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NCRB के हैरान करने वाले आंकड़े, 10 साल 4 गुना बढ़े दुष्कर्म के मामले

Startling NCRB data: Rape cases have quadrupled in 10 years

बीते कुछ सालों में महिलाओं की सुरक्षा बड़ी चिंता का सबब रही हैं। ऐसे में हाल ही में  बिहार के जमुई-समस्तीपुर से लेकर बांका तक, दिल्ली के कालकाजी और ओडिशा के धेनकनाल से महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ की जो घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। देश में लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। रेप की घटनाओं ने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि हाल में देश में तमाम घटनाएं, जो हाल के समय में सामने आई हैं, उनकी गिनती की जा सकती है पर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि स्थिति कितनी भयावह है और जिसका पैमाने काफी बड़ा है। 

NCRB के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में, देश भर में रेप की शिकार बच्चियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जबकि अदालतों में दोषियों को सजा मिलने की दर घटी है। देश में बच्चियों के साथ रेप के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में पुलिस ने जहां 18 साल से कम उम्र की 10,934 पीड़ित बच्चियों के मामले दर्ज किए थे। वहीं 2024 में यह संख्या 43,675 तक पहुंच गई।

एक दशक में बच्चियों से दुस्कर्म की घटनाओं में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। देखा जाए तो हर साल 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ यौन हिंसा के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं।

एनसीआरबी के आंकड़ों को देखें तो नाबालिग लड़कियों से जुड़ी जो घटनाएं सामने आती हैं, उनमें ज्यादातर रेप के मामले होते हैं। 2020 से 2024 के बीच 1.83 लाख बच्चियों के साथ रेप के मामले दर्ज किए।.... POCSO फ्रेमवर्क के तहत ट्रैक किए जाने वाले अपराधों में ज्यादातर दुस्कर्म के मामले रहे। और इसकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है.. 

वहीं यौन उत्पीड़न के मामलों में भी लगातार बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है.. अगर हम बात करें कि किस उम्र की लड़कियां उत्पीड़न की सबसे ज्यादा शिकार हुई हैं तो.. इसमें नाबालिग लड़कियों की संख्या सबसे अधिक है.. पांच सालों के आंकड़ों के मुताबिक, 16 से 18 साल की उम्र की लड़कियों के साथ सबसे ज्यादा दुष्कर्म की घटनाएं सामने आई हैं।

  • 16 से 18 साल की उम्र की लड़कियां के साथ रेप और दुस्कर्म के 94,503 मामले। वहीं 
  • 12 से 16 साल की उम्र की लड़कियां के साथ 70,442 मामले सामने आए हैं.. जो जाहिर तौर पर चिंता का विषय है..  आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दस में से लगभग नौ पीड़ित इसी उम्र की लड़कियां थीं। और इसमें सबसे चौकाने वाली  बात यह है कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले लोग ज्यादातर उनकी पहचान या उनके आस-पास के ही होते हैं।

     आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में, लड़कियों के साथ रेप के 97 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ित की जान-पहचान का व्यक्ति था। इन मामलों में आरोपी ज्यादातर वो व्यक्ति रहा, जिसने लड़की को शादी का झांसा दिया। वहीं कई मामलों में दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और परिवार के सदस्य भी आरोपी पाए गए।

अब सवाल यह है कि आखिर इस बढ़ते आंकड़े को कम कैसे किया जाए क्या कानून बनने के बाद भी इन मामलों की संख्या बढ़ती जाएगी या फिर इसपर लगाम लगेगा और लगाम लगेगा भी तो क्या न्याय मिलने में देरी तो नहीं होगी.. सवाल सिर्फ इतना है कि इस छोटी मानसिकता के लोगों का खातमा आखिर कैसे होगा और इसके लिए क्या करना होगा...आंकड़े सच्चाई तो लाते हैं पर उन आंकड़ों पर लगाम लगान बड़ी चिंता का विषय है और उसके लिए लिए समाज और सरकार दोनों को ही सख्त होना पड़ेगा जिससे ऐसी घटनाएं कम हों और महिला सुरक्षा बेहतर हो।  यह बात सिर्फ भारत के लिए नहीं है बल्कि यह गंभीर विषय पूरी दुनिया के लिए है। 

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