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राम मन्दिर आमन्त्रण ठुकराने वालों  पर थू-थू  कर रहे लोग : सोनिया राहुल ने कांग्रेस पर कालिख पोती : अखिलेश यादव ने किया सपा का सर्वनाश

People are spitting on those who rejected Ram Mandir invitation: Sonia Rahul's granddaughter tarnishes Congress: Akhilesh Yadav has destroyed SP

इस समय पूरा देश राममय हो गया है, बच्चे बच्चे की आवाज से जय श्री राम निकल रहा है। पंाच सौ साल के बाद हिन्दुओं का गौरव लौटा है। मन्दिर का निर्माण भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से न्यायपूर्वक हो रहा है। एेसे समय में कांग्रेस ने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के आमंत्रण को ठुकरा कर न केवल मुस्लिम तुष्टीकरण बल्कि अपने ऊपर प्रामाणिक तौर से मुस्लिम साम्प्रदायिकता का दाग लगा लिया जिसे धोने में उसे बड़े पापड़ बेलनें पडं़ेगे। भाजपा और विपक्षी पार्टियों की राजनैतिक लड़ाई को कांग्रेस और कुछ विपक्षी पार्टियों नेे धार्मिक कर दिया है। यदि एेसा माहौल चुनाव तक चलता रहा, यही भावना और हिन्दुओं को लगी ठेस बनी रही तो कांग्रेस को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। भाजपा का नारा चार सौ के पार एक अत्यंत कठिन कार्य था जो नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम जी तोड़ मेहनत करके शायद ही चार सौ पार कर पाती। आम राजनैतिक विशेषज्ञ 350 के आस पास के आंकड़े का अनुमान लगा रहे थे। अब खुद कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों ने नरेन्द्र मोदी के 400 पार के आंकड़े के सपनों को पूरा करनें में मदद कर दी। अकेले कंाग्रेस नहीं सपा ने भी उत्तर प्रदेश में अपने को हाशिये में लाने का पूरा काम कर लिया है। यदि सोनिया या राहुल या कम से कम पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ही मंदिर के कार्यक्रम में चले जाते तो स्थिति इतनी खराब न होती। चाहे उन्हें सम्मान मिलता या नहीं क्योंकि ये मंदिर था कोई राजनैतिक मंच या समारोह नहीं। यदि उन्हें सम्मान नहीं मिलता तो भाजपा की ही किरकिरी होती लोगों की सहानुभूति कांग्रेस को मिलती। यदि उचित सम्मान मिलता तो ठीक ही था। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के आयोजन में किसी स्वागत या अभिनंदन की आशा क्यों करते हैं। निमंत्रण देकर भाजपा ने अपना कर्तव्य पूरा किया लेकिन ठुकरा कर अस्वीकार करके कांग्रेस ने जग हंसाई करा ली।

वैसे भी मंदिर के किसी कार्यक्रम में जाने में सम्मान की अपेक्षा करना या ठाठ बाठ के साथ जाना अनुचित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब मंदिरों में जाते हैं तो उनका व्यवहार आचरण साधारण से भक्त की तरह होता है। जब मंदिर में जाकर भगवान के आगे नतमस्तक होना है तो कैसे सम्मान की उम्मीद लगा रहे थे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके कर्णधार बेटे राहुल गांधी। मंदिर तो अब विवादित भी नहीं रहा। दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट में केस हारा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी कांग्रेस को मंदिर निर्माण से तकलीफ है। जब प्रमाणित हो गया कि पूर्व में यहां मंदिर था तो वापिस उसे दिया गया। मुसलमानों को भी इसमें अब ऐतराज नहीं पर कांग्रेस के मस्जिद समर्थक नेता और वकील आदि पचा नहीं पा रहे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को उल्टे निर्णय लेने की सलाह देते रहते हैं।

 

मंदिर आमंत्रण के पलटू दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह अपने ऊल जलूल, गैर जिम्मेदाराना बयान के लिये जाने जाते हैं और राहुल गांधी के साथ उनकी नजदीकियां हैं, उन्होंने ही मध्य प्रदेश से अपने ही गुरू अर्जुन सिंह की 10 जनपथ से दूरी राहुल के माध्यम से करवायी थी। दिग्गी राजा ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के आमंत्रण मिलने पर कहा था। “मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आमंत्रण किसी पार्टी का नहीं हैं। ट्रस्ट द्वारा निमंत्रण मिला है उस कार्यक्रम में सोनिया गांधी जायेंगी या उनका प्रतिनिधि मंडल जायेगा। ” जब कांग्रेस पार्टी की तरफ से बयान आ गया कि सोनिया, राहुल, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कोई नहीं जायेंगे तो दिग्विजय सिंह की हवाईयां उड़ गयीं और उन्हें हमेशा की तरह अपने बड़बोलेपन पर शर्मिन्दा होना पड़ा। फिर दूसरा बयान दे डाला।

“ निमंत्रण मिला तो है लेकिन अभी मंदिर का पूरा निर्माण नहीं हुआ है पहले मंदिर का निर्माण पूरा कर लेने दीजिये। अधूरे मंदिर निर्माण में नहीं जा रहे ” साथ साथ ये भी कह दिया कि ये निजी मत है। मंदिर का ताला खोले जाने वाली बात को लेकर खुद ही कह दिया कि कोर्ट के आदेश पर खोला गया था। कांग्रेसी नेता, कार्यकर्ता  चौड़े होकर कहते थे कि राजीव गांधी ने ही ताला खुलवाया या कांगेस ने ताला खोला तब मंदिर बनने का रास्ता खुला। इस बात पर दिग्विजय ने पलीता लगा दिया यानि कांग्रेस की न तो पहल थी न ही मंशा थी ताला खोलने की। दिग्विजय का ये कहना मुसलमान को खुश करने के लिये हो सकता है। जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी इसका श्रेय लेना चाहती है कि उनके नेता राजीव गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री ने मंदिर का ताला खुलवाया तो दूसरी ओर दिग्विजय कह रहे कि कोर्ट के आदेश से खुला है।

 

उत्तर प्रदेश में सपा हुई चौपट

उत्तर प्रदेश में पार्लियामेंट की 80 सीटें हैं जिसमें समाजवादी पार्टी कम से कम 10 सीटों को जीतने की उम्मीद लगाये बैठी थी और कांग्रेस पार्टी 5 सीटों की। इसके कारण थे कि दोनों पार्टियों का गठबंधन मुस्लिम वोटों को रिझाने का काम करेगा और मुस्लिम वोट बसपा को कमजोर समझ कर  इन्हें एक तरफ मिल जायेगा। दूसरा पिछले विधानसभा के चुनाव में सपा के हाथ सत्ता दुबारा नहीं आयी पर उसका प्रदर्शन अच्छा रहा उसे 111 सीटें मिल गयी थी। लेकिन अखिलेश की अपरिपक्वता ने इस आस को धूमिल कर दिया। अब समाजवादी पार्टी ने जो गलतियांं की उसमें लगता है कि मैनपुरी की सीट भी उनकी पत्नी डिम्पल बचा लें तो बड़ी बात होगी। सपा ने अपने पांव पर कुल्हाड़ी खुद मार ली।

 

मंदिर निमंत्रण ठुकराया

अखिलेश यादव पार्टी के सर्वेसर्वा हैं। बाप मुलायम सिंह जी से उन्हें बपौती में पार्टी मिली और कहें तो मुख्यमंत्री पद भी मिला उसे भी संजोकर नहीं रख पाये। उन्हांेने निमंत्रण को कह दिया न जाने कौन निमंत्रण पत्र देने आया था मैं उसे जानता तक नहीं, कम से कम कोई परिचित व्यक्ति देने आया होता। अखिलेश मंदिर के आमंत्रण को भी चाहते थे कि कोई बड़ा परिचित व्यक्ति आमंत्रित करने आये। किसी के बेटे का ब्याह नहीं था कि लोग आपको मिठाई का डिब्बा लेकर हाथ जोड़ कर बुलाने आते। निमंत्रण पत्र तो डाक से आता है ये अब तो वाट्सऐप पर आता है तो भी लोग उसे स्वीकारते हैं। ये खुद बीसियों शादी में वाट्सऐप निमंत्रण पर गये होंगे। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर व्यक्तिगत बुलावे का इन्तजार करने वाला नेता कभी जनप्रिय हो ही नहीं सकता हिन्दुओं का दिल जीत ही नहीं सकता। यही अखिलेश जालीदार टोपी पहन कर रोजा इफ्तार करते हैं। एक और समस्या पैदा कर ली है समाजवादी पार्टी ने हिन्दू धर्म को बदनाम और बेइज्जत करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में शामिल करके। उन्हें एमएलसी बनाया। जितना ज्यादा मौर्य ने सनातन धर्म के खिलाफ और हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथ रामचरित मानस के खिलाफ जहर उगला, उतना ही अखिलेश यादव उन्हें अपने सीने से चिपकाते गये, चहेते होते गये यहां तक कि श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों की हंसी उड़ाने पर मजाक बनाने पर उन्हें इनाम दिया गया और तुरन्त पार्टी का महामंत्री बना दिया। उनका मुस्लिम प्रेम और मस्जिद प्रेम जग जाहिर था ही अब हिन्दु और सनातन धर्म विरोधी होने की गहरी छाप लग गयी। उनकी जाति के लोग जिन पर उन्हें सबसे अधिक भरोसा था वे भी अखिलेश के इस कदम से ना खुश दिखाई दे रहे हैं। प्रदेश भर के यादव लोग कह रहे हैं अखिलेश को निमंत्रण पर जाना चाहिये था।

उत्तर प्रदेश में विपक्ष पर तिहरी मार
उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन को शायद ही कोई सीट लोकसभा में मिले। एक तरफ तो अखिलेश यादव ने मंदिर कार्यक्रम का निष्कासन कर खुद को हिन्दुओं के साथ भेद भाव की राजनीति कर ली। उनके राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी प्रसाद हिन्दु धर्म के खिलाफ जहर उगल रहे। अखिलेश का मौन बताता है कि उन्हें एेसा करने की शह मिली है।
 

दूसरी बात...

मायावती जी गठबंधन से बाहर होकर बसपा के प्रत्याशी अपनी दम पर लड़ा रही है। उन्हें दलित वोट मिलेगा ही मुस्लिम वोट भी काफी मिलेगा।


तीसरी बात... 

मुख्यमंत्री योगी की लोकप्रियता विकास के कार्य उन पर गाज बन कर गिरेगी ऊपर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के धुआंधार दौरे।







डॉ. विजय खैरा

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