कांग्रेस पार्टी कह रही कि राहुल गांधी देश में न्याय यात्रा पर जा रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोगों से इसमें जुड़ने का आह्वान किया है। उनके कहे अनुसार वे संविधान की रक्षा करना चाहते हैं। उनकी सोच में संविधान की रक्षा करने में सुप्रीम कोर्ट सक्षम नहीं है। संविधान की रक्षा के लिये सुप्रीम कोर्ट वचनबद्ध है, सक्षम है और करने में पूर्ण रूप से समर्थ भी है। यदि विगत की घटनाओं को देखें तो कांग्रेस पार्टी ने खुद प्रजातंत्र का गला कई बार घांेटा है। 1984 में हुए दंगों को लगभग 40 वर्ष होने को है पर अभी तक सिख न्याय की बात जोह रहे हैं। राहुल जी पहले उन्हें न्याय दिला देते जिनके परिवार वालों की आंखे आज भी आंसुओं में नमी लिये न्याय की गुहार लगा रही है। कांग्रेस पार्टी के राज में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बहुत से न्यायाधीशों की नियुक्ति मनमाने ढंग से संविधान के विचारों को ताक में रख कर की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों को कठपुतली बनानें के सारे प्रयास किये हैं। यहां तक कि दो वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को सुपरसीड करके तीसरे नम्बर के न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश बनाया था। उसके अनेकों उदाहरण हैं।
यदि कांग्रेस ने कभी कश्मीरी पंडितों के साथ न्याय किया होता, उनके दुख को समझा होता, कभी कश्मीर की यात्रा इस मंशा से की होती तो उनके लिये न्याय की बात उठाई होती या खुद राहुल जी ने कश्मीर की यात्रा इस मंशा से की होती, उनके लिये न्याय की बात उठाती या जब खुद कश्मीर और केन्द्र में सत्ता में थी तब तुरन्त कदम उठाये होते, तो उन्हें आज ये न्याय यात्रा नहीं करती पड़ती। पार्टी के नेता खुद जुल्म करनें वालों के साथ लचीला रवैया अख्तियार किये रहे। अब उन्हें न्याय करने की बात ध्यान में आयी है जब मोदी सरकार उन्हें न्याय देने में सफल हो रही है। अब उनके परिवार वाले थोड़ी सी राहत की सांस ले रहे हैं।
सनातन धर्म के साथ अन्याय
कांग्रेस पार्टी द्वारा सनातन धर्म के साथ आजादी मिलने से लेकर अपने पूरे शासन काल में किया गया अन्याय साथ ही कोई दूसरा धर्म सहन करता। हिन्दुओं की सहनशीलता, सहिष्णुता का नाजायज फायदा कांग्रेस पार्टी ने उठाया। कारण केवल एक था कि किसी तरह मुसलमानों का एकजुट वोट उसे मिलता रहे। वोटों की खातिर मुसलमानों को सभी सीमायें पार करके प्रसन्न किया गया और उन्हें सब कुछ जो भी हो सकता था, दिया गया। हिन्दुओं को उनका हक तक नहीं मिला। जैसे-जैसे हिन्दुओं को उनके साथ किये गये अन्याय का पता लगता गया, वे कांग्रेस के विरोधी होते चले गये। कांग्रेस पार्टी 2014 में लोकसभा चुनाव और प्रदेशों में होने वाले चुनावों में लगातार हारती गई। शायद इस सोच में थी कि कभी न कभी फिर हिन्दू वोट बंटेगे और मुसलमानों के वोटों के दम पर राज सत्ता में लौटेेगी। भगवान राम के अस्तित्व को नकारने तक का काम किया। हिन्दुओं के हृदय में इससे गहरी और क्या चोट हो सकती थी।
भारतीय सेना के साथ अन्याय
मनमोेहन सिंह प्रधानमंत्री थे। कश्मीर में आतंकियो ने स्थानीय निवासियों से मिल कर आतंक फैला रखा था। स्थानीय लोग मिल कर पुलिस और आर्मी के जवानों, अफसरों पर पत्थरबाजी करते थे। पुलिस और आर्मी के जवानों को लौट कर जवाबी हमले से मना किया गया था। वे मार खाते रहते और जान बचाने के लिये इधर-उधर भागते रहते थे। अपनी जान की रक्षा के लिये उन्होंने केवल पांच हजार बुलेट प्रूफ जैकेट मांगी थी। कांग्रेसी सरकार ने 10 साल तक आर्मी को बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं दी। उस समय सरकार 10 जनपथ से चलती थी और मनमोहन सिंह जी नाम मात्र के प्रधानमंत्री थे। सिपाही मरते रहे उनकी मौत का जिम्मेदार केवल कांग्रेस सरकार थी। उनके साथ अन्याय हुआ तब न्याय देने की बात राहुल गांधी के मन में नहीं आई।
गौ रक्षकों के साथ अन्याय
जब इंदिरा गंाधी प्रधानमंत्री थी साधु-संतो का एक भारी आंदोलन गौ हत्या पर रोक लगानें के लिये दिल्ली में हुआ। वे गाय जिसे हम पूजते हैं उसकी जान बचानें की बात कर रहे थे। उनके आंदोलनकारी जुलूस पर गोली चलायी गयी। कुछ संतों की निर्मम हत्या हुई। ये अन्याय कांग्रेस के राज में निहत्थे साधू संतो पर हुआ। उनका दिया हुआ श्राप एक दिन उसी तरह की मौत से इंदिरा जी की मौत होने पर सच हुआ था।
सीएए बिल का विरोध विस्थापित हिन्दुओं के साथ अन्याय
जो हिन्दु सिख बौद्ध आदि धर्म के लोग जो इस्लाम धर्म मानते और 1947 में देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान में रह गये थे। उनके विस्थापित लोगों को भारत में स्वेच्छा से आने का मार्ग खुला था। जब एेसे लोगों की वापिसी के लिये भाजपा की मोदी सरकार ने देश में लाने का कानून बनाया तो उसका भी कांग्रेस पार्टी ने संसद में विरोध किया तब राहुल गांधी संसद में चुप चाप बैठे समर्थन कर रहे थे। महात्मा गांधी और पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद के कहे शब्दों को उद्धत कर रहा हूँ।
पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध आदि (जो मुसलमान नहीं) हर तरह से भारत आ सकते हैं उस स्थिति में उन्हें नौकरी देना उनका जीवन आरामदायक बनाना भारत सरकार का पहला दायित्व है। वे आज या कभी भी भविष्य में आना चाहे तो सरकार उन्हें हर तरह की मदद करेगी महात्मा गांधी।
भारत के राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को अपने अिभभाषण में विस्थापितों के पुनर्वास की बात कही थी। सरदार पटेल तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से आने वाले भारतीयों को (गैर इस्लामी) को लाये जाने के लिये कहा था। कांग्रेस सरकार ने इस पर ढंग से अमल नहीं किया, कानून नहीं बनाया जब भाजपा ने कानून बनाया तो कांग्रेस पार्टी ने विरोध किया।
इतना भारी अन्याय खुद कांग्रेस पार्टी ने सोनिया राहुल के नेतृत्व में खुद अपने नेताओं की बात नहीं मानी। आज उस अन्याय को भूल कर राहुल न्याय यात्रा की बात कर रहे।
हिन्दुओं के साथ अन्याय
कांग्रेस पार्टी एेसे एेसे कानून लेकर आयी जो केवल मुसलमानों के हक में थे और हिन्दुओं अधिकारों का हनन करते थे। अपने ही देश में हिन्दुओं को पराया समझा गया। उनके साथ सौतेला व्यवहार किया गया। आजादी के तुरन्त बाद से ही मुसलमानों को धार्मिक आधार पर एेसी छूट और सहूलियतें दी गयीं जो हिन्दुओं को नहीं मिली। उसके बाद की कांग्रेसी सरकारों ने मुसलमानों के भले के लिये तरह तरह के कानून बनाये।
पूजा कानून 1991
यह कानून किसी भी पूजा स्थल के चरित्र को बदलने पर रोक लगाता है किसी पूजा स्थल को दूसरे धर्म के स्थल में परिवर्तित न किया जाये। यह कानून कोर्ट में चल रहे अयोध्या में बनी बाबरी मस्जिद के विवाद के मुकदमें को रोकने के लिये लाया गया। एेसा कानून लाकर हिन्दुओं के साथ अन्याय हुआ।
अल्पसंख्यक कानून 1992
इस एक्ट को लाकर केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की। अल्पसंख्यक आयोग बनाया गया। यह आयोग अल्पसंख्यकों की शिकायतें उनके निदान के लिये उसे आवश्यक शक्तियां दी गयी। आयोग को किसी भी व्यक्ति या अफसर को समन करना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करनें के अधिकार दिये गये।
वक्फ एक्ट 1995
वक्फ की परिभाषा दी गयी कि कोई भी एेसी सम्पत्ति जो मुस्लिम लाॅ द्वारा मान्यता प्राप्त किसी धार्मिक या चैरिटेबल काम के लिये दान में दी गयी वह वक्फ बोर्ड की होगी। यदि बोर्ड किसी सम्पत्ति को अपना समझता है तो सम्पत्ति पर कब्जा जमानें के लिये नोटिस भेज सकता है। इस कानून से मुसलमानों के अतिरिक्त सभी धर्मों के लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ। वक्फ बोर्ड को शक्ति दी गयी कि बोर्ड का कोई भी सदस्य, कार्याधिकारी या सर्वेयर किसी भी जमींन को बोल दे कि ये सम्पत्ति वक्फ की है तो बोर्ड को ये साबित करने की जरूरत नहीं कि उसकी वो सम्पत्ति है या नहीं। सम्पत्ति का मालिक प्रमाणित करता रहे कि ये उसकी है। प्रावधान किया गया कि बोर्ड के फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। कांग्रेसी सरकार द्वारा एेसा अत्याचार हिन्दुओं पर किया गया। मुसलमान मजा लूटते रहे और हिन्दू दुखी रहे। एेसे अन्याय के खिलाफ न सोनिया गांधी न राहुल गांधी ने कोई आवाज उठायी।
हिन्दु मंदिरों पर नियंत्रण
कांग्रसी सरकार ने हिन्दू मंदिरो की आमदानी पर टेक्स लगाया। सभी बड़े बड़े प्रसिद्ध मंदिरों का नियंत्रण अपने हांथों में लिया और उन पर सरकारी अफसरों को बैठा कर मनमानें नियम और कानून बनाये। लेकिन मस्जिदें उससे मुक्त रहीं, मुसलमानों के पूजा स्थलों पर कभी नियंत्रण नहीं किया। ये भेदभाव हिन्दुओं के साथ किये गये अन्याय की खुली कहानी कह रहा है। यहां तक कि हज जाने के लिये सरकारी खजाना खोला गया। मुसलमानों को सुविधायें दी गयीं। हिन्दुओं को चार धाम यात्रा या कांवड़ यात्रा के लिये कोई अलग से सुविधायें नहीं दी गयी।
मदरसों पर अतिरिक्त कृपा
मदरसों के लिये अंधाधुंध आर्थिक मदद की गयी, उनके विकास को खुली छूट रही। वही अन्य धर्म के स्कूलों को कोई मदद नहीं दी गयी। सबसे घोर अन्याय तो ये है कि मदरसों में इस्लाम धर्म पढ़ाने की इजाजत है और हिन्दु अपने विद्यालयों में सनातन धर्म की शिक्षा नहीं दे सकते। मदरसों के नाम एेसी संस्थाओं को रूपया बांटा गया जो कभी अस्तित्व में ही नहीं थी।
श्रीराम के अस्तित्व को नकारना
भगवान राम के अस्तित्तव को नकारने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया। रामसेतु के निर्माण को काल्पनिक कहा। मंदिर के निर्माण में हर तरह का अवरोध पैदा किया। एक तो सुप्रीम कोर्ट में उनके मंत्री सांसद रहे वकीलों ने पैरवी की और जब हार सामनें दिखाई दी तो कोर्ट से सुनवाई टालनें का प्रयास किया गया।
इस तरह हिन्दुओं, सिक्खों, कश्मीरी पंडितों और भारतीय सेना के साथ घोर अन्याय कांग्रेस पार्टी के द्वारा चलायी गयी सरकारों और कांग्रेस पार्टी ने खुद किया है। राहुल गांधी पहले इस अन्याय को दूर करने की बात करें, माफी मांगे, प्रायश्चित करें फिर कोई यात्रा पर निकलें।

डॉ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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