चंद्रयान-3 के लैंडर ने जिस जगह चंद्रमा का स्पर्श किया, अब उस जगह का नाम ‘शिवशक्ति प्वाइंट’ होगा। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने उम्मीद के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की इस घोषणा की आलोचना की है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने पूछा है कि प्रधानमंत्री मोदी को यह हक किसने दिया कि वह चांद का नाम रखें। हालांकि वह शायद भूल गए हैं कि कांग्रेस ने 2008 में चंद्रयान-2 का प्रोब गिरने की जगह को जवाहर प्वाइंट नाम दिया था। कांग्रेस से सरकार की जिम्मेदारी भरी आलोचना की देश को अब उम्मीद नहीं रही है और कांग्रेस लगातार इस नाउम्मीदी पर खरी उतरती है। बहरहाल कांग्रेस की इन राजनीति-प्रेरित आलोचनाओं से परे अगर इस नामकरण का सूक्ष्म विवेचन किया जाए तो यह नाम 21वीं सदी के सशक्त भारत की बिल्कुल सही तस्वीर चित्रित करता है। शिव शक्ति का एक अर्थ भगवान शिव और पार्वती के संबंध में है। वहीं अगर शिव के अर्थ पर गुण के अनुसार विचार किया जाए तो इसका अर्थ शुभ, मांगलिक और कल्याणकारी है और शक्ति का अर्थ सामर्थ्य, पराक्रम या ताकत है। इस तरह शिवशक्ति प्वाइंट भारत की आसमान छूती उस ताकत का प्रतीक है जो पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी है। पीएम मोदी ने चंद्रयान-2 के इम्पैक्ट पॉइंट को भी नया नाम दिया। अब उसे ‘तिरंगा’ नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंन कहा कि 23 अगस्त को जब भारत ने चंद्रमा पर तिरंगा फहराया उस दिन को अब ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
कोविड-19 संकटकाल में 95 से अधिक देशों को वैक्सीन किया निर्यात
सर्वे भवन्तु सुखिनः और वसुधैव कटुम्बकम् भारत की सभ्यता के ध्येय वाक्य हैं। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत ने यह प्रमाणित किया है कि ये वाक्य हमारे ग्रंथों के उद्धरण भर नहीं है बल्कि हमारे जीवंत मूल्य हैं। विश्व कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सबसे पहले कोविड-19 संकटकाल में दिखी। कोविड वैक्सीन बनने से पहले भारत ने पूरे विश्व के लिए हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन, पेरासिटामोल और अन्य जरूरी दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की। फिर जब देश में कोविड वैक्सीन बनी तो अपनी विशालकाय जरूरतों के बावजूद हमने 95 से अधिक देशों को वैक्सीन निर्यात की या अनुदान में दी। विश्व भर के नेताओं ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल की तारीफ की। भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोवेक्स पहल के माध्यम से पाकिस्तान तक को वैक्सीन पहुंचाई।
विश्व कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
श्रीलंका-अफगानिस्तान में आए संकट के दौरान भी भारत ने अपना शिवमय रूप दिखाया। 2022 में श्रीलंका जब अर्थसंकट से जूझ रहा था और हमारे पड़ोसी देश के पास जरूरी सामान, अनाज और दवाइयां तक खरीदने के पैसे नहीं थे तब मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने पड़ोसी देश की 4 बिलियन डालर की मदद दी और अनुदान, क्रेडिट लिमिट तथा तेल-अनाज-दवाइयों जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति से आम लोगों की मुश्किलें दूर करने में अहम भूमिका निभाई। इसी तरह अफगानिस्तान में अशरफ गनी सरकार को अपदस्थ करके सत्ता पर काबिज तालिबान की सोच और मजहबी नजरिया भारत के मूल्यों के खिलाफ है। तालिबान जिस मजहबी कट्टरता का प्रतीक है, भारत उसके बिल्कुल विपरीत ध्रुव पर खड़ा है, फिर भी तालिबान के सत्तासीन होने के बावजूद हमने आम लोगों के लिए मानवीय सहायता बंद नहीं की। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम से भागीदारी करते हुए भारत अब तक इस युद्धग्रस्त देश को 47,500 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति कर चुका है। इसी तरह नेपाल और तुर्की में आए भूकंपों के दौरान भी भारत ने उभरती वैश्विक शक्ति के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई और तत्काल प्रभावित देशों में सहायता दल और सामग्री भिजवाई।
आर्थिक रूप से पिछड़े देश भी इसरो के माध्यम से लॉन्च कर पाएंगे अपने उपग्रह
वैश्विक और बहुदेशीय मंचों में भी भारत ग्लोबल साउथ या आर्थिक रूप से पिछड़े देशों की आवाज बना है। समूह 20 (G20) की अध्यक्षता और ब्रिक्स में अपनी भागीदारी से भारत ने वैश्विक विमर्श में ग्लोबल साउथ की वृहत् भागीदारी की वकालत की है। इसी तरह अंतरिक्ष क्षेत्र में भी भारत की उपलब्धियां पूरे विश्व के लिए शिवरूप है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के बेहद महंगे स्पेस मिशनों के मुकाबले भारत की अंतरिक्ष यात्रा चूंकि काफी मितव्ययी है, ऐसे में दुनिया के आर्थिक रूप से पिछड़े देश इसरो के माध्यम से अपने उपग्रह लॉन्च कर पाएंगे। बहरहाल नए भारत की नई उपलब्धियों से विश्व उम्मीद कर सकता है कि जैसे-जैसे भारत की शक्ति बढ़ेगी, वैसे-वैसे विश्व शिवमय होने की तरफ बढ़ेगा।

प्रेरणा कुमारी
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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