logo

ओडिशा ने पारंपरिक लोक कलाकारों की मासिक सहायता राशि बढ़ाई

Odisha hikes monthly assistance to traditional folk artistes

WRITER- सतीश शर्मा


भुवनेश्वर, 30 दिसंबर 2025: ओडिशा की समृद्ध लोक एवं पारंपरिक कला परंपराओं को सशक्त करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के पारंपरिक कलाकारों के लिए मासिक सहायता राशि बढ़ाकर ₹3,000 करने की घोषणा की है। यह योजना ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने में लगे हजारों कलाकारों के लिये सहायक होगी। 

केओंझर में आयोजित 48वीं राज्यस्तरीय पाला सम्मेलन में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि 40 से 80 वर्ष आयु वर्ग के कलाकारों को अब प्रति माह 3,000 रुपये मिलेंगे, जो पहले 2,000 रुपये थे। वहीं, 80 वर्ष से अधिक आयु के कलाकारों के लिए यह राशि 2,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये कर दी गई है।

इस बढ़ोतरी से पूरे ओडिशा में पंजीकृत 47,000 से अधिक कलाकारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।  इस निर्णय को वर्षों से आर्थिक असुरक्षा झेल रहे हजारों लोक कलाकारों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। इनमें से कई कलाकार ‘पाला’ से जुड़े हैं, जो संगीत, कथावाचन, कविता और अभिनय का संगम है तथा पौराणिक कथाओं के माध्यम से ओड़िया भाषा और संस्कृति का प्रचार करता है। मुख्यमंत्री ने पाला को गीत, नृत्य और तात्कालिक कविता का ऐसा संगम बताया, जिसकी जड़ें ओडिशा की आध्यात्मिक और बौद्धिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पाला ने ऐतिहासिक रूप से सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनकर अंधविश्वास और असमानताओं के खिलाफ आवाज उठाई है तथा सत्य, करुणा और नैतिकता का संदेश दिया है।

 इसके साथ छऊ नृत्य, धनु यात्रा, पाला, दंड नाट, और अन्य लोक व शास्त्रीय कला विधाओं से जुड़े कलाकार दशकों से अपनी कला के संरक्षण में लगे रहे हैं, लेकिन पर्याप्त संस्थागत सहयोग के अभाव में उन्हें आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ता है बढ़ी हुई सहायता राशि से उनके जीवन में स्थिरता आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री माझी ने अपने संबोधन में ओड़िया भाषा के संरक्षण और संवर्धन में पाला की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ओड़िया भाषा के संरक्षण और प्रचार में पाला का अतुलनीय योगदान रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस लोककला ने समर्पित कलाकारों की पीढ़ियों के माध्यम से ओड़िया लोक साहित्य को जीवित रखा है। मुख्यमंत्री माझी ने ओड़िया भाषा और संस्कृति में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं से इस “महान लोककला” पर अधिक शोध करने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि युवाओं की नई रुचि से इसका भविष्य और उज्ज्वल होगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को राज्य की सांस्कृतिक पहचान में उनके योगदान के लिए ‘ओड़िया अस्मिता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कलाकार समुदाय ने इस घोषणा का गर्मजोशी से स्वागत किया है। कई कलाकारों ने इसे “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि इससे लोक कलाओं के संरक्षण को नई ऊर्जा मिलेगी और युवा पीढ़ी पारंपरिक कलाओं की ओर आकर्षित होगी।

सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक कलाकारों के सम्मान और उनकी सामाजिक भूमिका की औपचारिक स्वीकृति भी है। इससे कलाकारों को अपनी कला को निखारने और नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय का व्यापक प्रभाव पड़ेगा। आर्थिक सुरक्षा मिलने से कलाकार राज्यभर के उत्सवों, सांस्कृतिक आयोजनों और जनसंपर्क कार्यक्रमों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे, जिससे लोक कलाओं के प्रति जनसरोकार और मजबूत होगा।

ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण निवेश मानी जा रही है, जो अतीत की विरासत का सम्मान करते हुए जीवंत परंपराओं को भविष्य के लिए सुरक्षित करेगी।

Leave Your Comment

 

 

Top