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नागरिकता संशोधन बिल हिन्दु, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, पारसियांे पर विपक्षी वार

Opposition attacks on Citizenship Amendment Bill Hindus, Sikhs, Christians, Buddhists, Parsis

मुख्य विपक्षी पार्टियां देश की जनता को जितना चाहे झूठ बोल कर अफवाह फैला कर गुमराह करनें की कोशिश कर लंें, कुछ अल्पसंख्यक मुस्लिम पार्टियां, जत्थों और नेताओं का साथ ले ले पर सफेद झूठ बोलनें वाले न कभी सफल हुवे है और न होंगे। जितना विपक्षी नेता झूठ बोलेंगे उतना ही भाजपा को लाभ होता जायेगा क्योंकि उनके झूठ का पर्दाफाश करनें में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टीम में एक से एक धुरंधर वक्ता बैठे हैं। गजब हिन्दुस्तान भर में नरेन्द्र मोदी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह और जे पी नड्डा देश के कोने-कोने में चुनाव प्रचार करेंगे तो सच सामने आ जायेगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जिन्हें सुनने के लिये देश के हर प्रदेश मंे लोग उत्सुकता से इन्तजार करते हैं, सीएए पर विपक्ष की पोल खोलेंगे तब विरोधियों के मुंह सिल जायेंगे।


खुद अपने एजेंडे का विरोध कर रही कांग्रेस

आज कांग्रेस पार्टी बिल का विरोध कर रही है जबकि ये काम करने की जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी की ही थी। आजादी मिलनें के तुरन्त बाद ये बिल लाया जाना चाहिये था। देश के बंटबारे के बाद यह निर्णय कांग्रेस पार्टी का ही था कि पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक जो भारतवासी थे यदि प्रताणित किये जाते हैं और भेदभाव किये जाने पर अपने को असहाय, असहज पायें और भारत आना चाहंे तो उन्हें आने का मार्ग सरकार प्रशस्त करेगी। उन्हें नागरिकता देगी और उनके जीवन यापन में मदद करेगी। महात्मा गांधी ने यह बात कही थी और कांग्रेस ने इस पर अमल करनें का फैसला पार्टी मीटिंग में लिया था। धीरे धीरे कांग्रेस ने अपने सुर बदले और मुस्लिम वोटों को बटोरने के लिये हिन्दुओं के साथ अन्याय किया। हालांकि इससे देश के मुस्लिम समुदाय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता फिर भी कांग्रेस इस बिल को नहीं लायी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जो अल्पसंख्यकों के (मुस्लिम) के पूरे पक्षधर थे। जिन्होंने यहां तक कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यक मुसलमानों का है यानि वे पूर्ण रूप से मुस्लिम तुष्टीकरण के रंग में रंगे हुये थे। इन्हीं मनमोहन सिंह ने राज्यसभा  में श्री अटल बिहारी जी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में 2003 में बोला था कि बंगलादेश या ऐसा अन्य देश जहां पर अल्पसंख्यक प्रताणित किये जाते रहे हैं उन्हें वापिस लाना सरकार की जिम्मेंदारी है। उन्हें सुरक्षित लाया जाये और नागरिकता दी जाये। अब कांग्रेस अपने ही एजेंडे के खिलाफ बोल रही है। मुसलमानों को खुश करने के लिये हिन्दुओं के साथ अत्याचार किया जा रहा है। जब कांग्रेस पार्टी संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चैधरी लोक सभा में यह कह सकते हैं कि कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में लम्बित है और 370 की समाप्ति किये जाने के विरोध मे अनाप-शनाप अनर्गल बोल सकते हैं यानि देश के हित के विरोध में बोलते हुये कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग नहीं मानते हैं। इतनी बड़ी बात बिना कांग्रेस नेतृत्व की मर्जी से नहीं बोली जा सकती। इससे लगता है कि आज की कांग्रेस को देश से, राष्ट्र से कोई लेना देना नहीं है वोटों के लिये कुछ भी कर सकती है।


आप पार्टी के मुखिया दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल का झूठ

बिल के विरोध में इतनी झूठी बातें आप पार्टी के नेता बोल रहे है कि सारी हद ही पार कर गये हैं। खुद केजरीवाल ने क्या कहा और क्या सच है इसकी वानगी देखिये:

भाजपा का कथन: कानून के मुताबिक केवल 31 दिसम्बर 2014 तक आये अल्पसंख्यकों को ही नागरिकता दी जायेगी। भारत में बसे देश के अल्पसंख्यकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पार्टी पहले ही कह चुकी थी कि नागरिकता संशोधन विधेयक चुनाव से पहले लागू कर दिया जायेगा, इसमें टाइमिंग का सवाल बेकार है। यदि 6 माह पहले हो जाता तो कहते कि 5 राज्यों में चुनाव हो रहे थे इसलिये कर दिया, यदि दो साल पहले करते तो कहते देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले कर दिया। जब बिल पास हुआ है तो कभी न कभी तो कानून बनना ही था ये विपक्षी पार्टियां अच्छी तरह जानती थी। अमित शाह इसका खुलासा सार्वजनिक रूप से पहले की कर चुके थे।

सांसद डाॅ. दिनेश शर्मा पूर्व उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया और कहा कि नरेन्द्र मोदी ने अपना संकल्प पूरा किया जो गारंटी दी थी वो गारंटी पूरी कर दी। देश के बाहर रहने वाले हमारे भारतवासी जो विभाजन के बाद सताये जा रहे हैं ऐसे अल्पसंख्यक हिन्दु, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, पारसियों को राहत देना हमारा कर्तव्य है। मुस्लिम तो पाकिस्तान, बंगलादेश में अल्पसंख्यक नहीं हैं। बड़ी बात ये है कि मुसलमानों को आने और नागरिकता देने का कानून पहले से ही है और प्रतिवर्ष पाक से आये पात्रता रखने वाले मुसलमानों को नागरिकता मिलती रहती है।


नागरिकता के विरोध में इंडियन नेशनल मुस्लिम लीग

केरल में थोड़ा बहुत प्रभाव रखने वाली INML ने इस बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस डाला है। ये पार्टी कांग्रेस पार्टी की सहयोगी दल है दोनों मिलकर तालमेल से चुनाव लड़ती हैं। अभी केरल में समझौता हो गया है INML दो सीटों पर और बाकी सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट में विधेयक पर रोक लगाने के लिये भी तुरन्त केस डाल दिया जबकि इस बिल से भारत के बाशिंदे (रहने वाले) मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं है। वे उतने ही सुरक्षित हैं जितने कि हिन्दु या अन्य भारतीय। पाकिस्तान से मुसलमानों को भारत लाने की INML की मंशा सही नहीं है। पाकिस्तान में मुसलमानों का राज है तो मुसलमानों को धर्म के नाम पर प्रताणित किया ही नहीं जा सकता। INML के नेता यहां तक कह रहे कि म्यांमार (वर्मा) से भी मुसलमान जो निकाले जा रहे हैं उन मुसलमानों (यानि रोहंगिया) को भी भारत में शरण देकर नागरिकता दी जाये। जरा देखिये उनकी सोच वे विश्व के अपने धर्म के लोगों को भारत में बसाने के लिये उस बिल का विरोध कर रहे और कोर्ट जा रहे हैं। जो सताये जा रहे, जिनके घरों में आग लाग दी जाती है, जिनकी बहु, बेटियों के रेप किये जाते हैं। उनके देश मे लौटने के रास्ते में रोड़े अटका रहे हंै। बिडम्बना है कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टी जिसका आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका रही है। वह कांग्रेस राजनीतिक रूप से इस पार्टी के साथ है।


सीएए कानून के विरोध का प्रभाव:

भारत के ही नहीं विश्व के किसी भी देश के मानवतावादी व्यक्ति से इस बिल के विरोध की आशा नहीं की जा सकती। बर्बरता के शिकार हमारे देश के सदियों से, पीढ़ियों से रहने वाले भारतवासी जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हो गये हैं को सताया जा रहा है और हम उनके लिये 70 साल में कुछ नहीं कर सके उन्हें वापिस न आने दे तो इससे बड़ा अन्याय होगा। कांग्रेसी गांधी जी की बात नहीं मानते, अपने ही नेता, प्रधानमंत्री रह चुके मनमोहन सिंह की बात नहीं मानते। अपने खुद के बनाये 60 साल पुराने प्रस्ताव को नहीं मानते। देशवासी ये सब देख रहे हैं, विपक्ष द्वारा फैलाये झूठ को भी समझ रहे। देर सबेर समस्त देशवासी हिन्दु हो या मुस्लिम सच को समझ जायेंगे। तब कांग्रेस, आप पार्टी और तृणमूल, राजद और अन्य विपक्षी पार्टियों की फजीहत भी होगी, लोग वोट नहीं देंगें। आज की स्थिति में मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार का भारी बहुमत से जीतना तय है।  कल ये झूठ की पोल खुलते ही स्थिति साफ होने पर भाजपा चार सौ सीट पार कर जायेगी। इसमें विपक्ष द्वारा लोगों को गुमराह करनें, झूठ बोलने की भी एक वजह होगी। ये लोग चुनाव की घोषणा से पहले मशीन का रोना शुरू कर सकते हैं।


अभिनव चन्द्रचूर्ण का मिथ्यापूर्ण कथन

अधिवक्ता चन्द्रचूर्ण के द्वारा एक कार्यक्रम में दिये गये भाषण का अंश वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होेनें नागरिकता संशोधन विधेयक को असंवैधानिक, मुस्लिम विरोधी तथा हिन्दु हितेषी कहा है। वे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूर्ण के पुत्र हैं, अति शिक्षित हैं तोे समझ कर ही बोला होगा। अपनी बात कहते समय वे पूर्ण सच नहीं बता सके, शायद पूरी तरह समझनें में चूक कर गये। उनका अधिकांश भाषण 1947 के दंगों और 1948 में सरकार द्वारा लागू की गयी परमिट व्यवस्था पर रहा। वे कह रहे हैं कि सरकार ने नियम बनाया था कि जो लोग 19 जुलाई 1948 के बाद आयेंगे उन्हें परमिट लेना होगा। यह व्यवस्था पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले लोगों पर लागू नहीं की गयी थी। चन्द्रचूर्ण कह रहे कि जुलाई 1948 के बाद तो अधिकांश मुसलमानों  को ही आना था उन्हें रोकने के लिये परमिट व्यवस्था की गयी क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान से अधिकांश हिन्दुओं को आना था वहां लागू नहीं की गयी। उनका मतलब है हिन्दुओं के पक्ष में परमिट नियम बना। चन्द्रचूर्ण को समझना चाहिये था कि उन परिस्थितियों में कानून व्यवस्था, देश में शांति लाना और रक्तपात, दंगे फसाद रोकना देश की प्राथमिकता थी, उनको भड़काना नहीं। उनकी यह सोच केवल आशंका मात्र है कि परमिट व्यवस्था केवल हिन्दुओं के फायदे के लिये किया। आशंका या अनुमान सच नहीं होते हंै। दूसरी बात उन्होंने बोली कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को बराबर के अधिकार देता है यह सच है। पर विदेश से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति, ग्रुप या समुदाय यहां तक कि विभिन्न देश को एक समान नहीं तौला जा सकता। संविधान में देश की संप्रभुता

(sovereignty) सर्व प्रथम है। देश हित सर्वोपरी है। इसलिये सभी विदेशी नागरिकों और समुदाय को एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। वे इस तरह रोहिंग्या, अहमदिया आदि सभी मुसलमानों की वकालत करते दिखाई दिये जबकि ये कानून विदेश में बसे भारतीय मूल के अल्पसंख्यकों के लिये बना है जिन्हें गैर मुस्लिम होने के नाते सताया जा रहा है। उनको अन्याय से बचाने के लिये ये कानून लाया गया है जो संवैधानिक रूप से शत प्रतिशत सही है।

पाकिस्तान से आने वाले अन्य मुसलमानों के लिये भी कानून है। उन्हें उसकी परिधि में खरा उतरना होगा। चन्द्रचूर्ण बेमतलब की बात कह रहे हैं कि ब्रिटेन में बिशप यानि ईसाई धर्म के गुरू हाउस आॅफ कामन में आते है। इस बात का भारत से कोई सम्बन्ध नहीं है। अन्य कोई बात कानून में जोड़ी जाना जो छूट गयी हो एैसी केटेगरी के लिये आवश्यकतानुसार विचार हो सकता है। कानून को ही असंवैधानिक बताना, मुस्लिम विरोधी कहना पूर्णतः असत्य और भ्रमित करने वाला है। उन्होंने संविधान के अन्य पहलू और उसकी रीढ़ को नहंी परखा कि देष की संप्रभुता सर्वोपरि है। अभिनव चन्द्रचूर्ण का भाषण सच से परे, ज्ञान वघेरू लगता है।





डॉ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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