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ओडिशा राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने दो प्रार्थी के नामों की घोषणा की

Odisha Rajya Sabha elections: BJP announces names of two candidates

भुवनेश्वर,3 मार्च: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार (3 मार्च) को ओडिशा से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और निवर्तमान सांसद सुजीत कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित  किया है। 67 वर्षीय  मनमोहन सामल ओडिशा इकाई  के अध्यक्ष के रूप में 24 मार्च 2023 से कार्यरत हैं। इससे पहले भी वे 1999 से 2004 तक इस पद पर रह चुके हैं।उल्लेखनीय है कि  2024 के राज्य विधानसभा चुनाव में मनमोहन सामल ने राज्य में पहली बार भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, पर वे स्वंय चुनाव में हार गए थे। चांदबली सीट से उन्हें बीजद के ब्योमकेश राय ने 1,916 मतों से परास्त कर दिया था।  

50 वर्षीय सुजीत कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत उन्होंने बीजू जनता दल  के सदस्य के रूप में की थी और 2020 में पहले राज्य सभा के लिए चुने गए। सितंबर 2024 में वे बीजद  छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और दिसंबर 2024 में  बीजेपी के टिकट पर बिना विरोध के राज्‍यसभा के लिए निर्वाचित हो गए।
 
सामल तटीय ओडिशा से आते हैं, जबकि सुजीत कुमार कालाहांडी जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। पार्टी का यह निर्णय संगठनात्मक मजबूती और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटें 2 अप्रैल को रिक्त हो रही हैं। इनमें से दो सीटें बीजू जनता दल  (बीजद) के निरंजन बिशी और मुन्ना खान की हैं, जबकि दो सीटें भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता की हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

दो दिन पहले बीजद ने अपने दो प्रार्थियों  संतृप्त मिश्र और डॉक्टर दत्तेश्वर होता के नामों की घोषणा की थी। इन दो में बीजद अपने दमपर केवल एक प्रार्थी की जीत ही सुनिश्चित कर सकती है। डॉक्टर होता को जिताने के लिये उसे अन्य विपक्षी दलों की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस ने बीजद से हाथ मिलाते हुए डॉक्टर होता को समर्थन की घोषणा कर दी है। 

147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक और तीन निर्दलीय सदस्यों का समर्थन है, जिससे उसका प्रभावी संख्या बल 82 हो जाता है। बीजद के दो विधायकों के निलंबन के बाद उसकी संख्या 48 रह गई है। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, जबकि भाकपा (माकपा) का एक सदस्य है।

संख्या बल के आधार पर भाजपा दो सीटें सहज रूप से जीतने की स्थिति में है। दो सीटें जीतने के बाद उसके पास लगभग 22 अतिरिक्त मत बचेंगे, जो तीसरी सीट के लिए आवश्यक संख्या से आठ कम हैं। वहीं, बीजद एक सीट जीतने के बाद 19 अतिरिक्त मतों के साथ बचेगी और विपक्ष को उम्मीद है कि कांग्रेस व भाकपा (माकपा) के समर्थन से डॉ. होता चुनावी मुकाबले में टिक सकते हैं। 5 मार्च नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है।

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