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ऑपरेशन सिन्दूर माँ बहनों का सिन्दूर बचाने के लिये है सिन्दूर मिटाने के लिये नहीं

Operation Sindoor is to save the vermilion of mothers and sisters, not to erase it

केवल अनजान, अपरिपक्व व्यक्ति ही भारत पाकिस्तान युद्ध विराम का विरोध कर सकते है। युद्ध में कभी कोई जीतता नहीं है, जीतने वाला भी बहुत कुछ खोता है। गाँधी जी का कथन “आँख के बदले आँख” पूरी दुनिया को अंधा कर देगा सदा याद रखना चाहिए भारत तो बिना युद्ध किये ही जीत गया, पाकिस्तान ने युद्ध विराम का आग्रह किया यानि अपनी हार स्वीकार ली फिर भी कुछ कांग्रेसी नेता अपने राजकुमार का रुख समझते हुए इसका विरोध कर रहे है यहाँ तक कि कुछ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तरह-तरह के अपशब्द बोल रहे है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ अनुभवी चमचे जो नरेन्द्र मोदी को चायवाला अनपढ़, मौत का सौदागर और न जाने क्या-क्या बोलते रहे है, वे शायद वरिष्ठ नेता शशि थरूर के राजनैतिक टिप्पणियों के कारण चुप बैठ गये  पर छुटभैये नेता शुरू हो गये।

हमने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध न शुरू किया, न युद्ध करने का भारत का कोई विचार था आपरेशन सिन्दूर केवल पहलगाँव, कश्मीर में निहत्थे हिंदू पर्यटकों को चुन-चुन कर कत्ल करने वालों को उनके आकाओं को सजा देने के लिये था  उनसे बदला लेना था ताकि मारे गये लोगों को न्याय मिल सके। उसमंे हम कामयाब रहे भारतीय सेना ने भी चुन-चुन कर आतंकी अड्डो पर हमला किया उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। कईयों को मौत के घाट उतार कर भारत के जांबाज सिपाही घर सुरक्षित वापस आ गये पूरा विश्व देखता रह गया कि ये कैसे हो गया। भारत ने 200 किलोमीटर पाकिस्तान में घुसकर उन्हें मार डाला, आज भारत का डंका विश्व में बज गया। हमारे दूसरे पड़ोसी दुश्मन देश चीन का हाल बुरा हो गया। जब उसके हथियार भारत ने नाकाम कर दिये। पाकिस्तान की कमर तोड़ डाली है चीन भी अब चूं-चूं नहीं कर सकेगा। ऐसी बड़ी सफलता मिली और विपक्ष के कुछ नेता बधाई देने खुशियों में सम्मलित होने की बजाए घटिया टीका टिप्पणी कर रहे है।

ऑपरेशन सिन्दूर हमारी माँ बहनों का सिन्दूर बचाने के लिये था न कि उजाड़ने के लिये था। भारत ने ऐसा सबक पाकिस्तान को सिखाया कि अब अगर उन्होंने ऐसी हिमाकत की तो उन्हें, उनके आकाओं को और पाकिस्तान को मिटा कर रख देंगे। यदि भारत युद्ध में कूद जाता तो पाकिस्तान से हम निश्चित जीत जाते, पर क्या हमारे सैनिक नहीं मारे जाते।  गोला बारूद और मिसाइल तो वहाँ से भी चलते घर बैठे बैठे खीसें निपोरने वाले पोंगे लोग बकवास करते है। क्योंकि उन्हें युद्ध में जाना नहीं है। किसी माँ की गोद उजड़े या किसी की मांग सूनी हो इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत जीता भी है और कुछ गंवाया भी नहीं है। अन्तराष्ट्रीय जगत में इससे बड़ी कूटनीतिज्ञ सफलता क्या हो सकती है कि इस लड़ाई में विश्व की महान शक्तियां हमारे प्रभाव में रही है। अमेरिका और रूस के अतिरिक्त फ्रांस, इटली, ब्रिटेन का हमारी तरफ स्पष्ट झुकाव रहा है। 

पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम. एम. नरवणे जी ने इस तरह युद्ध विराम को गलत बताने बालों को संदेश देते हुए कहा है “युद्ध कोई बॉलीवुड की फ़िल्म नहीं है, ये अति गंभीर बात है। केवल मूर्ख ही युद्ध थोपने की बात करते है”

ऑपरेशन सिन्दूर निर्णय के अनुसार चलाया गया, पूर्णतः सफल रहा है, केवल आतंकवािदयों के अड्डे ध्वस्त करना थे। जो पाकिस्तान में 200 किलोमीटर भीतर जाकर खत्म कर दिये गये है। कांग्रेस नेता इस घटना से कोई राजनैतिक लाभ नहीं ले पाए इसलिए परेशान है। पहले कहा विपक्ष को सब कुछ घटनाक्रम बताओ अब कह रहे संसद का सत्र बुलाओ जबकि अभी सत्र की कोई आवश्यकता है ही नहीं। यहाँ तक कि कांग्रेस के बड़े नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर ने भी इसको गैर जरूरी बताया। जब नियमित सत्र होगा तब सब जानकारी मिल जायेगी। युद्ध रोका गया है अभी सिन्दूर ऑपरेशन  कार्यरत है उसको बन्द करने की घोषणा नहीं हुई है अतः किसी प्रकार की कोई सैनिक गतिविधि की संसद में सार्वजनिक चर्चा किया जाना उचित नहीं होगा।

राहुल गांधी की संसद सत्र को बुलाने की मांग निराधार हैं ये युद्ध अभी टला नहीं है, केवल रोका गया है। सेनायें मोर्चे पर जमी हुयी हैं, आतंकियों को कश्मीर में पकड़ पकड़ कर मारा जा रहा है। इस समय युद्ध की रूपरेखा, प्रणाली, भौगोलिक स्थिति, सेना और हथियारों की स्थिति योजनायें आदि पर सार्वजनिक चर्चा कराने की बात नासमझ ही कह सकता है। वैसे भी कॉंग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी चीन से डोकलाम में और पेगोंग झील पर दो दो हाथ होने पर बिना जाने समझे हमारी सेना की पिटाई बता चुके हैं, जो बाद में झूठ साबित हुई। राफेल मे लगाये गये आधुनिक हथियारों को सार्वजनिक करवाना चाहते थे। उनकी मांग के विपरीत विपक्षी गठबंधन के एक घटक राष्ट्रीय कॉंग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार उनकी मांग को अनुचित बता चुके हैं।

कांग्रेसियों द्वारा बार-बार इंदिरा गाँधी की बात की जा रही है। जब भारत की सेना ने पाकिस्तान के 93000 फौजी गिरफ्तार कर लिये थे तो उन्हें बिना शर्त क्यों छोड़ा गया। उस समय POK कश्मीर ले लेते एक लाख पाकिस्तानी फौजियों को छुड़ाने के लिये पाकिस्तान पल भर में POK कश्मीर हमें दे देता। ये इंदिरा गाँधी की कूटनीतिक विफलता थी। उसके पहिले पंडित नेहरु उसी क्षेत्र का एक बड़ा भू-भाग चीन को दे चुके थे। कोई प्रयास POK वापिस लाने का नहीं किया कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने 60 साल में उल्टा शिमला समझौता और ताशकंद समझौता कर दिया था। प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्रसंघ (UNO) में ढकेल दिया। यही कांग्रेस पार्टी अब मोदी की लोकप्रियता बड़ जाने के डर से बेवजह उन पर ऊँगली उठा रही है।

किसी भी युद्ध के सकारात्मक परिणाम नहीं होते, उसे हर कीमत पर टाला जाना चाहिये। हम सभी को जापान पर परमाणु बम के हमले से वहाँ के हिरोशिमा नागासाकी की 1945 की बर्बादी मालूम है। जहाँ एक ही दिन में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 2 परमाणु बम  गिराए थे 2.5 लाख लोग मारे गये थे। जहाँ बीसियों वर्ष तक बच्चे अपाहिज पैदा होते रहे, रेडियेशन से लोगो को कैंसर जैसी बीमारियाँ हुई है।

भूखों मरता पाकिस्तान भिखारी भले हो गया पर उसके पास भी एटम बम  है मरता क्या नहीं करता, अपनी पूरी तबाही देखते हुए यदि दो चार बम  हमारे यहाँ फेंकने में सफल हो जाता तो लाखों-लाखों लोग मर जाते, शहर के शहर तबाह हो जाते। बाद में भले हम पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देते। हमारे बयानवीर उस नेता पर ऊँगली उठा रहे जिसने 370 कश्मीर में समाप्त कर दी। जिसकी नीतियों के कारण वहाँ दो करोड़ पर्यटक आये है, वहाँ के लोगो के चेहरे खिल उठे है। नरेन्द्र मोदी जी के साथ पूरा देश खड़ा देखकर भारत का कुशल सशक्त नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व, विश्व की सर्वश्रेष्ठ भारतीय सेना, भारी जन समर्थन, समर्पण भाव और एकता विश्व ने देख ली है इसलिए कांग्रेस अपनी नई चालें चलने की हिम्मत नहीं जुटा  पाया।






डॉ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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