नई दिल्ली-अभी हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने अवैध शिकार पर रोक लगाने के उद्देश्य से गैंडे के सींगों में रेडियोधर्मी पदार्थ इंजेक्ट किया है बता दें कि इस रेडियो धर्मी पदार्थ के माध्यम से शिकारियों का पता लगाने में मदद मिलेगी. गौरतलब है कि इस राइज़ोटोप का नाम राइज़ोटोप रखा गया है.
राइज़ोटोप परियोजना
इसके तहत गैंडे के सींगों में हानिरहित,रेडियोधर्मी पदार्थ इंजेक्ट किया जा रहा है. यह एक पायलट परियोजन है जिसमे 20 गैंडों को शामिल किया जायेगा .इसके संचालन में विटवॉटर सैंड विश्वविध्यलय की महत्वपूर्ण भूमिका है. बता दें की योजना के तहत गैंडे के सींग में रेडिओ आइसोटोप को5 वर्ष बाद पुनः टॉप अप करने की आवश्यकता होगी. इसका उद्येश्य गैंडे के सींगो को रेडियोधर्मी कर उनके अवैध शिकार को रोकना है.
*प्रभाव
- यह प्रक्रिया बेहोश गैंडों पर की जाती है, जो जानवरों के लिए सुरक्षित है, तथा इसमें विकिरण की मात्रा इतनी कम होती है कि इससे उनके स्वास्थ्य या पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- रेडियोधर्मी उपचारित सींगों के अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर पाए जाने की संभावना अधिक होती है , जिससे यह संभावना अधिक हो जाती है कि तस्करी करने वालों का पर्दाफाश हो और उन पर कार्यवाही की जा सके और उन्हें दोषी ठहराया जाए
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परियोजन की जरुरत क्यों पड़ी
- गैंडे के सींग काले बाज़ार में अत्यधिक मूल्यवान होते हैं , जिनकी कीमत सोने और कोकीन के बराबर होती है।
- सींग काटने और सींगों में जहर डालने जैसी पिछली शिकार-रोधी रणनीतियाँ शिकारियों को रोकने में असफल रही हैं।
- सरकारी प्रयासों के बावजूद, 2023 में 499 गैंडे मारे गए, जो 2022 से 11% अधिक है , मुख्य रूप से राज्य द्वारा संचालित पार्कों में।
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