रा जस्थान में भाजपा की सरकार बनना तो लगभग तय थी बस इंतजार था चुनावी नतीजों का। चुनावी नतीजे आये तो बहुमत का आकड़ा आसमान पर दिखा। यानी की भाजपा की सरकार राजस्थान में एकतरफा बनती दिखी और जो एग्जिट पोल्स का आंकड़ा था और जो ये आंकड़ा निकाल रहे थे की अबकी बार प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं बनेगी बल्कि रिवाज बदलेगा भजनलाल रिवाज बदलने का मतलब है, सरकार का रिपीट होना। जब राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों के चुनावी नतीजे आय तो इसमें भाजपा ने 115 सीटें जीतीं। कांग्रेस 69 सीटों पर सिमट गई। आठ निर्दलीय जीत चुके हैं, तीन सीटों पर भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार जीते हैं। दो सीटें बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के खाते में गई थी। तो जो एग्जिट पोल का आंकड़ा निकालने बैठे थे उनके सर नीचे और पैर ऊपर हो गए, वो तो भईया कुछ दिन तक दिखे ही नहीं क्योकि आंकड़े ही ऐसे आये।
अब पूर्ण बहुमत तो प्रदेश में बीजेपी को मिल गया। बात आयी विधायक दल का नेता चुनने की वो किसे चुने। सभी और कयास लगाने लगे लगभग सभी विधायकों के नाम मुख्यमंत्री की रेस में दौड़ रहे थे। सिवाय एक नाम को छोड़ कर वो था भजन लाल शर्मा जो, 16वीं राजस्थान विधान सभा के सदस्य और सांगानेर से विधायक भजनाल शर्मा था। ध्यान देने वाली बात है कि भाजपा ने भजनलाल शर्मा को टिकट देने के लिए सांगानेर से विधायक अशोक लाहोटी का टिकट काटा था। भजनलाल केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे पर खरे उतरे और कांग्रेस के उम्मीदवार पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48 हजार वोटों के लंबे अंतर से हराया। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। चुनाव परिणाम आने के बाद से 17 विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मुलाकात की थी। भजनलाल शर्मा का नाम जब विधायक दल की बैठक में लिया गया तो सबक चौंक गए। किसी को समझ नहीं आया िक ऐसा आखिर हुआ क्या? रेस के सब अनुभवी घोड़े बाहर हो गए और एक साधारण से कार्यकर्ता का नाम जब सामने आया जो एक स्वयसेवक था और भाजपा की कुशलतम नीतियों और मोदी जी की गारंटियों को बल देने के लिए भजनलाल शर्मा को राजस्थान की कमान सौंपी गयी।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
भजनलाल शर्मा का जन्म 1967 में राजस्थान के जयपुर जिले के एक छोटे से गांव में सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम किशन स्वरूप शर्मा है। प्रारम्भिक शिक्षा उन्होंने अपने गांव अटारी में की। फिर गांव के पास गगवाना की राजकीय माध्यमिक स्कूल में 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई की। 11वीं और 12वीं कक्षा तक की पढाई राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नदबई (भरतपुर) में की। भजनलाल शर्मा का जन्म और उनका बचपन आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में बीता, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा को कभी बाधित नहीं होने दिया। उच्च शिक्षा के लिए वे जयपुर आए उन्होंने स्नातक की डिग्री पूरी की इसके बाद राजस्थान विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए (मास्टर डिग्री) की पढ़ाई (प्राइवेट) की।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत
भजनलाल की राजनीति करियर की शुरुआत छात्र जीवन से हो गई थी भरतपुर के नदबई में जब वह माध्यमिक स्कूल में गए तो वहां उन्होंने एबीवीपी की सदस्यता ली उन्होंने लंबे समय तक छात्र राजनीति में कड़ा परिश्रम और मेहनत की 1991 में राजस्थान के भारतीय युवा मोर्चा के प्रभार दिया राष्ट्र संघ सरकार पहली बार संभालने जा रहे हैं भजनलाल शर्मा ने पहली राजनितिक 'जीवन की शुरुआत तो असल में अपने गांव से की थी आपको बता दे की वह अपने गांव के दो बार सरपंच भी रहे हैं भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बने लेकिन यह उनका दूसरा विधानसभा चुनाव था इससे पहले 2003 में भरतपुर के ना नदबई सीट पर चुनाव लड़े थे तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था उस समय भजनलाल शर्मा सामाजिक न्याय मंच पार्टी से उम्मीदवार थे।
सरपंच से सीएम बनने का सफ़र
भजनलाल शर्मा तीन दशक से अधिक समय से संगठन के लिए आम कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। एक गांव के मुखिया से एक राज्य के मुख्या का सफर बड़ा रोचक है प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी ने एक आम कार्यकर्ता पर भरोसा जताया और उसको मुख्यमंत्री बनाया यह बहुत मह्त्वपूर्ण और बड़ा निर्णय था। संगठन ने यह भी यह साबित कर दिया की आप मेहनत करते रहिये फल की चिंता मत करिए यानी की मुख्यमंत्री बनने के लिए राजनीतिक जीवन में लंबे अनुभव की नहीं बल्कि कड़े परिश्रम, विश्वास और भरोसे की जरूरत है।

पूजा पाठ और हिंदुत्व की संस्कृति को ध्यान में रखकर ली शपथ
भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे पहले बड़े विधि विधान से पूजा करवाई अपने माता-पिता के पैर धोये उन्होंने वो सब किया जो सनातन संस्कृति में करते है और जो हमारी विरासत है भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ के दौरान किया गया पूजा पाठ और हिंदुत्व की संस्कृति को जिस तरह साथ लेकर चल रहे और आज मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी सादगी बरकरार है। उन्हें कोई बड़े पद का गुमान नहीं यह सादगी भरतपुर जाते समय भी दिखी जब भजनलाल शर्मा ने नेशनल हाईवे 21 पर एक दूकान में रुक कर चाय की चुस्की ली। इस दौरान सीएम भजनलाल शर्मा खुद चाय बनाते नजर आए अचानक सीएम को अपनी दुकान में देखकर मुंशी चाय वाले आश्चर्यचकित रह गए सादगी के साथ फीकी चाय पीकर स्थानीय विधायक के बारे में जानकारी ली। चाय वाले के पैर छुने पर सीएम ने हाथ जोड़कर सादगी दिखाई एक बात तो साफ़ है डबल इंजन की सरकार से आने वाले कुछ महीनो में राजस्थान में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और पूरे प्रदेश में विकास की गंगा बहेगी ।
अंकुश मांझू
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