रामचरित मानस में तुलसी दास ने अयोध्या की भव्यता का बहुत-ही सुंदर तरीके से किया है...उन्होंने लिखा है,
जातरूप मनि रचित अटारीं।
नाना रंग रुचिर गच ढारीं।
पुर चहुँ पास कोट अति सुंदर।
रचे कंगूरा रंग रंग बर।
यानी अयोध्या के निवासियों के घर बड़े और भव्य हैं, जो सोने और रत्नों से बने हुए हैं। उनमें मणि और रत्न जड़े हुए हैं...उन भवनों के फर्शों में मणि और रत्न जड़े हे हैं। नगर की सुरक्षा के लिए उसके चारों तरफ सुंदर परकोटा बना है, जो सुंदर-सुंदर रंग-बिरंगे कंगूरों से शोभायमान हो रहे हैं।
तुलसी का यह वर्णन त्रेता युग की अयोध्या का है, जब वहां राम जीवंत रूप में मौजूद थे। आज की अयोध्या में भगवान राम विग्रह के रूप में विराजमान हैं। त्रेता की तरह आज की अयोध्या में रत्नों और मणियों से सजे घर भले न हों, लेकिन वह रामलला की वजह से आधुनिक युग की ऐसी भव्य और प्रतिष्ठित नगरी जरूर बन गई है, जहां सांस्कृतिक एकता की विभिन्न धाराएं आकर जुड़ती हैं, जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनकर उभरी है और जो आर्थिक समृद्धि का केंद्र भी बन गई है।
अयोध्या पहले भी तीर्थ थी, लेकिन अब और बड़े तीर्थाटन केंद्र के रूप में उभरी है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं। बीते साल की पहली छमाही के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में आए कुल पर्यटकों में से एक तिहाई सैलानी अयोध्या पहुंचे हैं। राज्य पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले साल 33 करोड़ लोग घूमने आए, जिनमें से 11 करोड़ अयोध्या पहुंचे। जाहिर है कि इन पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों के पहुंचने से अयोध्या की आर्थिक स्थिति में जबरदस्त बदलाव होने की संभावना बढ़ गई है।
पिछले साल यानी 2024 की 22 जनवरी को राममंदिर की प्राणप्रतिष्ठा हुई थी। उसके ठीक एक दिन पहले भारतीय स्टेट बैंक ने उत्तर प्रदेश और विशेषकर अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद की आर्थिक स्थितियों को लेकर संभावना जताई थी। इस शोध रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या के राम मंदिर बनने और उसके लिए राज्य सरकार की ओर से जारी पर्यटन योजनाओं के चलते उत्तर प्रदेश और अयोध्या की भारी कमाई की सम्भावना बताई गई थी। इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार को वित्त वर्ष 2025 में सिर्फ अयोध्या से 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होने का अनुमान जताया गया था। कुछ ऐसी ही संभावना विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज़ ने भी जताई थी। उसी वक्त जारी अपनी एक रिपोर्ट में जेफरीज ने अनुमान जताया था कि राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा के बाद भारत के आर्थिक क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक असर दिख सकता है। जेफरीज का अनुमान था कि राम मंदिर के रूप में भारत को मिल रहे नये पर्यटन स्थल की वजह से भारत को जहां हर साल 5 करोड़ से ज्यादा पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, वहीं उनकी वजह से आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी। अयोध्या की जो स्थिति है, जिस तरह वहां पर्यटकों की आवक बढ़ी है, जिस तरह वहां विकास के कार्यों में तेजी आई है, कहना न होगा कि ये अनुमान अब जमीनी हकीकत बनते साफ दिख रहे हैं।
रामलला के विराजमान होने के साथ ही अयोध्या वैश्विक मानचित्र पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति का धार्मिक स्थल और आध्यात्मिक सैलानी केंद्र बन गया है। तीर्थाटन और पर्यटन बढ़ने से अयोध्या में होटल, एयर लाइन्स, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, टूर एंड ट्रैवल, रेलवे, गाइड, पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदार, मूर्तिकार और उनके कारोबारी आदि का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। इनकी वजह से अयोध्या में लगातार निवेश बढ़ रहा है। निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। माना जा रहा है कि नए निवेश और पर्यटकों के बढ़ते आवागमन की वजह से अयोध्या में करीब 25 हजार लोगों को नया और प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से काफी लोगों को काम मिल रहा है।
राममंदिर के बाद आए बदलाव का सांस्कृतिक असर यह है कि अब पूरे देश और दुनिया भर में फैले करीब सवा अरब हिंदुओं की श्रद्धा का नया केंद्र अयोध्या बन गई है। इसकी वजह से अयोध्या निवेश के लिए एक नया केंद्र बन गया है। राममंदिर की नगरी को दुनिया से हवाई मार्ग से जोड़ा जा चुका है। यहां का हवाई अड्डा 6,500 वर्ग मीटर में फैला है और हर साल 10 लाख यात्रियों की सेवा करने की इसकी क्षमता है। इसे 60 लाख यात्री प्रति वर्ष तक बढ़ाने के साथ ही इसे अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा से जोड़ने की भी तैयारी है। जिसे इस साल के अंत तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है। इस हवाई अड्डे पर प्रमुख हवाई कंपनियों के विमान आवाजाही रहे हैं और इसके साथ ही इसकी हवाई पट्टी पर चार्टर्ड विमानों के उड़ान की भी व्यवस्था है। ज्ञात हो कि 22 जनवरी को राम मंदिर के अभिषेक के दिन 100 से अधिक चार्टर्ड विमान इसी हवाई अड्डे पर उतरे थे। इसके साथ ही, हेलीकॉप्टर सेवा से अयोध्या को छह जिलों – गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, मथुरा और आगरा से भी जोड़ने की तैयारी जारी है।
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन को 240 करोड़ रुपये के खर्च के साथ भव्य रुप दिया गया है। 22 जनवरी के बाद अयोध्या के लिए 200 से ज्यादा ‘आस्था स्पेशल ट्रेन’ भी चलाई जा रही हैं। देश के विभिन्न हिस्सों को अयोध्या से जोड़ने वाली लगातार नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं, ताकि समूचे देश के आस्थावान लोग रामलला के सहजता से दर्शन कर सकें। इसके साथ ही सरयू नदी के जरिए अंतर्देशीय जलमार्ग भी तैयार किया जा रहा है और इसके जरिए भी अयोध्याधाम को देशभर से जोड़ने की तैयारी है।
अयोध्या का विकास लगातार तेज गति से हो रहा है। यहां 1,200 एकड़ में 2,180 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीनफील्ड टाउन भी बनाया जा रहा है। इसमें मठों, आश्रमों, धर्मशालाओं और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अलग से जमीन निर्धारित की जानी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटकों की बढ़ोत्तरी के मद्देनजर बुनियादी ढांचे के विकास के साथ ही राजमार्ग, नई और सुगम सड़कों के साथ ही पानी और बिजली परियोजनाएं भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश और भारत सरकार की ओर से अयोध्या को विश्व स्तरीय शहर बनाने के लिए करीब 30,500 करोड़ तक की लागत वाली करीब 178 परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही भगवान रामचंद्र के जीवन और कार्यों से जुड़ी जगहों को जोड़ने के लिए रामायण सर्किट भी बनाया जा रहा है। प्राचीन नगर अयोध्या को आधुनिक बनाने के लिए उसका नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसे मास्टर प्लान 2031 नाम दिया गया है। इसके तहत इस शहर के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 85,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं बनाई गई हैं।
विकास की इन गतिविधियों और आस्था के समुद्र के चलते अयोध्या ना सिर्फ सांस्कृतिक बल्कि आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रही है। एक दौर में पूर्वी उत्तर प्रदेश की ख्याति पिछड़ापन के लिए थी। लेकिन पूर्वांचल की पावन धरती अब विकास और संस्कृति के नए केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। जिसकी वजह से जहां हिंदू समुदाय की आस्था को नई गति मिलेगी, वहीं विकास की गतिविधियों और पर्यटन की तेज धारा के चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई ताकत मिलेगी। अब अयोध्या राम के साथ ही रोटी का भी प्रतीक ही नहीं जरिया बनने जा रही है। इस अयोध्या का आइए हम स्वागत करें।

उमेश चतुर्वेदी
कंसल्टेंट, प्रसार भारती, भारत सरकार
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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