एक बहुत अच्छी बात मुझसे पहले वाले भाई साहब बता रहे थे कि कितने कंट्री में हम जाकर हम यह प्रयास कर रहे हैं और कई वर्षों से कर रहे हैं। यह बहुत बड़ा चैलेंज है कि धरती को भी बचाना है और इंसान को भी बचाना है।
क्योंकि हम इस बात को भी झुठला नहीं सकते हैं कि एक समय वह था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी कहा था कि देशवासियों एक हफ्ते में एक दिन का उपवास रखें। हमने बचपन में देखा अनाज की बहुत कमी थी। एक बहुत बड़ी समस्या थी देश में। हम अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं थे। वो तो हमारे वैज्ञानिकों ने और हमारे देश के अन्नदाता किसान भाई और बहनों ने हमारे इस देश को अनाज में आत्मनिर्भर बनाया।
सिर्फ आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया बल्कि पूरी दुनिया में आज 81 करोड़ से ज्यादा जनता को फ्री अनाज दिया जा रहा है। पूरी दुनिया में यह अजूबा है और सबसे बड़ी ये स्कीम हमारे देश में है। हमारे साइंटिस्टों ने, हमारे किसानों ने यह कमाल करके दिखाया है। परंतु हम आज बड़ी तकलीफ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि हमारी धरती को हम नशीला बना दिया गया।
इसके ऊपर हमें चिंतन करने की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि यह जो प्लेटफॉर्म है, मंच है, वहां पर इसके लिए चिंतन और मनन किया जाए। क्योंकि यहां पर इंडस्ट्रियलिस्ट भी है, व्यापारी भी है, हमारे किसान भी हैं। देश के सभी जागरुक लोग यहां चिंतन और मनन कर रहे हैं। यहां हमें परिस्थितियों के उपर विशेष चिंता करने की जरुरत है। विशेष तौर से जो वर्जिन भूमि है, जो अनुपयोगी, उसर एवं बंजर हैं, जो इस तरह की जमीन है, यदि उसका हम नई तकनीक से उपयोग कर दें , तो हमारा देश अनाज में ही नहीं दलहन और तिलहन, फल और फूलों में भी हमारा देश आत्मनिर्भर तो बनेगा ही। जैसे कि हम चावल एक्सपोर्ट कर रहे हैं। लेकिन हम उससे भी ज्यादा हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं साथ ही इस धरती को भी बचा सकते हैं।
मैं हमेशा कहता हूं कि मैं एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आया हूं। हमारे राजस्थान में छोटी बस्ती को धाणी बोलते हैं। मैंने एक छोटी सी धाणी में एक साधारण किसान के परिवार में जन्म लिया और मुझे पता है कि किसान की क्या तकलीफ है।
आखिर किसान रात-दिन मेहनत करता है। आज हर कर्मचारी हो, अधिकारी हो, या मजदूर हो। सबकी काम करने की समय सीमा है। वह सुबह जाएगा आठ या नौ बजे, पांच बजे उसकी छुट्टी हो जाएगी। उसको पता मुझे इतना मेहनताना मिलना है, जिससे मेरा मेरा घर परिवार का खर्च चलाना है। परंतु किसान के लिए कोई काम करने की समय सीमा नहीं है और ना ही उसकी आयु सीमा है। जब तक उसके हाथ पैर चलते हैं बूढ़े-बच्चे हों या महिला, सब काम करते हैं। फिर भी हमारे किसान की माली हालत कैसी है।
अब यह अलग बात है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी ने 2014 से लेकर अब तक किसानों की आय बढ़ाने की, उनके लिए बजट के दायरे को बढ़ाने की बात हो, चाहे जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात हो, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के बात हो, इस तरह के अनेक उपाय किए गए। परंतु आज भी किसान जितना उसको अपनी मेहनत का फल मिलना चाहिए उतना नहीं मिल का रहा है। इसलिए हमें अभी बहुत जरूरत है कि जो बंजर है, जो वेस्ट लैंड है, उसको हम कैसे उपयोग में ले।
यह भारतवर्ष के प्रधानमंत्री जी का सपना है कि 2047 तक दुनिया की कोई भी ताकत इस हिंदुस्तान को विकसित राष्ट्र बनने से रोक नहीं सकेगी। इसके लिए हमें एक तो वोकल फॉर लोकल पर भी हमें ध्यान देने की जरूरत है.
मैं तो ये कहता हूं कि यहां हमारे सभी व्यापारी भाई बैठे हैं, वो देखेंगे कि आने वाले समय में इस देश में सबसे बड़ी इंडस्ट्री एग्रीकल्चर होगी। सच है ये वह समय आने वाला है। हमें नए तरीके से खेती करने की आवश्यकता है और हमें धरती को भी बचाना है।
मैं हमेशा कहता हूं मुझे जुकाम हो गया। भाई साहब, मैं डॉक्टर के पास जाऊंगा। लेकिन वो डॉक्टर सीधी दवा नहीं लिखेगा। वो कहेगा कि आप ब्लड की जांच कराइए, अब यूरिन की जांच कराइए। फिर वह रिपोर्ट आने के बाद जो दवा लिखता है, वो कारगर होती है। परंतु हमारे किसान भाई-बहन बैठे हैं। हम क्या इस मिट्टी का परीक्षण कर रहे हैं?
हम अंधाधुंध उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। जैसे मुझे जुकाम हो गई डॉक्टर से मुझे कहा आपको दो समय सुबह शाम दो खुराक लेनी है। आपकी जुकाम ठीक हो जाएगी। क्या मैं दो जगह की टाइम की जगह में चार टाइम मैं वह दवा लूंगा तो मुझे फायदा करेगी। नहीं वह नुकसान करेगी। पक्का नुकसान ही करेगी।
यही इस देश का अन्नदाता किसान इस धरती के साथ कर रहा है। इसलिए हमें इस धरती को भी बचाना है। क्योंकि समस्त इंसानों, पशु-पक्षियों समेत यह पूरा संसार पांच तत्वों से बना है। इसीलिए जब यह धरती प्रभावित होगी, तो यह संपूर्ण संसार प्रभावित हुए बिना नहीं बचेगा। इसीलिए हमें जैविक खेती की ओर, प्राकृतिक खेती की ओर हमें जाने की जरूरत है। क्योंकि तब तक हम प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को नहीं अपनाएंगे तब तक यह धरती बच नहीं पाएगी।
जो जीरा 70,000 रुपए क्विंटल बिकता था, वह 17 से 18 हजार रुपए क्विंटल पर आ गया। वो आगे जाकर फेल हो जाता है, इससे हमारे व्यापारियों और किसानों दोनों को तकलीफ है। जब रेट नीचे हो जाएगी तो किसान को उपज का दाम पूरा नहीं मिलेगा, तो किसान को भी तकलीफ होगी। हमारे जो व्यापारी एक्सपोर्ट करते हैं, उनको भी बड़ी तकलीफ होगी। इसलिए आज जो वर्जिन भूमि है- उसको हमें उपयोगी बनाना है, लाभदायक बनाना है।
इसी के जरिए जिस विकसित राष्ट्र को बनाने की हम कल्पना कर रहे हैं, उसको हम पूरा कर पाएंगे। हमारा देश आर्थिक रूप से 11वें पायदान पर था, आज चौथे-पांचवे पायदान पर आ गया है। यह हमारे प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच का नतीजा है।
अगर हम वर्जिन भूमि की बात करें तो अकेले मध्य प्रदेश में 20 फीसदी भूमि मौजूद है, जिसमें जैविक खेती करके मध्य प्रदेश अकेले ही दस हज़ार करोड़ से अधिक जैविक चावल और दाल निर्यात कर सकता है। यह कोई छोटी बात नहीं है, अकेले मध्य प्रदेश यह कमाल कर सकता है।
बासमती चावल की बात करें, तो आज इतना हम एक्सपोर्ट कर रहे हैं कि आने वाले समय में हमारा देश सिर्फ चावल ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में आगे बढ़ेगा।
मेरा तो इतना ही कहना है कि भारत में कुल 328.7 मिलियन हेक्टेयर भूमि है। उसमें से लगभग 55.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि यानी कि करीब 17% बंजर भूमि आज अनुपयोगी है। अगर हम उस 17% भूमि को उपयोगी बना दें, तो मैं कह सकता हूं कि यह खेती भी लाभ का सौदा बनेगी। हमारा किसान भी बचेगा, हमारा देश भी आगे बढ़ेगा और हमारी इंडस्ट्री और व्यापारी भी आगे बढ़ेंगे।
हमारे कृषि मंत्री जी शिवराज जी साहब ने यह तय किया अभी अट्ठाईस मई से बारह जून तक हमने लैप को लेंथ तक ले जाने के काम किया। हमारे साइंटिस्ट, हमारे वैज्ञानिक, हमारे अधिकारी सीधे गांव में किसानों के बीच गए। क्योंकि हमारा इस देश का किसान भी बहुत बड़ा वैज्ञानिक है। यह भी बहुत बड़ा साइंटिस्ट है। जो प्रैक्टिकल तरीके से काम करता है। उसको सब पता है। उनसे भी हमने राय मशविरा किया है। जिसमें से कई महत्वपूर्ण राय सामने आए हैं। जो किसान उन्नत खेती कर रहे हैं, उन्होंने कई अहम बातें बताई हैं। जिसपर काम करते हुए हम देश की खेती को आगे बढ़ाएंगे। मैं फिर से बहुत बहुत आभार व्यक्त करूंगा कि आपने जिस वर्जिन लैंड को उपयोगी बनाने का काम किया है। आज जिस उद्देश्य से यह जो आयोजन किया है, हमें पता है कि हमारा कृषि मंत्रालय आपकी हर जरुरत को पूरा करने के लिए आपके साथ है। आप जो वर्जिन लैंड को विकसित करना चाहते हैं, उसके लिए हमारा कृषि मंत्रालय तैयार है। बल्कि हम तो चाहेंगे कि हम सब मिलकर इस काम को आगे बढ़ाएं। आप सबका बहुत-बहुत आभार, बहुत-बहुत धन्यवाद।

भागीरथ चौधरी
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री
(यह लेख लेखक द्वारा नई दिल्ली में आयोजित वर्जिन लैंड सिक्योरिटी समिट 2025 में दिए गए भाषण पर आधारित है।)
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