प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन यदि गहराई से देखा जाए तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि आज भी उनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक जीवन की गहरी छाप विद्यमान है। भले ही वे देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हों और वैश्विक राजनीति में भारत की पहचान बन गए हों, लेकिन उनकी कार्यशैली, जीवनशैली और सोच में वही अनुशासन, समर्पण और तपस्या है, जो संघ के प्रचारक जीवन की मूल पहचान मानी जाती है।
बचपन और संघ से जुड़ाव
नरेंद्र मोदी जी का प्रारंभिक जीवन संघर्षपूर्ण रहा। बचपन से ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों से गहरा जुड़ाव बनाया। किशोरावस्था में ही उन्होंने संघ की शाखाओं में भाग लेना शुरू कर दिया। शाखा की दिनचर्या यानी व्यायाम, प्रार्थना, अनुशासन, समय पालन और राष्ट्रभक्ति ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा। यही संस्कार आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की नींव बने।
1970 के दशक में मोदी जी ने गृहस्थ जीवन का मोह त्याग कर पूर्णकालिक प्रचारक बनने का निश्चय किया। संघ प्रचारक का जीवन त्याग और सेवा से भरा होता है—घर-परिवार से दूर रहकर समाज के लिए कार्य करना। मोदी जी ने इस तपस्वी मार्ग को अपना आदर्श मान लिया।
प्रचारक जीवन की विशेषताएँ और मोदी जी
संघ के प्रचारक का जीवन सरलता, तपस्या और अनुशासन से परिपूर्ण होता है। प्रचारक व्यक्तिगत इच्छाओं से ऊपर उठकर संगठन और राष्ट्र की सेवा करता है। नरेंद्र मोदी ने इस परंपरा को अपने जीवन में उतारा।
अनुशासन और दिनचर्या- प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठना, योग-ध्यान करना, सीमित भोजन और कठोर परिश्रम—मोदी जी की दिनचर्या आज भी प्रचारक जीवन जैसी है।
सादगी और संयम: विलासिता और भव्यता से दूर रहकर साधारण जीवन जीना। चाहे पहनावा हो या भोजन, उनमें संयम और भारतीयता झलकती है।
परिवार से विरक्ति: प्रचारक की तरह मोदी जी ने व्यक्तिगत पारिवारिक जीवन से दूरी बनाए रखी और राष्ट्र को ही अपना परिवार माना। उनका कथन है—“140 करोड़ भारतीय ही मेरा परिवार हैं।”

संगठन और राष्ट्र सर्वोपरि
संघ प्रचारक की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह संगठन को ही अपना परिवार मानता है। मोदी जी की राजनीति में भी यह भाव स्पष्ट दिखाई देता है। गुजरात से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक उनकी यात्रा संगठन के प्रति समर्पण का प्रमाण है। चाहे भाजपा का संगठनात्मक कामकाज हो, चुनावी रणनीति हो या सरकार संचालन—मोदी जी ने हमेशा संगठन को सर्वोपरि रखा। उनका संबंध कार्यकर्ताओं से केवल नेता-अनुयायी का नहीं बल्कि प्रचारक-स्वयंसेवक का है।
राष्ट्रवाद और सेवा का भाव
संघ की विचारधारा ‘राष्ट्र प्रथम’ पर आधारित है। नरेंद्र मोदी की नीतियों और भाषणों में भी यही स्वर प्रमुख है। स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रभक्ति उनकी राजनीति के केंद्र में हैं।
प्रचारक समाज सेवा को सर्वोच्च आदर्श मानता है। प्रधानमंत्री रहते हुए भी मोदी जी ने सेवा को राजनीति से ऊपर रखा। स्वच्छ भारत अभियान, जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और कोविड-19 के दौरान जनता को संगठित करना—ये सब सेवा-भाव के उदाहरण हैं।
समय प्रबंधन और संपर्क शैली
संघ जीवन का सबसे बड़ा गुण है समय का कठोर पालन। नरेंद्र मोदी जी की कार्यशैली भी समय प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक बैठक, कार्यक्रम और यात्रा में उनकी समय-पालन की आदत प्रचारक परंपरा का ही विस्तार है।
साथ ही, प्रचारक समाज के हर वर्ग तक पहुँचने का प्रयास करता है। मोदी जी की शैली भी वैसी ही है। वे लगातार यात्राएँ करते हैं, जनता से सीधे संवाद करते हैं और देश के कोने-कोने में पहुँचते हैं।
आलोचना और धैर्य
संघ प्रचारक का जीवन संघर्ष और आलोचनाओं से अछूता नहीं रहता। मोदी जी ने भी अपने राजनीतिक जीवन में अनेक विवादों और आलोचनाओं का सामना किया, लेकिन धैर्य और आत्मबल से उनका उत्तर दिया। यह दृढ़ता उन्हें संघ के संस्कारों से मिली।
वैश्विक स्तर पर प्रचारक दृष्टि
संघ भले ही भारत में सक्रिय है, लेकिन उसकी दृष्टि पूरे वैश्विक हिंदू समाज को जोड़ने की रही है। नरेंद्र मोदी जब विश्व मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो उसी प्रचारक दृष्टि की झलक मिलती है।
योग को वैश्विक पहचान दिलाना, भारतीय परंपराओं को गर्व से प्रस्तुत करना और “वसुधैव कुटुंबकम्” के भाव को विदेश नीति में लागू करना, यह सब प्रचारक जीवन का वैश्विक विस्तार जैसा है।
आधुनिकता और परंपरा का संतुलन
संघ प्रचारक आधुनिक साधनों का उपयोग तो करता है, पर उनमें उलझता नहीं। मोदी जी ने भी डिजिटल तकनीक, सोशल मीडिया और आईटी को जनता से जुड़ने का माध्यम बनाया, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में सादगी बनाए रखी। यह संतुलन प्रचारक जीवन का ही प्रतीक है।
समाज सुधार और आत्मनिर्भरता
संघ प्रचारक केवल संगठन के लिए नहीं, समाज सुधार के लिए भी कार्य करता है। मोदी जी ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “स्वच्छ भारत”, “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं से सामाजिक जागरण का कार्य किया। आत्मनिर्भरता का आह्वान केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि आत्मगौरव और आत्मविश्वास का संदेश है—जो संघ की विचारधारा के केंद्र में है।
नरेंद्र मोदी का जीवन यदि गहराई से देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री पद की व्यस्तता और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बावजूद उनकी मूल जीवनशैली एक संघ प्रचारक जैसी ही है। उनकी सादगी, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, संगठन-निष्ठा और तपस्या आज भी प्रचारक जीवन की पहचान हैं।
इसीलिए उन्हें केवल प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि “प्रचारक प्रधानमंत्री” कहा जा सकता है—जो सत्ता को लक्ष्य नहीं बल्कि राष्ट्र और समाज की सेवा का साधन मानते है।

प्रताप राव
(लेखक राजस्थान भाजपा के प्रवक्ता है)
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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