logo

वक्फ (संशोधन) विधेयक का पारित होना: एक ऐतिहासिक विधायी जीत

Passing of the Wakf (Amendment) Bill: A historic legislative victory

संसद के दोनों सदनों से हाल ही में पारित हुआ वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 भारत के विधायी इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जिसके पास होने के दौरान जिस तरह की तीखी बहस हुई, वह इसकी विशेषता को दर्शाता है।  अल्पसंख्यक कल्याण मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य देश भर के वक्फ बोर्डों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान तलाश करना था। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 ने वक्फ बोर्ड के संचालन में मनमानी और अस्पष्टता को खत्म करने की तात्कालिक आवश्यकता को पूरा किया है। पहले तो इस विधेयक को निचले सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्यों से पर्याप्त समर्थन मिला, जो वक्फ संपत्तियों को नियंत्रित करने वाले पुराने कानूनों में सुधार पर एकीकृत रुख को प्रतीक था। इसके बाद काफी विचार-विमर्श और जोरदार बहस के बाद, विधेयक को  राज्यसभा में भी निर्णायक बहुमत मिला। इस बिल में प्रस्तावित किए गए सुधारों के निहितार्थों पर उच्च सदन में जोशीली चर्चा हुई, जिसमें संपत्ति के अधिकार, कानूनी स्पष्टता और धार्मिक बंदोबस्ती के प्रबंधन में वक्फ बोर्ड की भूमिका पर विशेष रुप से ध्यान केंद्रित किया गया। बहस का मुख्य विषय वक्फ बोर्ड द्वारा उचित दस्तावेज के अभाव में संपत्तियों पर किए गए अवैध दावों पर केन्द्रित था। जहां-जहां निजी या गैर-वक्फ संपत्तियों को कथित तौर पर वक्फ भूमि घोषित किया गया है, वहां-वहां कानूनी विवाद और सार्वजनिक आक्रोश उत्पन्न हुआ है। इस तरह के विवादों ने वित्तीय लाभ के लिए वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है। आलोचकों का तर्क है कि वक्फ बोर्डों द्वारा अक्सर मूल्यवान शहरी भूमि को हड़पने की कोशिश की जाती है, जिससे अवसरवाद और वित्तीय शोषण के आरोप लगते हैं। झूठे दावेदारों को दंडित करने में जवाबदेही की कमी की वजह से इन मुद्दों की जटिलता और बढ़ जाती है। जिससे वक्फ प्रशासन की ईमानदारी और संपत्ति के अधिकार की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

 संसद के दोनों सदनों से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का पारित होना समानता, न्याय और गैर-भेदभाव के संवैधानिक मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जिस लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत यह विधेयक पारित हुआ, वह सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने और समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप पुराने कानूनों में सुधार करने के विधायी संकल्प से प्रेरित है। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का पारित होना, वक्फ प्रशासन के भीतर पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन विधायी सुधारों का उद्देश्य अधिक जवाबदेही और निष्पक्षता को बढ़ावा देना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि वक्फ संपत्तियां सभी हितधारकों के अधिकारों को बनाए रखते हुए वांछित मजहबी और सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करें। यह विधायी कदम  कानून के शासन को स्थापित रखने और विविध समुदायों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। निष्कर्ष के तौर पर कहा जाए तो वक्फ (संशोधन) विधेयक का पारित होना संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप पुराने कानूनों को आधुनिक बनाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पारदर्शिता, जवाबदेही और न्यायिक सुरक्षा उपायों को लागू करते हुए यह संशोधन सुनिश्चित करता है कि मजहबी संस्थान और व्यक्तिगत संपत्ति अधिकार दोनों सुरक्षित हैं। यह सुधार न केवल कानूनी प्रणाली में जनता के विश्वास को मजबूत करता है, बल्कि भूमि विवादों के मामलों में निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित शासन के लिए एक मिसाल भी स्थापित करता है। जैसे-जैसे यह विधेयक क्रियान्वयन की ओर बढ़ेगा, इसकी सफलता प्रभावी प्रवर्तन और दुरुपयोग के खिलाफ निरंतर सतर्कता पर निर्भर करेगी। वक्फ (संशोधन) विधेयक केवल एक कानूनी सुधार से कहीं अधिक है - यह भारत के लोकतांत्रिक सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि है, जो सभी नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है, चाहे वे किसी भी मजहब या समुदाय के हों।




दीपक कुमार रथ

Leave Your Comment

 

 

Top