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भोग और मोक्ष प्रदाता 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ'

Provider of enjoyment and salvation 'Shri Ram Janmabhoomi Teerth'

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का एक वर्ष पूर्ण हो चुका है। यही वो ऐतिहासिक कालखंड है जब साल भर पहले प्रधानमंत्री मोदी और देश के गणमान्य लोगों की उपस्थिति में देश ने अयोध्या में भगवा राजनीति के क्षितिज से सनातन शौर्य के सूर्य का उदय देखा। जिसका मूर्त आकार भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में  प्रकट हुआ। जिसका दृश्यावलोकन हम सबने किया। शायद समय के इस हिस्से में परलोक से हमारे पुरखे की आत्मा इस दृश्य को देखकर तृप्त हो रही होगी। हम लोग जिस पीढ़ी में उत्पन्न हुए हैं, वह जन्म सफल हो गया है। जिसने अपनी आंखों के सामने श्रीराम मंदिर की नींव पड़ने से लेकर भव्य मंदिर निर्माण तक का कार्य पूर्ण होते हुए देखा। हालांकि अभी भी थोड़ा सा कार्य बाकी है। जिसके जून 2025 तक पूर्ण हो जाने की संभावना है।
 

अयोध्या की जीडीपी में 2 प्रतिशत की वृद्धि

श्रीराम मंदिर के निर्माण से न सिर्फ अयोध्या की आबोहवा में बदलाव दिखाी दे रहा है। बल्कि आर्थिक तंत्र पर भी इसका गहरा असर दिखाई दे रहा है। आस्था ही नहीं अर्थव्यवस्था का भी केन्द्र  के रुप में भी अयोध्या उभर रहा है।  जहां पहले अयोध्या में समय-समय पर मेले लगते थे। जिससे दुकानदारों की रोजी रोटी का इंतजाम होता था। लेकिन यह व्यवस्था चंद समय के लिए होती थी। लेकिन अब अर्थतंत्र बदल चुका है। सिर्फ मेलों पर निर्भर रहने वाली अयोध्या की अर्थव्यवस्था को पंख लग गए हैं। राम मंदिर सिर्फ आस्था ही नहीं, अयोध्या की अर्थव्यवस्था का भी केन्द्र बन चुका है। यह राम मंदिर का ही प्रताप है कि होटल, होम स्टे चलाने वाले कारोबारियों की चांदी हो गई है। वहीं छोटे-मोटे व्यापार-धंधे भी खूब फल-फूल रहे हैं। रामलला की फोटो, लॉकेट, पेन, पानी की बोतल, माथे पर चंदन लगाकर लोग रोजाना 500 से लेकर 1,000 रुपये तक कमा रहे हैं। पूजा सामग्री, फूल-माला, मिठाई-प्रसाद विक्रेताओं की आय चार गुना बढ़ चुकी है। अयोध्या में दर्शन करने आने वालों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी हैं। जिनसे व्हील चेयर चलाने वाले लोग भी प्रतिदिन 1200 से 1500 तक की कमाई कर रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर 1,000 लोगों को रोजगार दिया गया है। इनको वेतन के साथ पीएफ व ग्रेच्युटी की भी सुविधा प्राप्त है।  इससे अयोध्या की जीडीपी में 2% की वृद्धि हुई है और यह पूरे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।  स्टेट जीएसटी की रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या ने कारोबार के मामले में कानपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहर को भी पीछे छोड़ दिया।
 

भक्तों की भीड़ से बढ़ी अयोध्या की रौनक

जनवरी 2024 में श्रीराम मंदिर उद्घाटन के  बाद से अयोध्या में भक्तों को तांता लगा है। वीवीआईपी हों या सामान्य जन सभी सभी श्रीराम की एक झलक के लिए बेताब हैं। यही वजह है कि देश के तीन चौथाई से ज्यादा (80%) राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने यहां रामलला के दर्शन किए। बॉलीवुड और खेल जगत से जुड़ी बड़ी हस्तियों ने भी श्रीराम के सामने अपनी हाजिरी लगाई। आम भक्त को हर मौसम में भीड़ लगाए रहते ही हैं। यही कारण है कि बीते हुए साल 2024 में अयोध्या में धार्मिक पर्यटन ने नई ऊंचाइयां हासिल की।  उत्तर प्रदेश में पर्यटकों की सबसे पहली पसंद अब अयोध्या का नवनिर्मित श्रीराम मंदिर बन चुका है। पहले का वक्त था कि जब यूपी आने वाले पर्यटक सिर्फ ताजमहल की तरफ भागते थे। लेकिन अब श्रीराम के भक्तों की संख्या ने  ताजमहल को पीछे छोड़ दिया। राम मंदिर निर्माण के बाद प्रतिदिन देशभर से औसतन डेढ़ से दो लाख लोग अयोध्या आ रहे हैं। यह सभी भक्त एक से दो दिन अयोध्या में बिताते हैं, अपनी अपनी क्षमता के हिसाब से होटलों, होम स्टे या धर्मशालाओं  में रुकते हैं। मंदिरों के दर्शन करते हैं और जाते समय यादगार के तौर पर अपने साथ कुछ न कुछ ले जाते हैं, चाहे वह राम मंदिर का मॉडल हो या प्रसाद के रूप में मिठाई या श्रीराम ध्वज, जो उनके मनो-मस्तिष्क में जीवन भर अयोध्या और श्रीराम की यादें ताजा रखता है। 
 

श्रद्धालुओं की भीड़ को भुनाने में बड़े ब्रांड्स भी जुटे

रामनगरी में श्रद्धालुओं की बढ़ती हुई भीड़ ने मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ देश में कारोबार कर रहे  बड़े ब्रांड्स को भी आकर्षित किया है। यहां मान्यवर, पिज्जा हट, डोमिनोज, रिलायंस ट्रेंड्स, मार्केट 99, रिलायंस स्मार्ट,बर्गर किंग, जूडियो, क्रोमा, करी-लीफ, पैंटालून जैसे बड़े ब्रांड के आउटलेट खुलते जा रहे हैं। बल्कि कई आउटलेट तो राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद तो कुछ मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद खुले हैं। राममंदिर के गेट के ठीक सामने दक्षिण भारतीय खाने के लिए मशहूर रेस्टोरेंट चेन उडुपी ने भी अपने रेस्टोरेंट खोल दिए हैं। क्योंकि राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में हर आय वर्ग के लोग मौजूद हैं। जिसमें अंबानी और अडानी जैसे अल्ट्रा रिच भी शामिल हैं, तो गांव से नंगे पांव आने वाले श्रद्धालु भी हैं। अयोध्या में इन सभी के स्वागत के लिए व्यवस्था मौजूद है। अयोध्या में बाहरी और घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ने से आने वाले समय में और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
 

जमीनों की कीमत छूने लगी आसमान

अयोध्या में जैसे जैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है, वैसे वैसे होटल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री द्रुत गति से तरक्की कर रही है। क्योंकि यहां आने वाले पर्यटकों की निगाह सबसे पहले एक सुरक्षित सुविधाजनक ठिकाना तलाशने की होती है। जिसका असर सबसे ज्यादा असर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर दिख रहा है। यही कारण है कि छोटे से लेकर बड़े होटलों तक में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज अयोध्या में 500 रुपए की धर्मशाला से लेकर  7000 से 20,000 तक के लग्जरी कमरे भी उपलब्ध हैं। जो कि श्रद्धालुओं के लिए कम ही पड़ते हैं। मंदिर के आस-पास 150 से अधिक नए छोटे होटल और होमस्टे भी खुल गए हैं। जिससे स्थानीय स्तर पर नए-नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। राम मंदिर के कारण अयोध्या नगरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गई है। जिसकी वजह से यहां पर प्रॉपर्टी की कीमत भी 5 से 7 गुना और मंदिर के आस-पास की जगह की कीमत 10 गुना तक बढ़ गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को चमका दिया

उत्तर प्रदेश में सत्तासीन योगी आदित्यनाथ की सरकार ने केन्द्र सरकार के साथ मिलकर पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या में इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास किया है। सड़क, रेल, और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार ने इसे और आकर्षक बना दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या को ग्लोबल धार्मिक पर्यटन हब बनाने का लक्ष्य रखा है। 2024 में अयोध्या के चौमुखी विकास ने इसे वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर दिया है। पर्यटकों के बीच सरयू नदी में वाटर क्रूज सेवा बेहद लोकप्रिय हो रही है। लता चौक और रानी पार्क जैसे स्थान धार्मिकता के साथ-साथ पर्यटन के प्रमुख आकर्षण बनकर उभरते जा रहे हैं। श्रीरामलला के अपने भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद अयोध्या में मनाई गई पहली दीपावली भी ऐतिहासिक रही थी। दीपोत्सव के इस अवसर पर अयोध्या ने एक नहीं, बल्कि दो विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए। सरयू नदी के घाटों पर लाखों दीप जलाकर पूरे विश्व को राम नगरी की भव्यता का दर्शन कराया गया। इन सभी कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश के संन्यासी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। जिन्होंने निजी तौर पर रुचि लेकर अयोध्या में विकास कार्यों को पूरा कराया।


छोटे प्रयासों से मिली बड़ी सफलता

जब श्रीराम लंका विजय के लिए समुद्र पर सेतु बनाने निकले थे, तो विशालकाय वानर भालुओं के साथ छोटी गिलहरी भी उनके साथ लगी थी। जो समुद्र से रेत के कण ले जाकर रामसेतु की दरारों को भरती थी। ठीक उसी तरह अयोध्या में हम जिस भव्य राम मंदिर के दर्शन  कर रहे हैं, वह करोड़ों भारतीयों के छोटे-छोटे योगदान का नतीजा है।  श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या के महासचिव चंपत राय ने बताया कि अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए चार करोड़ लोगों ने 10-10 रुपये का योगदान दिया है। सभी के सहयोग से भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो सका है। 


संतों और भक्तों के नाम पर होंगे अयोध्या के द्वार 

उम्मीद है कि आप मोक्षदायिनी अयोध्या नगरी के आर्थिक पक्ष को भी अच्छी तरह समझ चुके होंगे। लेकिन इस आलेख के आखिरी हिस्से में मैं आपको कुछ ताजा समाचार भी प्रदान कर दूं कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने सुझाव दिया है कि राम मंदिर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले साधु-संतों के नाम पर राम मंदिर के सभी चारों प्रमुख प्रवेश द्वार का नाम रखा जाए। जिसके बाद मंदिर निर्माण समिति की बैठक में इस बारे में विचार किया गया। जहां सबने इस प्रस्ताव पर सहमति जता दी। हालांकि नाम क्या रखे जाएंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है। लेकिन यह चंपत राय का यह प्रस्ताव स्वीकार जरुर कर लिया गया है। 28 दिसंबर 2024 को मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने यह जानकारी सार्वजनिक की है। इसके साथ ही जन्मभूमि परिसर में चल रहे निर्माण कार्य की समीक्षा और निरीक्षण भी किया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों, कार्यदायी एजेंसियों के अधिकारियों व अभियंताओं के साथ बैठक में बारी-बारी से प्रत्येक मंदिर के निर्माण की प्रगति की जानकारी की गई और अवशेष कार्यों के संबंध में जानकारी लेकर अनुमानित समयावधि तय की गई। अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि मंदिर परिसर में बन रहे परकोटे में अब केवल तीन लाख क्यूबिक फीट पत्थर लगाया जाना है। कुल 8 लाख 40 हजार क्यूबिक फीट पत्थर लगने थे। इस तरह 60 प्रतिशत कार्य हो चुका है। कार्य को देखते हुए माना जा रहा कि जून 2025 तक परकोटा और इसमें बन रहे छह मंदिरों का कार्य पूर्ण हो जाएगा।






अंशुमान आनंद

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