महिलाओं की संसद में भागेदारी सुनिश्चित करने के लिये भाजपा सरकार द्वारा लोकसभा में संविधान संशोधन बिल का विरोध कर राहुल गांधी ने कांग्रेस के आत्मघात का कदम उठा लिया है। उधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला बिल को संसद मंे पेश करवा कर एंटी इनकंबेंसी की यदि थोड़ी सी भी गुंजाइश होती तो उसे खत्म कर दिया। ये बिल निश्चय ही मोदी द्वारा फंेका गया रामबाण है। बिल का विरोध करके राहुल ने कांग्रेस को महिला उत्थान विरोधी साबित कर दिया। बिल का समर्थन करके थोड़ी बहुत वाहवाही लूट भी सकते थे। कुछ अन्य बातें भी कह सकते थे कि यदि कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी रहती तो ये बिल बहुत पहले पास करने का प्रयास करते। कुछ संशोधनों की वकालत करते हुवे बिल के पक्ष में मतदान कर उसे पास हो जाने देते। अब तो महिला वोटों के लिये कांग्रेस न घर की रही न घाट की, एक-एक महिला वोट के लिये तरसेगी। इस बिल को भले ही मोदी जी ने चित्त भी मेरी और पट्ट भी मेरी सोचकर जल्द पेश किया हो पर विपक्ष को बुद्धि से काम लेना चाहिये था और उनका निर्णय राजनैतिक होना चाहिये था।
मोदी द्वारा छोड़ा गया तीर जो शायद केवल घायल करके रह जाता उसे राहुल गांधी ने कांग्रेस को महिला विरोधी घोषित करवा कर खुद ही अपने बदन में घुसेड़ लिया। अगली बार मोदी सरकार पुनः भारी बहुमत से बनेगी तो मशीनों, ईवीएम को दोषी करार करने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
राहुल गांधी ने जो बातें संसद में महिला बिल का विरोध करते हुए बोली हैं, उनकी एक बानगी देखिए। सबसे पहले उन्होंने विरोध करते हुए ये कहा कि भाजपा इस बिल के जरिए दक्षिण भारत, छोटे-छोटे राज्यों और पूर्वोत्तर की राजनीतिक ताकत कमजोर कर रही है, और कहा विपक्ष इसकी रक्षा करेगा। प्रधानमंत्री जी ने स्वयं एवं संसद में और भाजपा के नेताओं द्वारा प्रचारित बातों में स्पष्ट रूप से कहा है कि इससे दक्षिण भारत व छोटे राज्यों के हितों में लेष मात्र भी कोई परिवर्तन नहीं होगा। उनकी स्थिति पहले से भी ज्यादा मजबूत की जाएगी। इस तरह राहुल गाँधी का किसी तरह का संशय इस बात पर बेकार साबित हुआ। राहुल ने यह भी कहा कि यह जानते हुए कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस बिल को पारित नहीं करा सकेगी फिर भी इसे लाया गया जबकि इस बिल को लाने की बात सक्रिय रूप से मोदी सरकार के तीसरी बार सरकार में आने के बाद बराबर चल रही थी। उनका ये कहना कि मोदी को ये भ्रम है कि वे ही भारत की जनता है जबकि ऐसा नहीं है राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सस्त्रवल नहीं है, भारत की जनता नहीं है। राहुल की ये बात किसी के गले नहीं उतर सकती क्योंकि उन्होंने सफेद झूठ बोला है। मोदी जी को जनता और पूरा देश तीसरी बार हिन्दुस्तान का नेतृत्व थमा रहा है और उसमें यह कहना कि नरेन्द्र मोदी भारत की जनता नहीं है, इस बात का कोई मतलब नहीं है। आखिर जनता उन्हें बार-बार चुन रही है और उन्हें उन्हीं के हाथ में नेतृत्व दिया है, वही जनता की बात रखेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि इसमें पिछड़े वर्गों को सिर्फ हिंदू कहकर राजनीतिक रूप से भाजपा द्वारा इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सत्ता संरचना में उन्हें उचित हिस्सेदारी नहीं देना चाहती। अब राहुल गांधी जैसे अपरिपक्व नेता को कौन समझाए कि नरेन्द्र मोदी यानी इस देश के प्रधानमंत्री खुद बैकवर्ड पिछड़े वर्ग से ही आते है और तीसरी बार पिछड़े वर्ग को देश का नेतृत्व करने का अवसर भारतीय जनता पार्टी ने दिया है।
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यहां तक कि अनुसूचित जनजाति का राष्ट्रपति भी भारतीय जनता पार्टी ने दिया। राष्ट्रपति बनने का अवसर एक आदिवासी महिला को देकर नरेन्द्र मोदी ने भाजपा को आदिवासी और दलितों का हितकारी प्रमाणित कर दिया। राहुल की संसद में बिल पर बोलते हुए ये बातें पूरी खोखली निकली। राहुल की बातों को शायद ही कोई गंभीरता से लेता हो। उन्होंने जो बोला, उसमें थोड़ी सी भी सत्यता दिखाई नहीं देती है। एक बार कांग्रेस सरकार जब राजीव गाँधी के नेतृत्व में बनी थी, उसको उखाड़ने का काम उन्हीं के एक मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने राजीव गाँधी को भ्रष्ट बता कर किया था। बाद में उन्होंने मंडल कमीशन भी लागू किया हालांकि ये बात और है कि जनता ने विश्वनाथ प्रताप सिंह को ही उखाड़ कर फेंक दिया।
सवाल उठता है, क्या राहुल गाँधी महिला बिल का विरोध कर आग से नहीं खेल रहे हैं, क्या उन्होंने इसका विरोध कर हिन्दुस्तान की आधी जनता के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं किया है.. क्या उन्होंने महिलाओं को बराबर का दर्जा दिए जाने को रोकने का काम नहीं किया है? जब महिलाओं के वोट नहीं मिलेंगे और कांग्रेस पार्टी का पूरा भट्टा बैठ जाएगा, तब राहुल गांधी के पास एक ही रास्ता बचेगा कि वे ईवीएम मशीन के ऊपर सारा ठीकरा फोड़ दें या फिर राजनीति से सन्यास ले लें। हालात ऐसे बन रहे हैं कि शीघ्र ही पार्टी में उनका विरोध होगा। उन्होंने पहले भी कांग्रेस के लिए बहुत से आत्मघाती कदम उठा कर अपने आप को एक बौना नेता साबित किया है। अब नारी सशक्तिकरण के खिलाफ बोल कर जिसे पूरा हिन्दुस्तान देख रहा है अपने आप को गुमराह किया ही है। पार्टी का भी सत्यानाश करने का काम किया है, थोड़ी बहुत जो पार्टी बची थी उसका खात्मा करके ही मानेंगे। इस बिल से मोदी जी ने एक बहुत बड़ा राजनीतिक दांव खेला है, जिसका विपक्ष के पास कोई तोड़ नहीं है ।
विपक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए संसद में राहुल ने भाजपा सरकार द्वारा पेश किया गया महिलाओं के आरक्षण बिल को गिराकर पूरे देश में अपनी फजीहत करवा ली है। उन्होंने नरेंद्र मोदी को यह कहने का मौका भी दिया कि वे महिलाओं को उनका हक देकर रहेंगे। इस तरह नरेन्द्र मोदी की मंशा जाहिर करते हुए पूरे देश में ये पैगाम दे दिया कि वे महिलाओं का दर्जा पुरुषों के बराबर करना चाहते हैं। उन्हें संसद में लाकर उनकी आवाज को उठाने के लिए महिलाओं को पूरा अधिकार देने के पक्षधर है। इसके पहले महिलाओं को देश के सर्वश्रेष्ठ पद पर और संसद में सर्वश्रेष्ठ पद पर नेतृत्व देकर भारतीय जनता पार्टी को महिलाओं का हितैषी साबित कर चुके हैं। पहले लोकसभा स्पीकर का पद महिला को दिया था अब राष्ट्रपति का पद महिला को देकर प्रमाणित कर दिया कि उनकी पार्टी और सरकार महिलाओं के उत्थान और उन्हें उचित स्थान पर बैठाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

डाॅ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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