दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी से 21 फरवरी तक छह दिनों तक चले इंडिया एआई इंपैक्ट समिट तीन कारणों से याद किया जाएगा। पहला यह कि यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा एआई सम्मेलन था, जिसमें 118 देशों के प्रतिनिधि, 20 से अधिक देशों के शासनाध्यक्ष, 59 देशों के मंत्रिस्तरीय नेता और 100 से अधिक वैश्विक एआई सीईओ शामिल हुए। इसके साथ ही इसमें छह सौ से ज्यादा एआई स्टार्टअप्स ने भी हिस्सा लिया। इसके जरिए ग्लोबल साउथ यानी पुरानी भाषा में कहें तो तीसरी दुनिया के देशों के नेता के रूप में भारत उभरा। भारत में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी के युवा नेताओं ने अर्धनग्न प्रदर्शन किया। इसे याद करने की तीसरी वजह यह रही कि सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के नारे के साथ संपन्न हुए इस आयोजन के दौरान पूरे पांच दिनों तक समूची दिल्ली भयंकर ट्रैफिक जाम से जूझती रही।
इस आयोजन के दौरान भारत से जो वायदे हुए हैं, अगर सही तरीके से ये जमीनी हकीकत बने तो तय है कि भारत को भविष्य में बड़ा आर्थिक फायदा भी होने जा रहा है। इस आयोजन के दौरान दुनिया की बड़ी टेक कंपनी गूगल ने भारत में 15 अरब डालर का निवेश और विशाखापत्तनम में एक फुल-स्टैक एआई हब स्थापित करने का ऐलान किया। इसके साथ ही दुनिया की एक और बड़ी टेक्नॉलजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी 17.5 अरब डालर के निवेश का वादा किया है। इसके साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी ई मर्चेंट कंपनियों में से एक अमेज़न वेब सर्विसेज ने भारत में भारत में एआई क्लाउड और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अरबों डॉलर खर्च करने की तैयारी का ऐलान किया है। इसके साथ कई और कंपनियां भी इस तकनीक पर भारत में काम करने की घोषणा कर चुकी है। इसके साथ ही, मुकेश अंबानी ने एआई क्षेत्र में ₹10 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की, जिसके तहत गीगावॉट स्तर के एआई डेटा सेंटर्स बनाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस आयोजन के दौरान करीब 250 अरब डालर यानी लगभग ₹20 लाख करोड़ रूपए से अधिक के बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश और 20 अरब डालर के डीप-टेक वेंचर कैपिटल की के वायदे भारत को प्राप्त हुए हैं।
इस सम्मेलन के बाद एक घोषणा पत्र जारी किया गया, जिसे नई दिल्ली घोषणापत्र कहा गया है। इस पर 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर करके अपनी सहमति जताई है। जिसमें अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस जैसे प्रमुख देशों की भी भागीदारी है। इस सम्मेलन की महत्ता और उसके पीछे भारत की वैश्विक और तकनीकी कूटनीति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस के घोषणा पत्र में अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इससे पहले पेरिस में हुए एआई वैश्विक सम्मेलन के बाद जारी घोषणा पत्र में अमेरिका और ब्रिटेन ने हस्ताक्षर नहीं किया था। जबकि पूरी दुनिया जानती है कि वैश्विक मामलों में फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन एक ही खेमे के देश हैं। इस घोषणा पत्र का समर्थन देने वाले देशों में चीन, ब्राजील, रूस और बांग्लादेश भी रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एआई को सिर्फ 'सुरक्षा' तक सीमित न रखकर उसकी उपयोगिता को 'विकास और प्रभाव' की ओर ले जाना रहा। इसे समझने के लिए इस सम्मेलन के मंत्र वाक्य "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की ओर देखना होगा, जिसका मतलब है सभी का कल्याण, सभी की प्रसन्नता है।
इस सम्मेलन के आयोजन के आधार स्वरूप तीन सूत्र और सात चक्र अपनाए गए थे। पूरी तरह भारतीय परंपरा के लिहाज से इस सम्मेलन के दौरान हुआ शिखर सम्मेलन तीन स्तंभों, लोग, ग्रह और प्रगति पर आधारित था। इसमें सात विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिन्हें भारतीय योग परंपरा में चक्र कहा गया। ये चक्र रहे, समावेशी सामाजिक सशक्तिकरण, सुरक्षित और विश्वसनीय एआईट मानव पूंजी यानी कौशल विकास,आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई, एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, विज्ञान में एआई, लचीलापन, नवाचार और दक्षता । महात्मा गांधी तकनीक को सभ्यता और मानवता का दुश्मन मानते थे। जब कंप्यूटर आया, तब माना गया कि यह बेरोजगारी लाएगा। लेकिन कंप्यूटर के बाद काम में तेजी आई और रोजगार के नए मंच पैदा हुए। एआई के बारे में भी कहा जा रहा है कि उसके बढ़ते प्रभाव से बेरोजगारी फैल सकती है। लेकिन जानकारों का मानना है कि बेरोजगारी की बजाय एआई रोजगार की नई राहें सुझाएगा। महात्मा गांधी की सोच भी गलत साबित हुई है। सात चक्रों में भी जिन विषयों पर विचार हुआ, उनकी बुनियाद पर नई राहें खोजने को लेकर जो मंथन हुआ, उसमें एआई को सर्वसुलभ और सबके लिए उपयोगी बनाने पर ही जोर रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के दौरान स्वदेशी एआई नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए Sarvam AI का LLMs, Gnani.ai का वचना (Vachana) और BharatGen का Param2 17B मॉडल लॉन्च किया। इस सम्मेलन के पहले भारत सरकार ने 5.85 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि वाली वैश्विक चुनौतियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, ताकि एआई के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।
इस दौरान भारत ने जिम्मेदारीपूर्ण एआई उपयोग के लिए नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया। इस दौरान महज चौबीस घंटे में ही सिर्फ 16 और सत्रह जनवरी को ही 2.5 लाख से अधिक शपथ लिए गए। इस दौरान करीब दो लाख 50 हजार 946 छात्रों ने एआई के नैतिक और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की शपथ ली, जो विश्व रिकॉर्ड है। यानी इस सम्मेलन के दौरान ध्यान रखा गया कि इस एआई का नैतिक उपयोग को भी बढ़ावा देने के लिए जागरूकता बढ़ाई जाए। इस बीच भारत सरकार ने अपनी वर्तमान क्षमता में 20,000 अतिरिक्त GPUs जोड़ने की योजना बनाई है, जिससे कुल संख्या 58,000 हो जाएगी। इसे स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए किफायती दरों यानी लगभग ₹65 रूपए प्रति घंटे की दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
इस सम्मेलन के दौरान रिलायंस के 'Jio AI Stack' और सरकारी समर्थन वाले 'BharatGen' जैसे स्वदेशी एआई समाधान प्रस्तुत किए गए। यहां जानना जरूरी है कि है कि BharatGen 22 भाषाओं में काम कर सकता है। इस दौरान भारत की वैश्विक साझेदारी भी बढ़ी। भारत, अमेरिका के नेतृत्व वाली 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) पहल में शामिल हुआ, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों में शक्ति के केंद्रीयकरण को रोकना है। भारत ने खुद को 'ग्लोबल साउथ' की आवाज के रूप में स्थापित किया, यह सुनिश्चित करने की वकालत की कि एआई तकनीक केवल विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि विकासशील देशों की भाषाओं और जरूरतों के अनुरूप भी हो।
पांच लाख लोगों के रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन वाले इस सम्मेलन के दौरान अव्यवस्थाएं भी खूब रहीं. खुद को प्रचारित करने की महत्वाकांक्षा और आपाधापी में अव्यवस्थाओं को बढ़ावा भी मिला। गलगोटिया विश्वविद्यालय ने तो अपनी मूर्खता का प्रदर्शन करके एक तरह से भारत की प्रतिष्ठा को ही चोट पहुंचाने की कोशिश की। उसने चीन की एक कंपनी द्वारा तैयार रोबोट को खुद का बनाया बताकर इस सम्मेलन में पेश कर दिया। हैरत की बात यह रही कि इसे जांचने की किसी ने कोशिश नहीं की और जब सोशल मीडिया के जरिए इसकी पोल खुली तो भारत की खूब किरकिरी हुई।
इस सम्मेलन के पांचवें दिन यानी बीस फरवरी को युवा कांग्रेस के नेताओं ने अर्धनग्न प्रदर्शन करके इस सम्मेलन को एक तरह से भारतीय शर्मिंदगी की वजह बना दिया। वैश्विक नेताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और आर्थिक अगुआओं की उपस्थिति में यह प्रदर्शन शर्मनाक ही कहा जाएगा। बड़ी बात यह है कि कांग्रेस का आलानेतृत्व इस प्रदर्शन को अपना लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए थक नहीं रहा है। जबकि कांग्रेस के समर्थक दलों समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस आदि ने इस प्रदर्शन को अनुचित बताया है। मायावती और जगनमोहन रेड्डी भी इसे गलत और अनुचित बता चुके हैं।
कुल मिलकार यह सम्मेलन प्रचार की महत्वाकांक्षा की अति से प्रभावित रहा तो दिल्ली की जनता के लिए परेशानी का सबब भी रहा। लेकिन इस दौरान वैश्विक आर्थिक, एआई और राजनीतिक नेतृत्व की उपस्थिति में एआई को लेकर जो विचार हुआ, जो वैश्विक निवेश प्रस्ताव मिले, उन्हें भारत की उपलब्धि ही कहा जाएगा। एआई की दुनिया में अब तक अमेरिका और चीन अगुआ माने जाते हैं। लेकिन इस आयोजन के जरिए भारत ने साबित किया कि वह एआई के विकास का तीसरा बड़ा वैश्विक केंद्र हो सकता है।

उमेश चतुर्वेदी
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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