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पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियां बटोरते विपक्ष के नामचीन

Prominent opposition figures making headlines in Pakistani media

जब से संसद का मानसून सत्र प्रारंभ हुआ है देश के विपक्षी खेमे में बेचैनी पसरी हुई है जिसका कारण पाकिस्तान पर भारत के ऑपरेशन सिंदूर से मोदी को मिली बढ़त है। विपक्ष लाख सवाल खड़े करे लेकिन मोदी के नेतृत्व और सेना की सटीक सैन्य कार्यवाही से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया। यह सफलता विपक्ष को रास नहीं आ रही। सच्चाई तो यह है कि विपक्ष दुश्मन देश पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री मोदी न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में जन विश्वास के प्रतीक बन गए हैं वहीं देश में विपक्ष के नामचीन नेता दुश्मन पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह नित नए-नए भारत विरोधी बयान देकर  पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। आश्चर्य तो यह है कि जिस दिन संसद का मानसून सत्र प्रारंभ होना था उसके कुछ पहले यूपीए शासन काल में वित्तमंत्री रहे पी चिदंबरम ने सवाल किया कि कैसे माना जाए कि पहलगाम के आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे, ये स्थानीय आतंकवादी भी हो सकते हैं। कौन नहीं जानता कि बरसों से भारत,  पाक प्रायोजित आतंकवाद को झेलता रहा है और उसका चरम तो यूपीए के शासनकाल में ही रहा जब चिदंबरम सरकार के जिम्मेदार मंत्री थे। तब भी उन्हें लगता है कि आतंकवादी पाकिस्तान से नहीं आए होंगे। इससे बड़ा झूठ और क्या हो सकता है। एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में  उन्होंने पूछा कि कौन से सबूत पहलगाम हमले के आतंकवादियों को पाकिस्तानी निरूपित करते हैं। इसका जवाब ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन आतंकियों सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा , अबू हमजा और यासिर उर्फ हारिस के पाकिस्तानी दस्तावेजों और उनके पास मिले हथियारों के सबूतों ने दे दिए हैं कि ये पाकिस्तानी ही थे। आश्चर्य तो यह है कि जिस पाकिस्तान ने इस आतंकी हमले के परिणाम स्वरुप भारत के बदले की कार्रवाई में अपने 9 आतंकी अड्डों की बर्बादी देखी, जिस पाकिस्तान ने अपने लगभग 100 आतंकियों की लाशें देखी, जिस पाकिस्तान ने अपने 11 एयर बेसों की तबाही देखी, जिसने भारतीय वायु सेना प्रमुख ए पी सिंह के अनुसार अपने 6 लड़ाकू विमानों को जमींदोज होते देखा जिनमें 5 जेट, एक अवाक्स तथा एक एफ-16 शामिल थे, उसने आज तक यह गुहार नहीं लगाई कि उसकी कोई गलती नहीं थी और भारत ने बेवजह हमला कर उसके देश को हानि पहुंचाई। यही नहीं अगर वह दोषी न होता तो सिंधु जल समझौते के स्थगित होने पर हाय तौबा मचा कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत के खिलाफ एकत्र कर रहा होता और विश्व समुदाय का रुख उसके प्रति सकारात्मक होता। जब अपराधी जानता है कि उसने अपराध किया है तो वह किस मुंह से अपने अपराध को नकार सकता है जबकि सारे सबूत उसे अपराधी सिद्ध कर रहे हों। आज पाकिस्तान को उसके किए की सजा मिल रही है लेकिन विपक्ष के जिम्मेदार नेता अपराधी की तरफदारी कर उसे निर्दोष साबित करने पर तुले हुए हैं। आज अगर कांग्रेस सत्ता में होती तो कब की पाक को क्लीन चिट मिल गई होती। केवल चिदंबरम ही नहीं बल्कि विपक्ष के अनेक सांसद लगातार पाकिस्तान को बचाने की जी तोड़ कोशिश में लगे हैं। चाहे गौरव गोगोई हों या राहुल गांधी, अखिलेश यादव हों या कपिल सिब्बल या हों शिवसेना उद्धव के संजय राऊत यह सब और अनेक सांसद और नेता पाकिस्तान की भाषा बोलकर न केवल उसे क्लीन चिट दे रहे हैं बल्कि देश और जनता को नीचा दिखा रहे हैं। लेकिन देश की जनता जान रही है कि सत्ता से  बेदखल ये लोग हताशा में जीते हुए मोदी के उत्कर्ष और निर्णायक फैसलों को पचा नहीं पा रहे हैं। यही नहीं चिदंबरम ने राहुल गांधी के उस सवाल को भी उठाया कि सरकार यह क्यों नहीं बताती कि भारत को इसमें कितनी नुकसानी हुई इसका जवाब भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने आईआईटी मद्रास में दिया कि कोई एक ऐसा फोटो बताए जो भारत की क्षति बताता हो।

   आज पूरी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल देश में नकारात्मक राजनीति के प्रतीक बनते जा रहे हैं। वे सेना और सरकार की उपलब्धियां को न देखकर उन फिजूल की बातों को मुद्दा बना रहे हैं जो पाकिस्तान को पसंद आती हैं। पाकिस्तान के मुख्य अखबार द ट्रिब्यून ने लिखा कि भारत के विपक्षी नेता जो कह रहे हैं वही सही है। पाकिस्तान का पहलगाम हमले में कोई हाथ नहीं है। निश्चित ही मोदी विरोधी नेता भारत की समृद्धि और उत्कर्ष को नजरअंदाज कर अपनी राजनीतिक रोटियां  सेंकने के लिए पाकिस्तान और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि ये नेता पहलगाम हमले में पीड़ित परिवारों द्वारा बताए गए तथ्यों को भी सही नहीं मान रहे। मुस्लिम तुष्टिकरण का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि वे इस स्थापित तथ्य को नकार रहे हैं कि आतंकवादियों ने धर्म पूछ कर गोली मारी। इसके लिए भी वह सबूत की मांग कर रहे थे जबकि पीड़ित परिवार की पहलगाम में अपने सुहाग को उजड़ता हुआ देखने वाली महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि आतंकवादियों ने उनका धर्म (हिंदू) ही नहीं पूछा बल्कि अधोवस्त्र उतारने को भी कहा। ऐसे सवाल उठाने और सबूत मांगने वाले विपक्ष और कांग्रेस के नेताओं में सांसद उम्मीद राम बेनीवाल और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वेडत्तिवार तथा उद्धव शिवसेना के संजय राऊत को क्षण भर भी लाज नहीं आई कि वे क्षुद्र राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों की अनदेखी कर रहे हैं। हद तो तब हो गई जब राऊत ने कहा कि धर्म वाला एंगल भाजपा ने बनाया जो चाहती थी कि देश में गोधरा जैसा दंगा हो। सच्चाई तो यह है कि विपक्ष के नेता एक-एक कर मोदी विरोध में एक्सपोज होते जा रहे हैं लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

अभी-अभी दिल से कपिल सिब्बल पॉडकास्ट में जिसमें सपा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल सहित गौरव गोगोई, संजय राऊत और सागरिका घोष शिरकत कर रहे थ, उसमें पूर्व कानून मंत्री सिब्बल ने भारत की सेना के सामर्थ्य और शौर्य तथा रक्षा हथियारों पर सवाल खड़े कर दिए। उनका मानना है कि भारत पाकिस्तान से जीतना तो दूर बराबरी पर भी नहीं खड़ा हो सकता। लगता है कपिल सिब्बल को बिल्कुल भरोसा नहीं है कि भारत ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी कैंपों, आतंकियों और एयर बेसों को हानि पहुंचाई होगी क्योंकि उनके अनुसार पाकिस्तान भारत से अधिक शक्तिशाली है ! उन्होंने कहा यह जो ऑपरेशन सिंदूर है, रुक गया है। क्यों रोका, इससे कई सवाल उठते हैं। मैं बताता हूं, यह हमारी जो एयरफोर्स है वह लगभग पाकिस्तान के बराबर है। दूसरी बात हमारे पास जो राफेल और दूसरे एयरक्राफ्ट हैं उनसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट चीन के हैं जो पाकिस्तान के पास हैं इसलिए हम पाकिस्तान से शक्तिशाली नहीं हो सकते। बराबर के हो सकते हैं लेकिन हम पाक से जीत नहीं सकते। तो आतंकवाद खत्म नहीं होगा। यह चलता जाएगा। हमारे पास इतनी शक्ति नहीं है कि हम आर पार की लड़ाई लड़ सकें। अगर हम लड़ाई बढ़ा नहीं सकते तो क्या हमें पाकिस्तान से बात नहीं करना चाहिए। आश्चर्य है कपिल सिब्बल जो देश के पूर्व कानून मंत्री रहे भारत की उस सैन्य शक्ति को कमजोर कह रहे हैं जो दुनिया की ग्लोबल फायर इंडेक्स 2025 के अनुसार सैन्य शक्ति में चौथे स्थान पर है जिसकी प्रशंसा आज दुनिया कर रही है जबकि पाकिस्तान बारहवें स्थान पर है। जिन भारत निर्मित सैन्य हथियारों और लड़ाकू विमानों ने चीन के सैन्य हथियारों को धूल चटा दी, जिसकी सैन्य शक्ति ने तुर्की के ड्रोनों को पानी पिला दिया उन पर सवाल उठा कर अपनी जग हंसाई कराने में इन्हें जरा भी संकोच नहीं हो रहा। आश्चर्य है कि अपने निजी स्वार्थ और मोदी विरोध में विपक्ष के नेता पाकिस्तान जैसे भिखारी आतंकवादी देश को भारत से मजबूत बताने में तनिक भी लज्जा महसूस नहीं कर रहे। आज देश की विपक्षी पार्टियां ऑपरेशन सिंदूर के मोर्चे पर पूरी तरह से बेनकाब हो गई हैं। इसके बाद भी अगर वह सोचें कि देश की जनता उनके पक्ष में खड़ी हो जाएगी तो इससे बड़ा भ्रम शायद ही कोई हो सकता है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किमी जमीन हड़प ली है, आपके पास इसके क्या सबूत हैं क्या आप वहां मौजूद थे, एक सच्चा भारतीय ऐसा कभी नहीं कह सकता। निश्चित ही कोर्ट ने स्थापित किया कि राहुल गांधी ने देश विरोधी बयान दिया। ऐसे ही देश विरोधी बयान ऑपरेशन सिंदूर पर चिदंबरम, कपिल सिब्बल और अन्य नेताओं के हैं जिनमें कहा गया कि कैसे मान लिया जाए कि आतंकी पाकिस्तान से आए या कि भारत, पाकिस्तान से शक्तिशाली नहीं हो सकता या कि आतंकवादियों ने धर्म पूछ कर गोली मारी इसके क्या सबूत हैं। क्या ये बयान किसी सच्चे भारतीयों के हो सकते हैं? क्या इन पर भी सुप्रीम कोर्ट की राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी कि एक सच्चा भारतीय ऐसा कभी नहीं कहेगा, लागू नहीं होती?





डॉ. हरिकृष्ण बड़ोदिया
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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