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आपियों के अंत का आगाज

The beginning of the end for the AAP

धोखाधड़ी, झूठ, फरेब, झांसेबाजी, गुंडागर्दी ज्यादा समय नहीं चलती, इनके अंत होने में थोड़ी देर जरूर लग सकती है। फरेब से सीताजी का हरण करके रावण अति प्रसन्न और अपने को अजेय समझता था। उसके पास बड़े बड़े राक्षसों की सेना थी लेकिन उसका अंत हुआ और धर्म का राज कायम हो गया था। यही अरविन्द केजरीवाल के साथ हुआ। फरेब और झांसा देकर जनता के मन का हरण किया था, कलई खुली तो उनकी सेना भी धराशायी हुयी और खुद भी बुरी तरह से पिट गये। राजनीति के उदाहरण गवाह हैं कि जिन लोगों को झूठ और छलावों से राजगद्दी मिली थी, जिन्होंने अपने को अजेय समझ लिया, जो लोग इस गुमान में थे कि उनके हथकंडे कामयाब होते रहेंगे। उन्हें जनता ने धूल चटायी और असलियत खुलने पर बार बार चटायी। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश और आजम खां अपने को अजेय समझ रहे थे। आजम खां ने अपने को क्षेत्र का मुख्यमंत्री ही बना लिया था। जमीन जायजाद किसी की भी हो, मन आ गया तो उनकी हो गयी। न नियम न कानून बस केवल फरमान। कलेक्टर से जूते के फीते बंधवाने की बात कहने वाले आजम खां जेल में पड़े-पड़े सड़ गये और जेलरों के जूतों के फीते कसने को तरस गये। सारा ठाठ-बाट उसी जनता ने बन्द कर दिया जिसने सौंपा था। सत्ता के सहारे पनपे गुंडे उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलानें वाले अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की दुर्दशा सबने देखी है। ये वही गंुडे हैं जिन्हें सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी ने गोद लेकर पाला पोसा था। खुद धड़ाम हुये और पार्टी भी सत्ता से बाहर हुई। उनका अपने क्षेत्र में राज चलता था। एक अकेले धर्म-रक्षक ने राजधर्म निभाया और उन सबको उनकी सही जगह पर पहुंचा दिया, जनता ने जिस काम के लिये उन्हें भेजा था, उस योगी पुरूष ने एक-एक करके सबको कठघरे में खड़ा कर दिया।

केजरीवाल को दूसरी बार जनता ने चुन लिया तो अपने आप को खुदा समझने लगे। दिल्ली की राजनीति में मुसलमान वोटरों का वर्चस्व हैं और कांग्रेस पार्टी भी उनकी दम पर सरकार बनाती रही। कांग्रेस पार्टी की 15 साल मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित भले एक अच्छी नेता रही हो पर मुस्लिम तुष्टिकरण में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। वक्फ द्वारा जमीनों पर कब्जा किये जाने पर आंखे मूंद ली। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मस्जिदों के नाम पर जमीनें कब्जा हुई। दुकानें और वर्कशाप खुलते गये। उम्मीद है संशोधित वक्फ कानून आने से न्यायिक प्रक्रिया द्वारा दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।

केजरीवाल को पलटूराम समझ कर जनता ने पलट दिया - जो कुछ भी सत्ता में आने के लिये केजरीवाल ने बोला था वो सारा का सारा झूठ का पुलिन्दा साबित हुआ। अन्ना आंदोलन के बाद उन्होनंे राजनीति की ओर रूख किया जो अन्ना जी नहीं चाहते थे। जिस तरह आजादी मिलनें के बाद गांधी जी कांग्रेस को राजनीति में नहीं जाने देना चाहते थे फिर भी कांग्रेस राजनीति में आयी। भले ही बाद में कांग्रेस राह से भटक गयी और कुर्सी के लालच में सब कुछ भूलती गयी। ऐसा ही काम केजरीवाल ने किया। सत्ता में आने के लिये बच्चों की कसमें खायी, गांधी जी द्वारा बतायी गयी बातों और सिद्वान्त पर चलने की बातें कहीं। बड़ा बंगला, बड़ी कार, नौकर चाकर नहीं लेने के लिये गांधी जी ने कहा था। उन्होंने बच्चों की कसम खाकर बाते कहीं तो लोगों ने विश्वास कर लिया। राजनैतिक वादे जैसे यमुना नदी की स्वच्छता, पीने के साफ और पर्याप्त जल, सर्वश्रेष्ठ सड़कें, आदि के वादे बार-बार करते रहे। पर उनमें ये एक भी वादा पूरा नहीं किया। ऊपर से पार्टी के बड़े नेता भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरते चले गये। जेल गये साल-साल भर जमानतें नहीं हुयी। केजरीवाल जब जेल गये तो जेल से सरकार चलाने की जिद पर अड़े रहे, त्यागपत्र नही दिया। बाद में जब सुप्रीम कोर्ट से चुनाव लड़ने के लिये सशर्त जमानत मिली कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय नहीं जायेंगे, कोई फाईल साइन नहीं करेंगे तब मजबूरी में इस्तीफा दिया और कहा कि वे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे रहे हैं, जनता की अदालत में जायेगें। एेसा सफेद झूठ जनता नहीं झेल पायी, लोगों ने उनके द्वारा दिये गये लुभावने सपने, लालच आदि सब ठुकरा दिया।

शक्ति का दुरूपयोग केजरीवाल की आदत है: शायद ही कोई दूसरा मुख्यमंत्री होगा जो भ्रष्टाचार के नियमों के प्रतिकूल काम करनें के कांडो में इतना घिरा होगा। सुप्रीम कोर्ट तक से हार कर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव जेल काट रहे हैं, केवल एक चारा घोटाले में। एक दो भ्रष्टाचार के आरोपों में कार्यवाही चल रही है। केजरीवाल और उनके सहयोगी मंत्रियों पर उनकी सरकार पर दर्जनों एेसे आरोप हैं जिनके प्रमाणित होने पर उन्हें वर्षों जेल काटनी पड़ सकती है। जिस तरह सी.ए.जी. की जांच में उनकी सरकार के भ्रष्ट कारनामे सामने आ रहे हैं उन्हें अदालत में प्रमाणित करना कठिन नहीं होगा।

शराब घोटाले में हजारों करोड़ की हेराफेरी, शीश महल में करोड़ों का घपला, मोहल्ला क्लीनिक में दवा, डाॅक्टर, ब्लड प्रेशर, थर्मामीटर जैसे जरूरी सामान भी नहीं पाए गए। ऐसी कई क्लीनिक के  बारे में सी.ए.जी. रिपोर्ट में बताते हुये स्कूलांे की दुर्दशा पर भी टिप्पणी की गयी है। हर जगह मनमानी से रूपया खर्च किया गया। सैकड़ों लोगों की सीधी नौकरियां देने, बहुत से मामलों में आवश्यक आदेश उपराज्यपाल से नहीं लेना, कैबिनेट से अनुमोदन नहीं कराना, ये सब जवाब केजरीवाल को देने होंगे।

इसके अतिरिक्त अभी बहुत सी फाइलें सामने आयेगी। मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव सतर्कता और यहां तक की अपनी ही पार्टी की महिला सांसद से अभद्र और गुंडई व्यवहार ये सब शिकायतें भी जोर पकड़ेंगी। जिस तरह सुप्रीम कोर्ट में जब कुछ नेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी और चरित्र हनन के आरोप सिद्ध होने लगे तो सुप्रीम कोर्ट में बार-बार माफी मांग कर बच गये। पर इन आरोपों में माफी भी नहीं चल पायेगी। उन मामलों में नितिन गडकरी, अरूण जेटली, कपिल सिब्बल आदि ने नरमी दिखाते हुये इन्हें माफ कर दिया था।

केजरीवाल की अगली चाल पंजाब से राज्यसभा सीट: कोई लाख कहे या ‘आप” पार्टी मना करे कि केजरीवाल पंजाब से राज्य सभा में नहीं आ रहे। ‘आप” पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब से राज्यसभा के लिये उनके आने की कोई बात नहीं है। सवाल ये है अभी जो राज्यसभा सदस्य विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं। पहले वो जीत तो जायें तब राज्यसभा की सीट रिक्त होने पर किसी के नामांकन की बात आयेगी। केजरीवाल ही नहीं पूरी पार्टी डरी हुयी है कि पंजाब के उपचुनाव में पार्टी का प्रत्याशी कहीं हार न जाये। जिस तरह दिल्ली में जनता ने ‘आप” को दागी माना है वो दामन पर दाग पंजाब में भी लगेंगे। पार्टियां हारती जीतती रहती हैं पर भ्रष्टाचार झूठे वादे, फरेबी राजनीति के चार्ज पर ‘आप” पार्टी दिल्ली में हारी है। इन दागों को छुड़ा पाना आसान नहीं होगा।

जैसे ही राज्यसभा की सीट पंजाब से रिक्त होगी, लिख लीजिये केजरीवाल ही वहां से प्रत्याशी होंगे। उनके प्रत्याशी होने और जीतने में कोई अड़चन नहीं है। एक प्रदेश के नेता अन्य प्रदेशों से कई बार चुने जाते रहे हैं। सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, तारिक अनवर जैसे राष्ट्रीय नेता अन्य प्रदेशों से राज्यसभा के सदस्य चुने गये हैं। अतः केजरीवाल पर इस बात को लेकर उंगली नहीं उठायी जा सकती।

पंजाब से राज्यसभा में आने पर केजरीवाल को फायदे ही फायदे: राज्यसभा सदस्य चुने जाते ही वे राज्यसभा में ‘आप” पार्टी दल के नेेता बन जायेंगे। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा होने से उन्हें संसद भवन में कार्यालय हेतु कमरा मिल जायेगा, उन्हें बोलने के बहुत अवसर मिलेगें। उनकी झूठ को सच करने की कला फिर से रंग दिखायेगी। दिल्ली में आवास मिल जायेगा और पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते बड़ा बंगला मिल जायेगा। पंजाब सरकार उन्हें उच्च श्रेणी की सुरक्षा दे देगी। कोई न कोई पद ले लेने से उन्हें पूरा व्यक्तिगत सहायक आदि का स्टाफ और कार पंजाब सरकार से मिल जायेगी। पंजाब सरकार में योजना आदि में तब उनको नियमानुसार दखल देने का अधिकार मिल जायेगा। पंजाब के मुख्यमंत्री पर सीधा प्रभाव और नियंत्रण रहेगा। आने जानें के लिये अधिकारिक रूप से हेलीकाॅप्टर, जहाज आदि की व्यवस्था आसान रहेगी। चंडीगढ़ में भी अधिकारिक रूप से रहने के लिये व्यवस्था हो जायेगी और हो सकता है कि जिस तरह सोनिया गांधी को कुछ न होकर भी यू.पी.ए. की अध्यक्ष होने के नाते सभी सुविधायें मिली थी, उसी तरह केजरीवाल भी पंजाब सरकार में कोई पद लेकर, अध्यक्ष बन कर सारी सुविधायें प्राप्त कर सकते हैं। किसी न किसी रूप में सीधे या परोक्ष रूप से पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल की सेवायें भी प्राप्त हो जायेगी। पार्टी फंड इकट्ठा करनें और लाइसेंस प्रणाली आदि में भी उनका मार्गदर्शन रहेगा। इस तरह जितनी जरूरत केजरीवाल को राज्यसभा में आने की है, उतनी जरूरत पार्टी को आगे चलाने या जिन्दा रखने के लिये केजरीवाल की है। आगे चल कर पंजाब में फिर से चुनाव आने पर मुख्यमंत्री मान के सहारे जीत जाने की सोची भी नहीं जा सकती। अतः हर सूरत में केजरीवाल पंजाब से राज्यसभा में आने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगायेंगे, समर्थकों से नारे लगवायेंगे और आकर ही मानेंगे।






डॉ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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