नई दिल्ली: श्री बांके बिहारी वृंदावन मंदिर के फंड को मंदिर कॉरिडोर के विकास के लिए प्रयोग में ली जाने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मंजूरी मिल गई है। बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को गुरुवार, 15 मई को सुप्रीम कोर्ट से श्री बांके बिहारी वृंदावन मंदिर के फंड को मंदिर कॉरिडोर के विकास के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत मिल गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर के आसपास 5 एकड़ भूमि अधिग्रहण करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने ये भी शर्त रखी है कि अधिग्रहित भूमि देवता के नाम पर रजिस्टर्ड होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार वृंदावन के धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके तहत:
मंदिर के चारों ओर खुला स्थान, दर्शन के लिए सुव्यवस्थित कतार प्रणाली।
सुरक्षा, आपातकालीन सेवाएं और डिजिटल मार्गदर्शन प्रणाली।
श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा: पेयजल, शौचालय, प्रवेश द्वार आदि।
????️ सरकार का पक्ष:
यह विकास परियोजना मंदिर के दर्शन और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाएगी।
भारी भीड़ को नियंत्रित करना आसान होगा, जिससे हादसों से बचा जा सकेगा।
फंड का उपयोग "लोक कल्याण" और मंदिर के सतत संचालन की दृष्टि से किया जाएगा।
फंड पर अधिकार किसका?
मंदिर ट्रस्ट या सरकारी प्रशासन — यह स्पष्ट सीमांकन जरूरी है।
धार्मिक स्वतंत्रता बनाम प्रशासनिक दखल:
भक्तों और गोस्वामी परिवारों का कहना है कि कॉरिडोर की आड़ में मंदिर की आत्मा को आहत न किया जाए।
पारदर्शिता की मांग:
यदि मंदिर फंड का उपयोग होता है, तो उसका स्पष्ट हिसाब, प्रक्रिया और स्वीकृति आवश्यक है।
त्रिस्तरीय समिति: मंदिर प्रशासन, गोस्वामी परिवार, और सरकार की संयुक्त समिति बने जो फंड उपयोग पर निर्णय ले।
जनसुनवाई और परामर्श: विकास कार्यों से पहले स्थानीय संतों, तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं से राय ली जाए।
फंड का पारदर्शी लेखा-जोखा: ऑनलाइन पोर्टल पर फंड के हर उपयोग की जानकारी साझा की जाए।
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