंच, वार्ड सदस्य एवं पंच पद हैं।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने 2026 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आरक्षण श्रेणी में बदलाव तय नियम के मुताबिक ही होगा और इस बार नए सिरे से पंचायतों का परिसीमन भी किया जाएगा। साथ ही मल्टी पोस्ट ईवीएम के उपयोग से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी एवं आधुनिक होगी। जबकि बिहार में पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। कई जिलों में विभिन्न पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ चुकी है और नए रोस्टर के बाद यह वितरण और व्यापक तरीके से सामने आएगा। आरक्षण श्रेणी का निर्धारण मार्च 2026 के बाद शुरू होने की संभावना है, जिसके बाद औपचारिक अधिसूचना जारी होगी। वहीं आरक्षण रोस्टर का नया निर्धारण और पंचायतों का परिसीमन। नियम के अनुसार पंचायत चुनावों में दो टर्म पूरे होने पर आरक्षित सीटों में बदलाव किया जाता है। इसी प्रावधान के तहत 2026 के चुनावों से पहले आरक्षित श्रेणियों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इसमें जिला परिषद, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य के सभी छह पदों की आरक्षित सीटों में बदलाव संभव है। इससे कई वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों की सीटें बदल सकती हैं, जिसके कारण कई जनप्रतिनिधियों की धड़कनें तेज हैं। आरक्षण के पुनर्निर्धारण से नई राजनीतिक स्थिति उत्पन्न होगी और नए चेहरों के उभरने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
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