भारत के जीवन का युगान्तकारी क्षण जिसके हम सभी साक्षी है। धन्य है 22 जनवरी का दिन जो वर्षों की प्रतीक्षा का अमृत फल लेकर आया है। 22 जनवरी के दिन सूर्यवंश के सूर्य प्रभु श्री राम जी का अपने ही गर्भगृह में प्रवेश हुआ। प्रभु श्री राम अपने ही धाम में विराजित हुए।
22 जनवरी अयोध्या नगरी एक बार फिर अपने प्रभु श्री राम का गृह प्रवेश कर आल्हादित और हर्षित हो गई है। 22 जनवरी फिर से प्रभु श्री राम का 500 वर्षों का वनवास, टाटवास समाप्त हुआ। दिव्य, भव्य और नव्य श्री राम मन्दिर की स्थापना के साथ ही श्री राम राज्य का आगमन भी निश्चित रूप से होगा। प्रभु श्री राम के प्रागंण में क्या आम, क्या खास, क्या बड़ा, क्या छोटा सब का समावेश, सब का सहभाग, सब की आस्था और सभी का भाव साक्षात् राम राज्य के दर्शन करा रहा है।
500 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई, हमारे पूर्वजों का बलिदान, त्याग और समर्पण का अमृत फल आज हम सभी को प्राप्त हुआ। धन्य है वर्तमान पीढ़ी जो इस दिव्य, भव्य और युगान्तकारी क्षण की साक्षी है। यह क्षण हम सब भारतीयों के जीवन में एक संस्कारी सरकार और तपोनिष्ठ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की तपस्या व कर्मठता से सम्भव हो सका।
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा कि ‘‘अब हमारे रामलला टेंट में नहीं रहेंगे। सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे रामलला आ गए। 22 जनवरी 2024 का ये सूरज एक अद्भुत आभा लेकर आया है। आज मैं पूरे पवित्र मन से महसूस कर रहा हूं कि कालचक्र बदल रहा है। यह सुखद संयोग है कि हमारी पीढ़ी को एक कालजयी पथ के शिल्पकार के रूप में चुना गया है, हजारों वर्ष बाद की पीढ़ी राष्ट्र निर्माण के इन कार्यों को याद करेगी इसलिए मैं कहता हूं, यही समय है, सही समय है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि 22 जनवरी, वर्ष 2024 का दिन युगों-युगों तक याद किया जायेगा। 22 जनवरी का दिन भारत के भविष्य का नूतन सूर्योदय लेकर आया है। सत्य, अहिंसा, शान्ति, सद्भाव, समरसता, समता और एकता की किरणों से पूरे भारत को आल्हादित कर रहा है। भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों के साथ भारत की आस्था, भारतीयों का भाव अपने प्रभु श्री राम को अपने धाम लेकर आ गया।
परमार्थ निकेतन में अद्भुत वातावरण है, प्रातःकाल से ही रामनाम की धुन पूरे आश्रम में गूंज रही है। ढ़ोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और मंगलगान के साथ रैली निकाली गयी तथा पूरे आश्रम को दिव्य व भव्य रूप से सुसज्जित किया गया। सांयकाल पूरे परमार्थ निकेतन आश्रम और गंगा जी के तट पर दीप प्रज्वलित कर प्रभु श्री राम का अभिनन्दन किया गया।
अयोध्या धाम में पारिजात के पौधे के रोपण के साथ प्राण प्रतिष्ठा का पूजन कर्म का शुभारम्भ किया। जय श्री राम। जय जय श्री राम।
रामभक्तों का महाकुम्भ

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अयोध्या धाम से विदा लेते हुये कहा कि अयोध्या धाम में व्यतीत किये पल सनातन, शाश्वत और शान्तिदायक थे। अयोध्या में श्री रामभक्तों का महाकुम्भ लगा हुआ था। पूरा राष्ट्र श्री राम की लहर के साथ प्रवाहमान हो रहा है। 1947 में भारत की आजादी के उत्सव के बाद 22 जनवरी प्राण-प्रतिष्ठा का यह उत्सव ऐतिहासिक, स्वर्णिम, यादगार और अलौकिक था जिसे युगों-युगों तक याद किया जायेगा।
अयोध्या धाम में लगे श्री रामभक्तों के महाकुम्भ में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से पूज्य संतों, महंतों और विशिष्ट विभूतियों ने भेंट की। स्वामी जी ने कहा कि 22 जनवरी का यह ऐतिहासिक दिन नये युग की शुरूआत की सुदृढ़ आधारशिला है। 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस, 26 जनवरी गणतंत्र दिवस तो हम सब मनाते हैं, इन विशिष्ट दिनों की छाप हमारे दिल में हैं, साथ ही 22 जनवरी का दिन सनातन को गौरवान्वित करने का दिन है, जिसने हर सनातनी के दिल में एक अमिट छाप छोड़ी है। ऐसा लगता है मानों प्रभु श्री राम ने स्वयं सनातनियों के दिलों पर अपने स्वर्णिम हस्ताक्षर किये हो। आने वाली पीढ़ियों को यह दिन मयार्दा पुरूषोत्तम श्री राम का इतिहास सुनायेगा, सनातन संस्कृति के इतिहास से अवगत करायेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भगवान श्री राम, भारत की आत्मा है, भारत की चेतना है, भारत के प्राण है। भगवान श्री राम एक क्रान्ति भी है और जीवन की शान्ति भी है। प्रभु श्री राम हमारी प्राण शक्ति भी है और जीवन को शक्ति प्रदान करने वाली भक्ति भी है। प्रभु श्री राम धर्म है और धर्म ही श्री राम है। भगवान श्री राम स्वयं ही धर्म का साक्षात प्रमाण है और वे ही परिणाम है।
स्वामी जी ने कहा कि इस दिव्य आयोजन में आये महानुभावों से बात हुई सभी का एक ही अनुभव था, यह अद्भुत, अतुल्य, अनुपम, अलौकिक, अवर्णनीय पल थे जिसका श्रेय भारत के ऊजार्वान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को जाता है, उनके कारण ही यह सम्भव हो सका और हमें सदियों की प्रतीक्षा का सुखद परिणाम प्राप्त हुआ। मोदी जी न होते तो न जाने और कितने दशक इस सुखद पल को देखने हेतु प्रतीक्षा करनी पड़ती। मोदी जी की लगन, त्याग, समर्पण और प्रभु श्री राम के प्रति उनकी आस्था अद्भुत है। सच तो यह है कि जहां आस्था है वहां रास्ता है। मोदी जी है तो सब मुमकिन है। अब समय आ गया है कि अपने-अपने घरों में, अपने जीवन में और अपनी चेतना में प्रभु श्री राम को धारण करें। प्रभु श्री राम के चरण, उनकी शरण और उनके आचरण हम सभी के जीवन का आधार बनें।
अयोध्या धाम से चलते-चलते स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से फिल्म निदेशक सुभाष घई ने भेंट कर परमार्थ निकेतन आश्रम व गंगा जी के तट की स्मृतियों को याद करते हुये कहा कि परदेश फिल्म की शूटिंग के दौरान गंगा जी की आरती के दृश्यों को शूट किया था जो वास्तव में अद्भुत, अलौकिक, अवर्णनीय और अपार शान्ति देने वाले पल थे। हमारी परदेश फिल्म की पूरी टीम गंगा जी की आरती में सहभाग करना चाहती है ताकि उन सुहाने व स्वर्णिम पलों का आनन्द ले सके। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन मेरे अपने प्रांगण जैसा मेरे अपने परिवार जैसा है उन दिव्य स्मृतियों को ताजा करने के लिये जरूर परमार्थ निकेतन आयेंगे।
इस अवसर पर विख्यात अभिनेता श्री अनुपम खेर ने भी स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट की। उन्होंने कहा कि मैं शीघ्र ही माँ गंगा और हनुमान जी के दर्शन करने के लिये परमार्थ निकेतन आऊँगा। परमार्थ निकेतन की स्मृतियाँ मेरे जीवन की स्वर्णिम स्मृतियों के सुनहरे पलों में से एक है।
इस अवसर पर संस्कृति व संस्कारों के लिये अद्भुत कार्य करने वाले श्री राधेश्याम गोयनका जी भी उपस्थित थे। उन्होंने आचार्य श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी और स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को आमंत्रित किया। अद्भुत स्मृतियों के साथ सभी अयोध्या धाम से विदा ले रहे हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
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