परिवारवाद के पोषक राहुल गांधी और लालू यादव की जोड़ी ने बिहार विधानसभा 2025 जीतने के लिये तरह तरह के हथकंडे अपनाये पर कोई सफलता दिखाई नहीं देने के कारण फिर से पुराने जातिवाद, मुसलमानवाद पर डट गये हैं। चुनाव में वोट चोरी के नाम पर चुनाव आयोग और भाजपा में केन्द्र सरकार यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उंगली उठाने वाले कांग्रेस पार्टी के राजकुमार राहुल गांधी बैक फुट पर आ गये हैं। चुनाव आयोग को वोट चोर बताने वाला हाईड्रोजन बम्ब फुस्स फुस्स निकला। हमेशा की तरह फिर सुप्रीम कोर्ट में भी मार खा गये। वोटर का सीधा सघन पुनर्निरीक्षण (SIR) करने का अधिकार बरकरार रहा। लाखों नकली झूंठे या डुप्लीकेट वोटरों का नाम हटाना भी गलत नहीं माना गया। राहुल गांधी के सारे दावे झूंठे निकले, खुद कांग्रेस सरकार वाले राज्य कर्नाटक में फंसते नजर आये। झूंठी शिकायत करना उन्हें उल्टा पड़ गया क्योंकि कोई प्रमाण नहीं दे सके। चुनाव आयोग द्वारा शपथनामा मांगे जाने पर बगलें झांकने लगे इससे पूरे देश में उनका मजाक बना।
इन्डी ग्रुप का जातीय गणना का मुद्दा जो कांग्रेस ने अपने 60-65 साल के राज में कभी नही उठाया उसी में मोदी को घेरने की कोशिश की। भाजपा को हालांकि इसमें कोई देश को और समाज को कोई लाभ नहीं दिखाई दे रहा था पर उन्हें कोई एतराज भी नहीं था। जातीय गणना के लिये मान कर सहमति जता कर उस पर भी इन्डी ग्रुप का मुंह बन्द कर दिया। कांग्रेस को डुबा देने वाले राहुल और भ्रष्ट तंत्र के तमगे से नबाजे गये लालू यादव की पार्टी का चुनावी तालमेल और समझौता हुआ। इसकी मुख्य वजह थी दोनो लोग अपने परिवार अपने बच्चों को पीढ़ी दर पीढ़ी सत्ता पर काविज रखना चाहते है और दोनो ही नेता भ्रष्ट आचरण के मामले में कोर्ट से जमानत पर हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) बिहार प्रदेश के लिये घातक सिद्ध हुयी है। उसके कार्यकाल को जंगलराज के नाम से जाना जाता है। उस समय सरकार में कहीं कोई नियम नहीं था, सब कुछ लालू की मर्जी उनके परिवार के लोगों की मर्जी से चल रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी लालू की सरपरस्ती में चलने वाले गुंडो से डरते थे। एक आईपीएस अधिकारी ने एैसे गंभीर आरोप लगाये थे। यहां तक कि खबरों के अनुसार रेप, अपहरण, फिरौती, बसूली जैसे अपराधों की एक लम्बी श्रंखला उनकी राजद की सरकार में बहुचर्चित रही। हाल ही में उनकी परिवार के सदस्य जो सांसद रह चुके हैं, ने खुले आम आरोप लगाया है कि अपहरण आदि अपराध करने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के निवास से ही अपराधों का संचालन और फिरौती की रकम समझौता करवा कर वसूलते थे।

जब लालू यादव को मुख्यमंत्री पद से चारा घोटालों में जेल जाना पड़ा तो अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया जो पढ़ी लिखी नही थी न ही राजनीति में थी। उनके राज में अपराधी तंत्र को और भी प्रश्रय मिलनें के आरोप लगे। उनके पुत्र तेजस्वी यादव ने राजद संभाली और नीतीश कुमार की सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। जब रेलवे के होटल में रख रखाव आदि का ठेका और सहुलियत एक सुजाता ग्रुप को देने के बदले में पटना आदि में भूमि के आरोप लगे तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी से इस्तीफा देने को कहा। उनके इस्तीफा न देने पर स्वयं नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा दे दिया। वे पुनः भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गये। इस तरह नीतीश कुमार ने अपनी ईमानदार नेता की छवि को बनाये रखने में सफल रहे उनकी ईमानदार छवि और निखर कर आयी। 2025 का चुनाव एनडीए उनके ही नेतृत्व में लड़ रही है जाहिर है इसका लाभ एनडीए को मिलेगा।
तेजस्वी की छवि भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी इस्तीफा न देने के कारण लोग उन्हें पिता लालू के कदमों पर चलना मान रहे हैं। लोग नीतीश कुमार की छवि कार्य शैली और अति पिछड़ों तथा महिलाओं के हित में लिये गये निर्णय और कार्य पहले ही सबसे ऊपर उन्हें आंकतें हैं। यह लाभ एनडीए को मिलेगा। छात्राओं के लिये साईकिल योजना, पंचायत स्थानीय निकायों के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, अति पिछड़ों को आरक्षण दिये जाने से नितिश के पक्ष में एक बड़ा तबका जमकर वोट करेगा।
हाल ही में लालू प्रसाद और तेजस्वी के बयान हिन्दुओं को भारी तकलीफ देने वाले साबित हो रहे हैं। हिन्दू राष्ट्र के विरोध में अत्यंत कठोर और धमकी देने वाली मंशा लोगों के गले नही उतर रही है। तेजस्वी ने यह कह कर कि वो वक्फ के लिये लाये गये कानून को हटा देना उनके अज्ञानता को दिखाता है। जो गलतियां राहुल गांधी करते रहे वही तेजस्वी कर रहे हैं। सच यह है कि संसद द्वारा पारित कानून प्रदेश सरकार बदल ही नहीं सकती वो तो एक एक्ट बन गया है। ऊपर से उस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवायी हो चुकी है। उसके बाद अब किसी को लेशमात्र भी शक्ति नहीं है कि वक्फ कानून को बदल सके। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर वक्फ बोर्ड के कानून में मामूली परिवर्तन करके उसे लागू कर दिया गया है। ये सफेद झूठ मुसलमान अल्पसंख्यक वोटों के लिये बोला जा रहा है। हिन्दू राष्ट्र न तो बन रहा है न कोई बना रहा है न अभी सरकार के किसी एजेंडे में है। उसकी बात कहना केवल मुसलमानों को गुमराह करके किसी तरह उनके एकजुट वोट पाने की मशक्कत है। अल्पसंख्यकों को अब गुमराह करना मुश्किल है। वे सबका साथ सबका विकास के हिस्सेदार बन चुके हैं।
इस चुनाव में पीके की जनसुराज पार्टी केवल अपनी उपस्थिति ही दर्ज करा सकेगी। राजनैतिक सलाहकार बनना या चुनाव में परामर्श देना अलग बात है नेतृत्व की क्षमता होना अलग बात है। उनकी पार्टी किसी तरह भी अपने आप को विकल्प के रूप में प्रस्तुत नही ंकर सकी है। इस सीधे लड़ाई में एक तरफ मोदी जी का विकास कार्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को निखारना और नितिश कुमार द्वारा बिहार में जंगलराज को नियंत्रित करना और दूसरी तरफ लालू यादव को कोर्ट द्वारा भ्रष्ट मान कर सजा देना इन दोनो बातों के बीच में चुनावी जंग होगी। मंगलराज बनाम जंगलराज की लड़ाई में धार्मिक उन्मादी मुद्दे और जातिगत विभाजन आदि दब कर रह जायेंगे।

डॉ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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