WRITER- सात्विक उपाध्याय
नई दिल्ली: शुक्रवार, 28 जून को झारखंड उच्च न्यायालय ने कथित भूमि घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख, हेमंत सोरेन को जमानत दे दी है। बता दें कि सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जनवरी में कथित भूमि घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित आरोप में गिरफ्तार किया था। सोरेन के केस की जांच करोड़ों रुपये की जमीन के बड़े पार्सल हासिल करने के लिए फर्जी विक्रेताओं और खरीदारों से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड की जालसाजी के माध्यम से कथित तौर पर पर्याप्त आय अर्जित करने से संबंधित है।
बता दें कि संबंधित घटनाओं में, 22 मार्च को एक विशेष पीएमएलए अदालत ने सोरेन की न्यायिक हिरासत 4 अप्रैल तक बढ़ा दी थी। जिसके बाद सोरेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सोरेन द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद रांची पुलिस ने ईडी अधिकारियों को जांच में शामिल होने के लिए एक नोटिस भी जारी किया था।
सोरेन का ईडी पर आरोप-
एजेंसी द्वारा सोरेन की एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने के बाद झारखंड उच्च न्यायालय ने पहले ईडी अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया था। सोरेन ने आरोप लगाया था कि उनके आवासों पर ईडी की तलाशी का उद्देश्य उनकी छवि खराब करना और आदिवासी होने के कारण उन्हें परेशान करना था।
बता दें कि ईडी ने 36 लाख रुपये नकद और जांच से संबंधित दस्तावेज बरामद करने का दावा किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सोरेन ने धोखाधड़ी के माध्यम से 8.5 एकड़ जमीन हासिल की थी। जांच से पता चला कि राजस्व उप-निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद सहित एक सिंडिकेट भ्रष्ट संपत्ति अधिग्रहण में शामिल था।
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में भाग लेने की सोरेन की याचिका 29 फरवरी को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थी। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत धन शोधन मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
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