"माओवाद कई दशकों की समस्या रही है। इसका निदान उतना आसान नहीं था, इसे जड़ से मिटाने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति जरूरी थी, कांग्रेस की सरकार में इसका साहस नहीं था। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार आई, उन्होंने आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा से संबंधित सभी विषयों पर जिस तरह से कड़े निर्णय लिये, उससे देश विरोधी तत्व हतोत्साहित हुए। उन्होंने मजबूत संकल्प शक्ति के साथ माओवाद के विरुद्ध हमें लक्ष्य दिया। गृह मंत्री अमित शाह जी ने नक्सलवाद विरोधी अभियान को दिशा दी। उन्होंने अपनी कुशल रणनीति और गहरी समझ से हमें मार्गदर्शन दिया," यह कहना है छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का उदय इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में। प्रस्तुत है साक्षात्कार के मुख्य अंश :
नक्सल मुक्त भारत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए एक स्पष्ट नीति और दृढ़ नेतृत्व को श्रेय जाता है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद के प्रति “शून्य सहनशीलता” और “विकास आधारित समाधान” की नीति अपनाई। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने न सिर्फ रणनीतिक स्तर पर इस अभियान को नेतृत्व प्रदान किया, बल्कि कई बार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर जवानों और स्थानीय लोगों का मनोबल भी बढ़ाया। इस पूरे अभियान में हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बस्तर की जनता के सहयोग ने इस लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाई। केन्द्र और राज्य की सुशासन आधारित योजनाओं की बदौलत हमने माओवाद को जड़ से उखाड़ने में सफलता हासिल की है।

सुकमा में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार द्वारा 50,000 रुपये का प्रोत्साहन और अन्य सहायता प्रदान की गई।
क्या यह कहना सही होगा कि “इंटेलिजेंस-ड्रिवन ऑपरेशन” ने पारंपरिक जंगल युद्ध की रणनीति को पीछे छोड़ दिया?
बिल्कुल, लोगों का भरोसा हमने जीता। लोग माओवाद से त्रस्त हो चुके थे। हमने अपने इंटेलिजेंस को मजबूत किया। हमारे डीआरजी के जवानों की भी इसमें बड़ी भूमिका रही जो स्थानीय परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ थे। तकनीक के साथ ही शासन और प्रशासन का स्थानीय लोगों के साथ प्रत्यक्ष संवाद ने माओवाद को न सिर्फ बेनकाब किया, बल्कि उनका असली चेहरा जनता के सामने आया।
माओवाद कई दशकों की समस्या रही है। इसका निदान उतना आसान नहीं था, इसे जड़ से मिटाने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति जरूरी थी, कांग्रेस की सरकार में इसका साहस नहीं था। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार आई, उन्होंने आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा से संबंधित सभी विषयों पर जिस तरह से कड़े निर्णय लिये, उससे देश विरोधी तत्व हतोत्साहित हुए। उन्होंने मजबूत संकल्प शक्ति के साथ माओवाद के विरुद्ध हमें लक्ष्य दिया। गृह मंत्री अमित शाह जी ने नक्सलवाद विरोधी अभियान को दिशा दी। उन्होंने अपनी कुशल रणनीति और गहरी समझ से हमें मार्गदर्शन दिया। बेहतरीन अंतर्राज्यीय समन्वय किया। सारे संसाधन उपलब्ध कराए। प्रधानमंत्री जी एवं केंद्रीय गृह मंत्री जी हमेशा जवानों का साहस बढ़ाते रहे, साथ ही बस्तर की जनता के विकास कार्यों के लिए असाधारण स्तर पर प्रयास किये। एक मजबूत सरकार के बूते ही नक्सल समस्या हल की जा सकती थी और यह मोदी जी के नेतृत्व में ही संभव हो सका।
किसी भी सफलता के लिए प्रभावी नीति और नीयत में प्रामाणिकता जरूरी होती है। कांग्रेस ने हमेशा नक्सलवाद को खाद-पानी देने का काम किया। वह इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करती थी। यदि ऐसा नहीं होता तो देश कब का नक्सल मुक्त हो गया होता। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आंतरिक सुरक्षा को लेकर जीरो टाॅलरेंस की नीति अपनाई। उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे को सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखा। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री जी के सुझाव से हमने अंतरराज्यीय समन्वय से एक सामूहिक रणनीति बनाई। यह पुख्ता साबित हुई और परिणाम आपके सामने हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुरक्षाकर्मियों के साथ
हमने पहले ही कह दिया था कि गोली का जवाब गोली से और बोली का जवाब बोली से दिया जाएगा। माननीय केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने एक नहीं कई बार यह कहा कि बातचीत से हर समस्या का समाधान संभव है। हिंसा से किसी का भला नहीं होगा। हमारी सरकार हमेशा बातचीत के लिए तत्पर रही, लेकिन उसके लिए हिंसा का रास्ता छोड़ना पहली शर्त है। बन्दूक के साथ बातचीत, दोनों एक साथ संभव नहीं है।
हमने एरिया डामिनेशन किया और अंतरराज्यीय समन्वय कर माओवादियों के लिए किसी भी जगह टिककर पनाहगाह बनाना मुश्किल कर दिया। अब उनके सामने कोई विकल्प नहीं बचा था। दूसरी ओर हमारी प्रभावी पुनर्वास नीति थी। अधिकतर माओवादी कैडर अपने बड़े नेताओं के आतंक की वजह से यह विचारधारा नहीं छोड़ पा रहे थे, जब फोर्स ने दबाव बढ़ाया और आकर्षक पुनर्वास नीति का लाभ उन्हें मिला तो उन्हें वापस शांति की राह पर लौटने में किसी तरह की परेशानी नहीं थी।
बहुत से नक्सली कैडर में पहुंचने के बाद यह महसूस करने लगे थे कि माओवाद एक खोखली हिंसक विचारधारा के अलावा कुछ नहीं है और इसमें अपने ही लोगों का खून बहाना पड़ता है लेकिन उनके पास एक्जिट का जरिया नहीं था। हमने एरिया डामिनेशन किया और ऐसा माहौल बनाया ताकि लोग बिना हिचक यह राह छोड़ सके। जब उन्होंने देखा कि उनके वे साथी जो आत्मसमर्पण की राह अपना चुके हैं और बेहतर जीवन जी रहे हैं तब उन्होंने भी यह निश्चय किया कि यही राह सही है।
माओवाद पर जीत सुशासन और संविधान की जीत है। इसे मैं मानवता की विजय मानता हूं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि 15 हजार आवास हमने आत्मसमर्पित एवं नक्सल समस्या से पीड़ितों के लिए स्वीकृत किए हैं। इससे बड़ी मानवीय पहल शायद ही कहीं आपको देखने को मिले। हम आत्मसमर्पित नक्सलियों को जमीन तथा रोजगार दे रहे हैं। संविधान के नाम पर हिंसा और देश को गुमराह करने वाले लोगों को यह नजर नहीं आएगा, क्योंकि उन्होंने राजनीतिक स्वार्थ के लिए नक्सलवाद को हमेशा सींचने का काम किया है। लेकिन अब जनता ऐसी ताकतों को पहचान चुकी है।
बस्तर में अब तेजी से विकास हो रहा है और आगे बढ़ने के अनेक रास्ते लोगों के पास मौजूद हैं। अपनी पुनर्वास नीति के माध्यम से हमने सुनिश्चित किया है कि आत्मसमर्पित नक्सली एक बेहतर जीवन जी सकें, हुनरमंद होकर अपना काम पकड़ सकें। इनसे उनके लिए स्थायी आजीविका की राह तैयार हो गई है।
बस्तरिया बटालियन सबसे सफल प्रयोग रहा क्योंकि बस्तर की भौगोलिक स्थिति बहुत कठिन है। इसे समझने के लिए स्थानीय लोग सबसे अधिक उपयुक्त होते हैं। बस्तरिया बटालियन के जवान यहां के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे। वे एरिया डामिनेशन के लिए सबसे उपयुक्त रहे।
नक्सलवाद का कभी कोई सामाजिक आधार नहीं था। यह आयातित विचारधारा सिर्फ देश को तोड़ने वाली ताकतों को प्रोत्साहित करती रही। इसने भाई को भाई से लड़ाने का काम किया। कई बच्चों को अनाथ बनाया, कई मां को उनके बच्चों से दूर किया, कई लोगों को कभी न भरने वाला जख्म दिया, न जाने कितने लोगों के घर उजड़े और न जाने कितने रोजगार खत्म हुए।
लोगों में इसके प्रति जबरदस्त आक्रोश था लेकिन इनके भय की वजह से वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते थे। जब सुरक्षा बलों ने एरिया डामिनेशन किया, कैंप खुले तो लोगों में सुरक्षा का भाव आया।
हमारा फोकस कभी गन पर नहीं था, हमेशा गवर्नेंस पर ही था। यह सुशासन की जीत है। हमने हमेशा आखिरी उपाय के रूप में ही गन को अपनाया, बार-बार नक्सलियों से आग्रह किया कि मुख्यधारा में शामिल हों। हथियार रखें, हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती। आगे भी सुशासन आधारित नीतियों से ही समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
आज हमारा बस्तर विकास के नये कीर्तिमान बना रहा है। बस्तर में जो बदलाव आये हैं उसके पीछे माननीय मोदी जी का सशक्त नेतृत्व रहा है। अब हमारा पूरा फोकस नक्सल मुक्त हो चुके क्षेत्रों के समग्र विकास पर है। इसके लिए नियद नेल्ला नार 2.0 पर हम काम करेंगे, पहले की योजना में केवल 7 नक्सल प्रभावित जिले शामिल थे, अब इसमें 10 जिले शामिल होंगे।
हमने बस्तर मुन्ने नाम से एक नई पहल की है जिसका अर्थ होता है अग्रणी बस्तर, जिसमें हम बस्तर के हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाएंगे, लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएंगे। अभी बस्तर के 85 प्रतिशत परिवारों की आय 15 हजार रुपए प्रतिमाह से कम है, हम केन्द्र की मदद से इसे अगले 3 सालों में 30 हजार रुपए प्रति माह तक पहुंचाने की योजना पर काम करेंगे। इसमें एनआरएलएम, सहकारी समिति, कृषक उत्पादक संगठन, वनधन विकास केंद्र एवं कौशल विकास पहल की अहम भूमिका होगी।
बस्तर धरती का स्वर्ग है और यहां टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हम इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करेंगे। हम बस्तर की प्रकृति के अनुकूल खाद्य, कृषि एवं वनोपज प्रसंस्करण पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि स्थानीय संग्राहक भाइयों की आय में बढ़ोत्तरी हो सके। हम मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन के माध्यम से जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। इको टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म आदि को बढ़ावा देंगे। लोग जनजातीय परिवेश में रहकर ही प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा लाभ लें, इसके लिए हमने होम-स्टे को विशेष बढ़ावा दिया है।
महासचिव से लेकर पोलित ब्यूरो के अनेक नेता न्यूट्रलाइज हो चुके हैं आत्मसमर्पण कर चुके हैं। माओवादियों की रीढ़ पूरी तरह टूट चुकी है यह समर्पण करने वाले नेता भी स्वीकार कर चुके हैं। हमने 31 मार्च की समयसीमा इसलिए ही निर्धारित की थी ताकि नक्सलवाद को समाप्त कर सकें।
बिल्कुल नहीं, केंद्रीय गृह मंत्री जी ने सबसे ज्यादा जोर अंतरराज्यीय समन्वय पर ही दिया, जिसकी वजह से यह बड़ी चुनौती हम हल कर सके, पड़ोसी राज्यों से बहुत अच्छा समन्वय है और इसमें किसी तरह से दिक्कत नहीं है।
विकास की गति तब धीमी होती है, जब बदनीयती हो। मोदी जी के एक दशक की सरकार और हमारे ढाई साल की राज्य सरकार के कार्यकाल में एक बात स्पष्ट है कि भाजपा शासित सरकारों के विकास का ग्राफ एक बार चढ़ता है तो चढ़ता ही जाता है उसमें उतार की कोई गुंजाइश ही नहीं है क्योंकि हमारी नीयत साफ है। इरादा नेक है।
यह बहुत दुखद है कि कांग्रेस पार्टी ने यहां भी राजनीति की। राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पर मिली इस बड़ी सफलता में उन्हें खुले दिल से जवानों की तारीफ करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा करना तो दूर उन्होंने इसमें भी राजनीति की। आतंकवाद विरोधी अभियान या नक्सल उन्मूलन अभियान कांग्रेस ने हमेशा राजनीतिक स्वार्थ साधने वाली बयानबाजी की है।
नहीं, लड़ाई में निरंतरता जरूरी है लेकिन इससे भी बढ़कर जरूरी है इरादा। डाॅ. रमन सिंह जी की सरकार माओवादियों से सफलतापूर्वक निपट रही थी लेकिन कांग्रेस की सरकार आ गई और यह निरंतरता बाधित हो गई। हमें फिर से शून्य से अपनी शुरूआत करनी पड़ी और हम अपने हौसले तथा रणनीति से जीते। इसलिए यह अहम है कि संकल्प मजबूत होना चाहिए, आप कब से लड़ रहे हैं यह सफलता के लिए जरूरी नहीं, सफलता के लिए यह जरूरी है कि आप कितने मजबूत इरादे से लड़ रहे हैं।
हम बस्तर और वहां के लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां बना रहे हैं। वहां के वनोपज एवं जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जा रहा है। बस्तर के विकास के ब्लूप्रिंट में हर बारीकी का ध्यान रखा गया है जिससे बस्तर विकसित भारत में महत्वपूर्ण जगह हासिल करेगा।
हर जगह की परिस्थिति अलग होती है और केंद्र तथा राज्य की सरकारें इसके मुताबिक माडल तैयार करती हैं। हाँ बस्तर के अनुभव इस तरह के क्षेत्रों के लिए उपयोगी जरूर होंगे।
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