logo

ओडिशा में विशेष विकास परिषदों का पुनर्गठन

Reorganization of Special Development Councils in Odisha

भुवनेश्वर, 7 अप्रैल: मुख्यमंत्री मोहनचरण माझी के नेतृत्व में ओडिशा सरकार ने सोमवार ( 6 अप्रैल ) को राज्य के 23 जिलों में विशेष विकास परिषदों  का पुनर्गठन करते हुए नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों की नियुक्ति की है। इन परिषदों का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति का संरक्षण तथा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विकास करना है। अतः इन परिषदों के पुनर्गठन को आदिवासी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर शासन और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

उल्लेखनीय है कि वर्तमान माझी सरकार के गठन के लगभग तीन महीने बाद सितंबर 2024 में इन परिषदों के कामकाज को असंतोषजनक बताते हुए उन्हें  अपने उद्देश्य को हासिल करने में  नाकाम बताते हुए भंग कर दिया था। अब लगभग डेढ़ वर्ष बाद नई भाजपा सरकार ई ने इसका पुनर्गठन किया है।

पूर्ववर्ती बीजेडी सरकार ने इन परिषदों की स्थापना पहली बार 21 सितंबर 2017 को आदिवासी बहुल नौ जिलों—मयूरभंज, क्योंझर, सुंदरगढ़, गजपति, कंधमाल, रायगड़ा, मलकानगिरी, नबरंगपुर और कोरापुट—में की गई थी। इन क्षेत्रों में 62 जनजातीय समुदायों और 13 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की बड़ी आबादी रहती है। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों को राज्य के विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना था।
मई 2023 में बीजेडी सरकार ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले आदिवासी मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष विकास परिषदों का विस्तार 14 और जिलों तक किया था। इनमें बालांगीर, गंजाम, बौद्ध, बालासोर, संबलपुर, ढेंकानाल, कालाहांडी, नयागढ़, नुआपाड़ा, अंगुल, बरगढ़, जाजपुर, झारसुगुड़ा और देवगढ़ शामिल थे।

विशेष विकास परिषदों को जिला स्तर की योजना और क्रियान्वयन इकाई के रूप में डिजाइन किया गया है। इन परिषदों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान, संसाधनों का आवंटन और परियोजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई। इनके कार्यों में आदिवासी कला, संस्कृति, परंपरा और विरासत का संरक्षण, बुनियादी ढांचे और आजीविका को बढ़ावा देना तथा आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना शामिल है। ये परिषदें समुदाय-आधारित विकास पर जोर देती हैं ताकि समावेशिता और सांस्कृतिक संरक्षण के साथ आर्थिक प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

अब नए सिरे से इनका गठन किया गया है, जिसमें अधिकांश पदों पर भाजपा से जुड़े नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए 23 में से 22 परिषदों में महिलाओं को उपाध्यक्ष बनाया गया है। ये परिषदें राज्य के लगभग 84 लाख आदिवासी लोगों के समग्र विकास के लिए कार्य करेंगी।


सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों की पूरी सूची निम्नलिखित है-

अंगुल: अध्यक्ष – बसीष्ठ नायक; उपाध्यक्ष – सुरुमणि छतार

बालांगीर: अध्यक्ष – बल्लव धरुआ; उपाध्यक्ष – जयंती भोई

बालेश्वर: अध्यक्ष – बिपिन मरांडी; उपाध्यक्ष – झरना सिंह

बरगढ़: अध्यक्ष – गोबर्धन भोई; उपाध्यक्ष – तिलोत्तमा भुए

बौद्ध: अध्यक्ष – डमरुधर कंहार; उपाध्यक्ष – झरना जानी

देवगढ़: अध्यक्ष – प्रशांत कुमार बेहरा; उपाध्यक्ष – प्रमिला किसान

ढेंकानाल: अध्यक्ष – नौरि सिंह; उपाध्यक्ष – सेबती भोई

गजपति: अध्यक्ष – कमदेव बड़नायक; उपाध्यक्ष – पंकजिनी दलई

गंजाम: अध्यक्ष – नीलमाधव पात्र; उपाध्यक्ष – ललिता प्रधान

जाजपुर: अध्यक्ष – राजेंद्र कंदुलिया; उपाध्यक्ष – सानी जारिका

झारसुगुड़ा: अध्यक्ष – समल नायक; उपाध्यक्ष – संजुक्ता ओरांव

कालाहांडी: अध्यक्ष – विजय कुमार दिसारी; उपाध्यक्ष – रीना भोई

कंधमाल: अध्यक्ष – मनगोबिंद प्रधान; उपाध्यक्ष – कल्पना कुमारी कंहार

क्योंझर: अध्यक्ष – ममता नायक; उपाध्यक्ष – मानस कुमार नायक

कोरापुट: अध्यक्ष – भगवान मुदुली; उपाध्यक्ष – सुकांति माझी

मलकानगिरी: अध्यक्ष – गंगाधर सोड़ी; उपाध्यक्ष – सावित्री पाडियामी

मयूरभंज: अध्यक्ष – डॉ. बुधन मुर्मू; उपाध्यक्ष – कौशल्या नायक

नबरंगपुर: अध्यक्ष – बसंती माझी; उपाध्यक्ष – लिंगराज भतरा

नुआपाड़ा: अध्यक्ष –  होमसिंह माझी; उपाध्यक्ष – बेलमती माझी

रायगड़ा: अध्यक्ष – विद्याधर साबर; उपाध्यक्ष – मजुला मिनियाका

संबलपुर: अध्यक्ष – भगेंद्र किसान; उपाध्यक्ष – सुषमा मुंडा

सुंदरगढ़: अध्यक्ष – संतोष कुमार अमात; उपाध्यक्ष – गांगी किंडो


 

Leave Your Comment

 

 

Top