अयोध्या जी में लगभग 70 एकड़ मे बन रहे श्री राम मंदिर का 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम रखा गया है, लगभग 500 वर्षों की कठिन तपस्या के उपरांत श्रीराम को उनकी ही अयोध्या में एक स्थायी स्थान मिला है।
भारत का दुर्भाग्य था जहाँ मुग़ल आक्रांताओं ने राम मंदिर के ऊपर विवादित बाबरी मस्जिद ढ़ांचे का निर्माण कर राम भक्तों पर कुठाराघात किया था, सन 1991 में कारसेवकों द्वारा उस कलंकित विवादित मस्जिद रूपी ढ़ांचे का नामो निशान मिटा कर अपने रामलला को मुक्त किया, उसी बीच कई रामभक्तों के उपर गोलियाँ चलाई गई।
22 जनवरी 2024 का दिन भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज़ किया जाने वाला है।
क्या-क्या खास रहने वाला है 22 जनवरी को
विश्व हिंदू परिषद का योगदान
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख घटक विश्व हिंदू परिषद की ओर से सम्पूर्ण भारत वर्ष मे 22 जनवरी के उपलक्ष पर महीनों दिन पहले से ही कई योजनाएं बनने लगी है, गली से मोहल्ले, नगर से ज़िलें और विभाग से प्रांत स्तर के कार्यक्रम को नियोजित किया जाने लगा है। हर क्षेत्र के मंदिर और मठो को 22 जनवरी के दिन राममय करने की तैयारियां शुरू हो चुकी है, जिसमे हर सामुदाई एवं वर्ग के व्यक्तियों को निमंत्रण देकर कार्यक्रम में राम निमित्त जोड़ने का अनूठा प्रयास है।
विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय श्री अशोक सिंघल जी एवं अनेकाअनेक संतों, सनातनी युवाओं का सम्पूर्ण जीवन राम मंदिर निर्माण को स्थापित करने हेतू समर्पित हो गया, तब जाकर आज राम लला का मंदिर का निर्माण आज अयोध्या मे संभव हो सका है।

"सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वही बनाएंगे" हुआ सफल
जब आततायों द्वारा राम जन्मभूमि पर नाज़ायज कब्ज़ा कर बाबरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया और पूर्व की सभी सरकारें इस मुद्दे से पल्ला झाड़ती रही, राष्ट्रभक्तों ने यह षड्यंत्र को समझा और उसी दिन शपथ ली की राम का मंदिर नर्मित कर ही उन हुतात्मों को शांति प्राप्त हो सकेगी जिन्होंने इसके निमित्त अपना सर्वस्व त्याग किया एवं अपने प्राणों को राम के लिए न्योछावर कर दिया।
आज जब राम मंदिर बनना प्रारम्भ हो चुका है फिर भी आज एक ऐसा वर्ग विशेष है जो बहुसंख्यक समाज का इसमें खुकर विरोध कर रहा है। जब राम मंदिर के लिए ज़मीन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गयी तो वही पर मस्जिद बनने हेतु भी करीब पाँच एकड़ ज़मीन तथा कथित अल्पसंख्यक समाज को भी दी गयी। यह न्यायसंगत तो नहीं था चूंिक अयोध्या की राम जन्मभूमि सम्पूर्ण रूप से आराध्य राम की ही थी, फिर भी पाँच एकड़ ज़मीन दे देना कही से भी उचित नही था फिर भी सनातनी समाज ने इसका स्वागत किया। यह प्रशन उठता है कि यदि वक्फ बोर्ड के साथ ऐसा कदाचित होता तो क्या वक्फ बोर्ड सनातनी समाज को रियायत मे उस पाँच एकड़ का कुछ कन्मा भी देती! क्या आज जो मस्जिद पाँच एकड़ मे यह कहकर बनाया जा रहा है कि एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद होगी उसमे जिहाद, उन्माद, और इस्लामीकरण भी उस स्तर का नहीं होगा, प्रभु की नगरी मे एक और पाकिस्तान बसने जा रहा है! प्रश्न बहूल हैं।

सीतराम एवं राम दरबार की 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम में राम जन्मभूमि न्यास की और से सभी क्षेत्र के लोगों को आमंत्रित किया गया, परन्तु उस निमंत्रण को भाजपा को छोड़ सभी राजनैतिक दलों के प्रमुख नेताओं ने या ( इंडी गठबंधन ) ने यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि वो सेक्युलर हैं, परन्तु बात यह है कि अगर इंडी गठबंधन का कोई भी नेता राम लला के प्राण प्रतिष्ठा में जाता है तो उनका तथा कथित अल्पसंख्यक वोट बैंक नाराज़ हो जाएगा, परन्तु यही सब नेता आने वाले समय मे पाँच एकड़ मे बनने जा रही मस्जिद में धूनी चादर चढ़ाने जाते हुए आप सभी को दिख जाएंगे। चूकी जिनके लोग सनातन धर्म को मलेरिया कहें, कुछ लोग सनातन धर्म को छलावा कहें, उनके बाबा घाँधी चुनावी मेंढक की भाती यज्ञोपवित धारण कर अपने आपको सनातनी बतावें, फिर चुनाव उपरांत यज्ञोपवित को ताक पर रख दें, यह सब कार्यकर्म नवीन नही पूर्व मे भी इसी प्रकार का छलावा कर 70 वर्ष इन्होने भारत को रूपांतरित अंग्रेज के तौर पर लूटा खसोटा है।
इतने सब के उपरांत भी भारत को एवं भारतीय समाज को साथ रखकर ले चलने वाली विचारधारा की वैश्विक स्तर पर जीत हुई है, ,और राम की सौगंध को उस वैचारिक मत के मस्तानों ने धरातल पर उतार कर काई दिवंगत आत्माओं को परम श्रद्धंाजलि अर्पित कर वर्तमान की एवं आने वाली पीढ़ी को अपने सत्य सनातन की ओजस्वी तेज को सौपने का सफल प्रयास कर दिया है।
निशांत मिश्रा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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