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राहुल-केतु ग्रसित कांग्रेस : नरेन्द्र मोदी मिट्टी से बनाते सोना, राहुल आलू से सोना बनायेंगे

 Rahul-Ketu affected Congress

कांग्रेस पार्टी की उत्तरी भारत के तीन प्रदेशों के विधानसभा चुनाव में भारी पराजय के कारणों पर विचार करें तो उसका कारण यकायक पैदा नहीं हुआ। इस हार की बुनियाद है, कांग्रेस के नेतृत्व का लगातार फूहड़पन और बचकाना अन्दाज। जनता कंाग्रेस के नेतृत्व पर विश्वास नहीं कर पा रही। पिछले लोक सभा के लगातार दो चुनावों में कांग्रेस बहुत बुरी तरह हारी थी। यहां तक कि कंाग्रेस के कर्ता-धर्ता राहुल गांधी को अपने पुश्तैनी क्षेत्र अमेठी में हार का सामना करना पड़ा था। पर राहुल है कि कुछ भी सीखने को तैयार नहीं। जब कई बार नरेन्द्र मोदी को गालियां देकर उन पर तरह-तरह के आरोप लगा कर मुंह की खा गये तो उन्हें अपना तरीका बदलना चाहिये था। राहुल द्वारा लगाये गये आरोप स्वनिर्मित और निराधार होने के कारण उनकी साख लगातार गिरती गयी। अपनी करतूतों से भारत यात्रा पर पानी फेर लिया।

एेसा लगता है राहुल कांग्रेस पर राहु साबित हो रहे हैं तो उनके मुख्य सलाहकार कद्दावर कांग्रेस के नेता मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह केतु साबित हो रहे। ये दोनों सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर तरह-तरह के बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, नरेन्द्र मोदी को गालियां देते रहते हैं। इससे कांग्रेस पार्टी की छवि लोगों में लगातार गिरती जा रही है। जो लोग कांग्रेस को पसंद करते हैं अब उन्होंने भी वोट देना छोड़ दिया। इसके अलावा जो नौ ग्रह लगे हैं वे हैं   अखिलेश यादव, लालू यादव, अरविन्द केजरीवाल, ममता बनर्जी, शरद पवार, शेख अब्दुल्ला, नितिश कुमार, उद्धव ठाकरे और एम के स्टालिन। ये नौ ग्रह कांग्रेस को पूरी तरह चौपट करने में लगे हैं। ये अपनी पार्टियाें को अपने क्षेत्र में मजबूत करने के लिये कांग्रेस को केन्द्र में लाने का छलावा करते हैं और अन्दर से चाहते हैं कि किसी तरह कांग्रेस मिट जाये। इन नौ ग्रहों की गति के कारण कांग्रेस बराबर गलती कर रही है। कांग्रेस पार्टी को गलत निर्णय लेने से इन नौ पार्टियों को ताकत मिल जाती है और कांग्रेस खुद उन राज्यों से मिटती चली जाती है।

सबसे पहले राहु की बात करें तो मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की कमांड उन्हीं हाथों में है। वे उसे राहु ग्रह की तरह चिपक कर बर्बाद कर रहे हैं। पार्टी को कोई दिशा न देकर केवल प्रधानमंत्री मोदी को गालियां देना या उद्योगपति अदाणी को बेईमान भ्रष्ट कहना ही उनकी नियति बन गयी है। क्या लगातार गालियां देने से कोई चुनाव जीत  सकता है। राहुल ने जिस भी विषय पर बात की या किसी मुद्दे पर मोदी को फंसाने की कोशिश की, वो मुद्दा उल्टा कांग्रेस पर भारी पड़ा है।  जी एस टी, नोटबन्दी, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट, डोकलाम, राफेल डील, कोरोना और अडानी आदि पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की पर 10 साल तक पहाड़ खोदते रहे और एक चुहिया भी नहीं निकाल सके। उनके सभी चार्ज झूठे साबित हुये। लोग उन्हें झूठ का पुलिन्दा समझने लगे, अपरिपक्व समझने लगे। कांग्रेस कभी भा.ज.पा. के विकल्प के रूप में उभरती भी है तो लोगों को राहुल गांधी पर विश्वास नहीं होता। प्रधानमंत्री बनने की बात आते ही लोग राहुल गांधी को रिजेक्ट कर देते है। इससे भा.ज.पा. को पप्पू नाम से उनको प्रचारित करने का मौका मिलता है जबकि जनता उन्हें खुद ही पप्पू समझती है। लगता है कांग्रेस पार्टी को राहुल गांधी राहु बन कर आये हैं और पार्टी को पूरी तरह निबटा कर ही दम लेंगे। कभी कभार जब कांग्रेस पर राहुल का असर कमजोर पड़ता है तो केतु तुरन्त इसकी कमी को पूरा कर देते हैं। देखिये केतु की तरह किस तरह दिग्विजय सिंह ने पार्टी का बंटाधार किया है। आरोप है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष ने सोनिया गांधी को भी नेशनल हेराल्ड केस में फंसवा दिया या ये कहें कि नेशनल हेराल्ड कांग्रेस की प्रोपर्टी थी उसे इन लोगों ने षडयन्त्र रच कर अपने कब्जे में कर लिया। ये आरोप लगे और सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली, जमानत लेनी पड़ी। बदनाम तो कांग्रेस पार्टी हो गयी। 

जब कांग्रेस में थोड़ी बहुत जान आती है तो नरेन्द्र मोदी को भला बुरा कह कर अपशब्दों से नवाज देते हैं उससे जनता में फिर छवि खराब हो जाती है।  मौत के सौदागर, चौकीदार चोर है, अडाणी के एजेन्ट से लेकर पनौती तक, न जाने क्या क्या कहते हैं। राफेल पर बयान देकर राहुल अड़े रहे, कोर्ट में भी अड़े रहे, बाद में खेद प्रकट किया उस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगायी। फिर राहुल के वकील मनु सिंघवी के कहने पर लिखित माफीनामा मांगने पर कोर्ट ने उन्हें बख्सा।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 10 वर्ष सत्ता में रह कर एैसा पार्टी को बर्बाद करके आये कि 20 वर्ष तक कांग्रेस पार्टी को केतु की तरह ग्रसित करता रहता है। सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने से लेकर, कांग्रेस के सत्ता में आने पर कश्मीर में 370 की वापसी पर पुनर्विचार करना, पीएफआई की वकालत करना, किसी भी देशप्रेमी को अच्छा नहीं लगेगा। भारत में राष्ट्रप्रेम की जड़े बहुत गहरी है इतिहास गवाह है, 500 साल गुलामी के भारत ने झेले पर हुक्मरानों को कभी चैन से नहीं जीना दिया। राष्ट्रप्रेम की ज्वाला सदा जलती रही। दिग्गी राजा ने यहां तक बोला था कि कांग्रेस में दो सत्ता के केन्द्र हैं यानि मनमोहन सिंह तत्कालीन प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी, तत्कालीन कंाग्रेस अध्यक्ष। यूपीए की अध्यक्ष अपनी ही पार्टी के खिलाफ इसके बाद भी बोलते रहे। देहली के बाटला हाउस कांड में उन्होंने मनमोहन सिंह को घेरा था, उनकी सरकार की कमजोरी बतायी थी। यानि अपनी ही पार्टी को घेरा और पार्टी को बदनाम किया। बाटला कांड को फर्जी भी बताया था। उन्होंने हिन्दुओं को गौमांस भक्षक बोला, उनका आशय कुछ भी रहा हो पर जन मानस पर सनातनी धर्म के लोगों पर इसका भारी असर हुआ। यहां तक कि कंाग्रेस पार्टी के नेता खुद बोलने लगे थे कि ये दिग्गी ने क्या कह डाला। सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी कह कर सम्मान से संबोधित करने पर भी कांग्रेस की किरकिरी हुयी थी। वे कब क्या बोलते हैं या फिर केतु उनसे यकायक बुलवा देता है। अब ये कहने की क्या जरूरत थी कि नरेन्द्र मोदी को वोट देने वाली 40 साल से ऊपर की महिलायें हैं, जींस पहनने वाली लड़कियां उन्हें वोट नहीं देती। एक महिला कांग्रेसी नेता को 100 टका टंच माल बोलना निश्चय ही असभ्य भाषा थी जिसका लोगों पर बुरा असर पड़ा और लोग उन्हें चीप नेता कहते सुने गये। एक बार गुस्से में कांग्रेसियों पर भड़क कर मध्य प्रदेश में खंडवा शहर में जोर से चिल्ला पड़े थे कि कांग्रेस भाड़ में जाये। उनका कथन सही हो रहा है और कांग्रेस भाड़ में जा रही है।

 दिग्गी राजा की एक बड़ी गलती ये थी कि जब अन्ना हजारे देश में सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभरे। उनका जादू पूरे देश के लोगो पर सर चढ़ कर बोल रहा था। लोग अन्ना के दीवाने थे। जहां जाते थे लोग उनकी झलक देखने को दौड़े जाते थे, एैसे में दिग्गी राजा ने उन्हें आर.एस.एस का एजेंट बोल कर पार्टी की बड़ी बदनामी करायी थी। वे आज भी राहुल से चिपक कर कांग्रेस की बर्बादी में अपूर्व योगदान दे रहे हैं। जब भी कांग्रेस का राहु थोड़ा बहुत सुधरता है तो फिर केतु उनकी दिशा और गति बदल देता है।

बाकी नौ ग्रह जिनकी पार्टियां कांग्रेस के साथ मिल कर इंडिया गठजोड़ में शामिल है वे कभी भी कांग्रेस को जिन्दा नहीं देख सकती है। वे अपने-अपने प्रदेशों, क्षेत्रों में जब ही जिन्दा रह सकती है, जब तक कांग्रेस हारती रहेगी। यही पार्टियां भाजपा का विकल्प बनना चाहती है। इसलिये ये ग्रह कांग्रेस को चिपटे हुये हैं। बंगाल की ममता बनर्जी हों या बिहार के नितिश कुमार और लालू यादव या उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव या महाराष्ट्र के शरद पवार दक्षिण से स्टालिन या दिल्ली में केजरीवाल और कश्मीर में फारूख अब्दुल्ला आदि कोई कांग्रेस को मजबूत नहीं होने देगा। कुल मिलाकर राहु केतु और नौ ग्रह कांग्रेस को लग गये । एेसे में नरेन्द्र मोदी को अकेले कांग्रेस की बर्बादी का श्रेय देना इन ग्रहों के साथ अन्याय करना होगा। मोदी मैजिक के साथ-साथ ये राहु केतु नौ ग्रह का मैजिक भी चल रहा है। इन ग्रहों की चाल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भा.ज.पा. की राह आसान कर दी है। भाजपा को जीतने और मोदी को प्रधानमंत्री बनने में शायद ही किसी को कोई शक हो।

 

 


डॉ. विजय खैरा

(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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