देश में पिछले कुछ सालों में राजनीतिक बयानबाजियों और टिप्पणियों ने काफी बड़े पैमाने पर रफ्तार पकड़ी है। इस खेल में देश के कई प्रमुख राजनेताओं के नाम शुमार हैं। इस बीच देश में अगर कहीं भी मजाकिया राजनीतिक टिप्पणियों की बात आती है तो सबसे पहले इस सूची में देश के नामी या यूं कहें तो राजकुमार राहुल गांधी का नाम आता है। राहुल एक ऐसे राजनेता हैं जो केवल “नेता’ हैं। जिन्हें नीति से कोई मतलब नहीं है.. उनका राजनेता शब्द के राज से भी दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। जिसका परिणाम यह है कि राहुल गांधी जब कभी भी किसी बड़े मंच को संबोधित करते हैं या फिर सदन में भाषण देते हैं तो उनकी जबान विरोधी टिप्पणियां देने के चक्कर में फिसल जाती है और वो अजीबो-गरीब बयान दे बैठते हैं। अब इसे राहुल की फिसलती जबान कहा जाए या उनकी आदत। दोनों का आशय एक समान प्रतीत होता है।
राहुल गांधी देश के 55 साल के युवा नेता हैं। कांग्रेस पार्टी के चहेते हैं। जब कभी भी कांग्रेस पार्टी को फ्रंट पर करने की बात आती है तो राहुल गांधी खुद ब खुद या गलती से आगे आ जाते हैं। राहुल देश के लगभग सभी मुद्दों के बारे में जानते हैं और उनपर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं। जो कभी-कभी उचित होता है तो कभी उनके बातों का कोई भी सिर पैर नहीं होता है। अब ऐसे में पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी की जुबान कई बार फिसली है। पिछले महीने पांच राज्यों के चुनाव से ठीक पहले यानी कि 9 अक्टूबर को एक प्रेस कांफ्रेंस में अपनी बात रखते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जुबान एक बार फिर से फिसल गई। इस पर भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव से पहले ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार मान ली है। राहुल गांधी कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद संवाददातओं से बात कर रहे थे। इसी दौरान पांच राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनावों की तारीखों के एलान पर वह अपनी प्रतिक्रिया दे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि, मध्य प्रदेश में सरकार जा रही है, राजस्थान में सरकार जा रही है, छत्तीसगढ़ में भी सरकार जा रही है। िजसके तुरंत बाद अपनी गलती का अहसास हुआ और फिर उन्होंने कहा, 'मैं उल्टा बोल गया... जिसका ठीकरा राहुल गांधी ने पत्रकारों के ऊपर फोड़ दिया। साथ ही कहा कि मैं आपलोग के कारण भ्रमित हो गया था।
2019 में कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में मोदी सरनेम पर कठोर टिप्पणी करने को लेकर राहुल गांधी को दोषी करार साबित किया गया था। और उन्हें 2 साल की जेल की सजा भी सुनाई गई थी। राहुल की इस टिप्पणी पर दोषी साबित होने के बाद उनकी संसद की सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी।
अभी तक राहुल गांधी के जुबान फिसलने की तारीख ठीक से बीती भी नहीं थी कि एक बार फिर से जुबान फिसलने की एक और खबर सामने आ गई। और यह टिप्पणी 2019 में चुनाव प्रचार के दौरान मोदी सरनेम मामले की तरह ही है। इस बार भी राहुल गांधी ने राजस्थान में एक चुनाव प्रचार के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने अहमदाबाद में विश्व कप क्रिकेट के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया से भारत की हार के बाद पीएम पर विवादित टिप्पणी की थी। राहुल ने राजस्थान में एक चुनावी भाषण में मोदी के खिलाफ 'पनौती' शब्द का इस्तेमाल किया था। हालांकि, कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी का नाम नहीं लिया था। राहुल ने ‘जेबकतरे' और कर्ज माफी संबंधी टिप्पणी भी की थी। लेकिन राहुल गांधी का मुख्य शिकार पीएम मोदी ही थे। जिसके बाद मोदी सरनेम मामले की तरह ही राहुल गांधी आरोपों के घेरे में आ गए हैं। जिसके बाद पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता मुश्किल में घिर गए हैं। राहुल गांधी के बयान को लेकर चुनाव आयोग ने एक्शन लिया है। आयोग की तरफ से राहुल गांधी को नोटिस जारी किया गया है। कांग्रेस नेता से जवाब भी मांगा गया है। राहुल को जवाब देने के लिए 25 नवंबर तक का समय दिया गया है।
टिप्पणी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी नेताओं ने कार्रवाई की मांग की थी। बीजेपी महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल, ओम पाठक सहित पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग को ज्ञापन भी सौंपा था। ज्ञापन में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के खिलाफ धोखाधड़ी, आधारहीन और अपमानजनक आचरण के लिए उचित कानूनी कार्रवाई करके तत्काल हस्तक्षेप किए जाने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया है कि कांग्रेस नेताओं के बयान चुनावी माहौल को खराब कर देंगे। इससे सम्मानित व्यक्तियों को बदनाम करने के लिए अपशब्दों, आपत्तिजनक भाषा का उपयोग और झूठी खबरों को रोकना मुश्किल हो जाएगा।
राहुल के बयान पर बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया भी दी। बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ शर्मनाक टिप्पणी कर राहुल गांधी ने अपना असली रूप दिखा दिया है। रविशंकर ने यह भी याद दिलाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के दौरान जब सोनिया गांधी ने उन्हें मौत का सौदागार कहा था, तब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की क्या हालात हुई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर राहुल गांधी का बयान घोर निंदनीय है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी ही होगी। उन्होंने साफ कर दिया कि माफी नहीं मांगने की स्थिति में भाजपा इसे गंभीर मुद्दा बना सकती है। अब ऐसे में राहुल को कोई भी टिप्पणी करना भारी पड़ सकता है। पर राहुल गांधी के केस में इस बात का मायने ना के बराबर है। पहले राहुल कहेंगे ठीक है..पर फिर बाद में फिर से राहुल की जबान फिसल जाएगी।
सात्विक उपाध्याय
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