चन्द्रयान 3 की सफलता पर विपक्ष की बेरूखी देखकर हमें भाजपा के शीर्ष नेता, अटल बिहारी बाजपेयी की याद आती है। उन्होंने विपक्ष में रह कर पाकिस्तान को यु़़द्ध में हरा कर उसके दो टुकड़े किये जाने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को बधाई दी थी, दुर्गा का रूप बताया था। विपक्ष के मुर्झाये चेहरे देख कर एैसे लगता है कि चन्द्रयान 3 की सफलता पर उन्हें भारत की जीत से ज्यादा लोकसभा चुनाव 2024 में अपनी हार की चिंता सता रही है। अधिकांश विपक्षी पार्टियों के नेताओं को विश्वास नहीं था कि हम चांद पर सफलता से पहुंच कर भारत का झंडा फहरा देंगे इसलिये जब देशवासी चन्द्रयान 3 की यात्रा को पल पल निहार रहे थे तब विपक्षी नेता चैन की नींद सो रहे थे। वे शायद चन्द्रयान के फेल होने का प्रेस स्क्रिप्ट तैयार कर रहे थे। विपक्ष में किसी नेता ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई नहीं दी। किसी ने दी भी है तो दबे मुंह से। आखिर क्यों इतनी जलन है मोदी जी से। उन्होंने बधाई देने की औपचारिकता तक नहीं निभाई। आज भी इन्दिरा जी को बांग्लादेश देश बनानें के लिये याद किया जाता है, वधाई मिलती है। सेना के साथ साथ उनके नेतृत्व की चर्चा होती है। जब हमनें पाकिस्तान को घुस कर मारा था तब बधाई देने के बजाय विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर प्रश्नों की झड़ी लगा दी यहां तक कि भारतीय सेना के कमांडर और जनरल तक की बातों और वक्तव्यों पर शंका जतायी थी। कांग्रेस पार्टी ने कई बार सारी हदें पार कर दी चाहे डोकलाम हो, पेंगाँन्ग झील का मामला हो या सर्जिकल स्ट्राइक हो, सभी मौकों पर नरेन्द्र मोदी को घेरने के चक्कर में भारतीय सेना पर अविश्वास जताया। जब देश के वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन बना रहे थे, तब भी उसे हल्के में लिया और आश्वत थे कि भारत कभी ये वेक्सीन नहीं बना सकेगा क्योंकि उनके राज में कभी वेक्सीन नहीं बन सकी और जो बनी भी थी तो बीमारी फैलने के तीस साल बाद। कोरोना वेक्सीन बनानेें में हम सफल हो गये और बहुत से देशों ने भारत से वेक्सीन खरीदी।
समझने वाली बात ये है कि युद्ध तो सेना ही लड़ेगी और वेक्सीन तो वैज्ञानिक ही बनायेगा। इसमें कई बार असफलता भी हाथ लगती है। असफलता पर निराश नहीं होना, उससे सीख लेकर आगे बड़ना और विशेषज्ञों को उत्साहित करना, उन्हें ध्येय की ओर अग्रसित करना, आर्थिक एवं मूलभूत सुविधायें देना, क्षतिपूर्ति कर मार्ग प्रशस्त्र करना देश के नेतृत्व का काम है, यह कमी पूर्व प्रधानमंत्रियों में रही है। नरेन्द्र मोदी पूर्व के प्रधानमंत्रियों से भिन्न है, वे दृढ़ संकल्प लेकर चलते हैं। अपने सैनिकों और वैज्ञानिकों पर भरोसा रखतें हैं, उन्हें उत्साहित करते हैं। इसके बीसियों प्रमाण हैं। मोदी जी का सैनिकों से सीमा पर जाकर दिवाली मनाना, वेक्सीन बनानें वाले वैज्ञानिकों के पास लेवोरेटरी में जाकर निरीक्षण करना, उन्हें उत्साहित करना, उनसे बातचीत करना आदि हम सभी ने देखा है।
चन्द्रयान 2 मंजिल के पास पहुंच कर असफल होने पर उन्होेनें टीम के मुखिया वैज्ञानिक को निराश देख कर उनसे वार्तालाप किया और उन्हें दोबारा प्रयास के लिये उत्साहित किया। उनके रोने पर खुद भी नरेन्द्र मोदी की आंखे गीली हो गयी थी। नतीजा टीम के सारे वैज्ञानिक दोबारा उसी उत्साह और हिम्मत के साथ चन्द्रयान 3 के निर्माण में लग गये और आज उसका फल हम सबके सामनें है। अब वैज्ञानिक सूरज पर यान भेजने की सोचने लगे हैं।
एेसे बहुत अवसर आये जब मोदी जी अपने देशवासियों को, कर्मकारों को यहां तक कि भविष्य चुननें के चौराहे पर खड़े युवाओं को, स्कूल के बच्चों को समय समय पर उत्साहित करते है। उन्हें अपने और सुनहरे भारत के भविष्य के लिये मार्गदर्शन करते हैं। प्रयागराज मेें कुम्भ मेले की सफलता पर खुद मोदी जी ने सफाई कर्मचारियों के पैर अपने हाथों से धोकर ये बतला दिया कि उनके लिये छोटा-बड़ा कोई नहीं है। उनसे हाथ मिलानें से दूर रहनें वाले नेता अचंभित हो गये थे। महात्मा गांधी ने दलितों के घरों में झाड़ू लगायी और कोड़ रोग के पीड़ितों की जाकर खुद सेवा की उसी मार्ग पर चल कर मोदी जी ने दलितों के पैर पखार कर देश को एक नया संदेश दिया। गांधी जी का दम भरनें वाली कांग्रेस उस रास्ते से दूर हो गयी। धीरे-धीरे गांधी जी के अनुयायियों से कांग्रेस के कुछ स्वार्थी तत्वों ने पार्टी छुड़ाकर कब्जा कर लिया। इस तरह कांग्रेस अपने एजेंडे से भटक गयी।
प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर थे, चन्द्रयान के चांद पर उतरनें को बेसब्री से देख रहे थे, जिस तरह सर्जिकल स्ट्राइक पर रात भर जागे और सफलता के बाद ही चैन की सांस ले पाये थे। उसी तरह वे एक महान संकल्प को पूरा देखने के लिये लालायित थे। सफल होने पर वैज्ञानिकों को बधाई दी। ग्रीस से भारत पहुंचते ही सबसे पहले अपने वैज्ञानिकों से मिले।
जितना मार्मिक दृश्य चन्द्रयान 3 के चांद पर उतरनें का था जब करोड़ों देशवासियों की आंखों में खुशी के आंसू छलक रहे थे, करोड़ों नाच रहे थे, तालियां बजा रहे थे, उतना ही मार्मिक दृश्य था जब मोदी जी अपने वैज्ञानिकों से मिले। वैज्ञानिकों और मोदी जी के मिलन के ये पल देखकर एैसे लगा था जैसा कि जब श्री राम युद्ध जीत कर अपने प्यारे भाई भरत से मिले थे। दोनों भाई अपने आंसू रोकने का अथक प्रयास करनें में असफल हो गये थे। वैज्ञानिकों को बधाई देते समय मोदी के सम्बोधन में, उनकी आवाज में संकल्प था। विजयी होने की अनुभूति पर उनके कंठ की रूंधी आवाज बता रही थी कि प्रधानमंत्री अपनी खुशी के आंसू, जैसे छलकनें से रोकनें के प्रयास में गले में जाकर उनकी आवाज में जा मिले हों। उनके शब्द, संदेश, उनकी आवाज हम सभी ने सुनी, करोड़ों देशवासियों ने सुनी, विश्व भर में लोगों ने सुनी और कुछ पड़ोसी देश तो टकटकी लगाये देख भी रहे होंगे, सुन भी रहे होंगे। जब लोगों की आंखे गीली हो गयी तो वैज्ञानिकों का रो पड़ना तो स्वभाविक था। ये क्षण एेतिहासिक था, ये पल अमर हो गये, ये समय गर्व का था जो थोड़ी देर के लिये जैसे थम गया हो। उनके उस भाषण ने वैज्ञानिकों और देशवासियों को फिर उत्साह और हिम्मत से लबालब कर दिया। दुनिया के बहुत से देश में लोग सोच रहे होंगे कि काश नरेन्द्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री उनके देश में भी होता।
चांद पर जिस जगह हमनें पहले तिरंगा फहराया था उस जगह का नाम मोदी जी ने “तिरंगा” रख दिया और समूचे स्थल को “शिव शक्ति” का नाम देकर भारत को चांद पर स्थापित कर दिया। अब सदियों, काल तक, त्रिकाल तक ये स्थान शिव शक्ति के नाम से जाना जायेगा। यही सूझ-बूझ तो नरेन्द्र मोदी को अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों से अलग बनाती है। नरेन्द्र मोदी एक सफलता मिलते ही दूसरी की ओर रूख कर लेते हैं। वे आराम नहीं करते, रूकते नही,ं अविरल चलना, चलते रहना उनकी आदत है। न वे चैन से बैठते हैं न अपनी टीम के किसी साथी को बैठने देते हैं।
विकसित और शक्ति शाली देश बनानें के लिये पूरे विश्व से मुकाबला करना होता है। पूरे देश में उन लोगों से भी निपटना पड़ता है जो विदेशी ताकतों से गुप चुप हाथ मिला कर उन्हें अपदस्थ करना चाहते है। विपक्ष को समझना होगा कि मोदी जी और उनकी सरकार के सीने पर अनगिनत मेडल लग चुके हैं। देश भर में खुली शौच को रोकने जैसा असंभव कार्य गरीबों को शौचालय और आवास, दुश्मन पड़ोसी पाकिस्तान की पिटाई कर सड़क पर लाना, राफेल 400, तेजस, नवीनतम मिसाइल, पनडुब्बी, टैंक से सेना को सुसज्ज्ति करना और अब चन्द्रयान की सफलता, सभी का लिखना यहां संभव नहीं है।
यह सच है कि चन्द्रयान वैज्ञानिकों ने बनाया और चांद पर पहुंचाया उनके ही बिद्धुलता का प्रमाण है। देश के वैज्ञानिकों पर हमें गर्व है जिनके कारण आज भारत को ये गौरव प्राप्त हुआ। हम विश्व में चौथे देश है जो अपने को चन्द्रमा पर स्थापित कर सके और साउथ पोल पर स्थापित करनें वाले पहले देश है। पर सच यह भी है कि ये सफलता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे सशक्त संकल्पित नेतृत्व के बिना मिलना संभव नहीं होती। यदि विपक्षी पार्टियां इस महान सफलता पर वैज्ञानिकों के साथ साथ प्रधानमंत्री को भी वधाई देती तो आज जनता में उनकी छवि में थोड़ी बहुत सुधार होता।

डॉ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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