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PRAHAAR—आतंक के विरुद्ध भारत की सात सूत्रीय निर्णायक रणनीति

PRAHAAR—against terror India's seven-point decisive strategy

भारत ने दशकों तक आतंकवाद की पीड़ा सही है—चाहे वह सीमापार प्रायोजित आतंक हो, वैश्विक जिहादी नेटवर्क की साजिशें हों या तकनीक के सहारे पनपता साइबर उग्रवाद। ऐसे जटिल और बहुआयामी खतरे के बीच भारत ने अब अपनी राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति को एक स्पष्ट और संरचित रूप दिया है—‘PRAHAAR’। यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि सात स्तंभों पर आधारित व्यापक रणनीतिक ढांचा है, जो आतंकवाद के विरुद्ध भारत की सोच और संकल्प को परिभाषित करता है।

‘PRAHAAR’ एक संक्षिप्त रूप (acronym) है, जिसमें प्रत्येक अक्षर आतंकवाद से निपटने के एक महत्वपूर्ण आयाम को दर्शाता है। P का अर्थ है Prevention of Terror Attacks—आतंकी हमलों की रोकथाम। R का तात्पर्य है Responses—खतरे के अनुरूप त्वरित और संतुलित जवाब। A का पहला अर्थ है Aggregating Capacities—सभी एजेंसियों की क्षमताओं का समेकन। H दर्शाता है Human Rights and Rule of Law—मानवाधिकार और विधि के शासन का सम्मान। A का दूसरा आयाम है Attenuating the Conditions Conducive to Terrorism—कट्टरता और आतंक को जन्म देने वाली परिस्थितियों को कम करना। अगला A है Aligning and Shaping International Efforts—अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दिशा देना। और अंत में R का अर्थ है Recovery and Resilience—हमले के बाद पुनर्वास और समाज की लचीलापन क्षमता को मजबूत करना।

यह सात सूत्रीय ढांचा बताता है कि भारत आतंकवाद को केवल सुरक्षा की समस्या नहीं मानता, बल्कि इसे वैचारिक, सामाजिक, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय आयामों से जुड़ी चुनौती समझता है। ‘Prevention’ पर जोर इस बात को रेखांकित करता है कि खुफिया जानकारी, तकनीकी निगरानी और एजेंसियों के बीच समन्वय आतंकवाद-रोधी रणनीति की रीढ़ है। मल्टी-एजेंसी सहयोग और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस साझाकरण के माध्यम से हमलों को पहले ही विफल करना इस नीति का प्रमुख लक्ष्य है।

‘Responses’ के तहत स्पष्ट किया गया है कि किसी भी हमले की स्थिति में स्थानीय पुलिस से लेकर विशेष आतंकवाद-रोधी बलों और राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों तक एक सुव्यवस्थित प्रतिक्रिया तंत्र मौजूद रहेगा। यह प्रतिक्रिया केवल सैन्य या सामरिक नहीं होगी, बल्कि कानूनी और जांच प्रक्रिया भी समानांतर रूप से चलेगी ताकि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।

‘Aggregating Capacities’ इस बात को स्वीकार करता है कि आतंकवाद से लड़ाई में तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधनों का आधुनिकीकरण अनिवार्य है। ड्रोन, एन्क्रिप्टेड संचार, डार्क वेब और क्रिप्टो फंडिंग जैसे नए खतरों का मुकाबला पारंपरिक तरीकों से नहीं किया जा सकता। इसलिए राज्य और केंद्र की एजेंसियों की संरचना, प्रशिक्षण और उपकरणों में एकरूपता और उन्नयन पर बल दिया गया है।

‘Human Rights’ को शामिल करना इस नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। यह स्पष्ट संदेश है कि भारत आतंकवाद से कठोरता से निपटेगा, परंतु कानून और संविधान की सीमाओं के भीतर। न्यायिक समीक्षा, अपील की व्यवस्था और विधि के शासन का पालन यह सुनिश्चित करता है कि आतंकवाद-रोधी कार्रवाई स्वयं अन्याय का रूप न ले।

‘Attenuating Conditions’ इस रणनीति का सामाजिक पक्ष है। कट्टरता, बेरोजगारी, सामाजिक अलगाव और ऑनलाइन प्रोपेगेंडा—ये सभी आतंकवाद की जमीन तैयार करते हैं। युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना, समुदाय और धार्मिक नेताओं की भागीदारी, तथा डि-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम इस दिशा में अहम कदम हैं।

‘Aligning International Efforts’ दर्शाता है कि आतंकवाद की प्रकृति सीमाओं से परे है। प्रत्यर्पण संधियाँ, खुफिया सहयोग और वैश्विक मंचों पर सक्रिय भागीदारी भारत की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। वहीं ‘Recovery and Resilience’ यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी हमले के बाद समाज भय और अविश्वास में न डूबे, बल्कि पुनर्निर्माण और सामुदायिक एकजुटता के माध्यम से और मजबूत होकर उभरे।

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