चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान 3 को सफलतापूर्वक उतारकर भारत ने इतिहास रच दिया। अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन जैसे तीन ही देश चांद पर पहुंच पाए थे। लेकिन इनमें से कोई भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर नहीं उतर पाया था। भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और सबसे अधिक आबादी वाला देश है। हमारे देश में सबसे ज्यादा संख्या में युवा मौजूद हैं। जिसकी वजह से यहां नवाचार बढ़ता जा रहा है और हमारा देश तकनीकी रुप से भी उन्नत होता जा रहा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रवाद और महान भविष्य की स्थापना के वादे पर 2014 में चुने जाने के बाद भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता को प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की बढ़ती ताकत का संकेत करार दिया है। भारत ने साल 2014 में मंगलयान को मंगल ग्रह की कक्षा में लॉन्च किया था और ऐसा करने वाला पहले एशियाई देश का गौरव हासिल किया था। मंगल मिशन को लॉन्च करने में 74 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे। जो अंतरिक्ष पर आधारित हॉलीवुड फिल्म "ग्रेविटी" पर हुए खर्च $100 मिलियन से भी कम था। यही नहीं मंगलयान लांच होने के तीन साल बाद एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च करके एक रिकॉर्ड बनाया। पीएम मोदी ने अपने एक संबोधन बताया था कि भारत ने 2019 में अपने ही एक उपग्रह को एंटी-सैटेलाइट परीक्षण के दौरान निशाना बनाने में सफलता हासिल की थी। ऐसा करने के बाद इस तरह का कारनामा कर पाने में सक्षम केवल चार देशों के क्लब में शामिल हुआ। उसी साल इसरो के पूर्व प्रमुख के. सिवान ने जानकारी दी थी कि देश 2030 तक अंतरिक्ष स्टेशन लॉन्च करने का इरादा रखता है। फिलहाल अंतरिक्ष के अभियानों के लिए बहुराष्ट्रीय इंटरनेशल स्पेस स्टेशन और चीन का तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन ही वर्तमान में मौजूद हैं।
अंतरिक्ष प्राद्यौगिकी में तीव्र विकास और नवाचार के कारण भारत दुनिया भर में इस प्रौद्योगिकी के सबसे लोकप्रिय निवेश उद्योगों में से एक बन गया है। जिसपर दुनिया भर के नेताओं की निगाहें लगी हुई हैं। व्हाइट हाउस की एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि साल 2023 में जब पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बि़डेन की मुलाकात हुई थी तब उन दोनों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। चंद्रमा और मंगल से भी परे भारत की अंतरिक्ष संबंधित लंबी योजनाएं हैं। जिसके तहत सूर्य के लिए आदित्य मिशन लॉन्च किया है और शुक्र पर एक ऑर्बिटर भेजने की योजना तैयार हो रही है। भारत का चंद्र अभियान इसलिए भी खास है क्योंकि चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति के कारण दक्षिणी ध्रुव पर उतरना हमेशा एक चुनौती माना गया है। क्योंकि वहां पर लाखों वर्षों से सूर्य की रोशनी नहीं पहुंची है। चंद्रमा पर बर्फ के रूप में पानी की संभावित उपस्थिति के कारण उसका दक्षिणी ध्रुव पर उतरना भविष्य में मानव जाति के लिए अपार संभावनाएं खोल सकता है। कुल मिलाकर, चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण दूरगामी प्रभाव वाली एक बड़ी घटना है। इस मिशन की सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और इसकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सौदा साबित हो रहा है। इस सफलता ने एक अग्रणी अंतरिक्ष शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाया है। चंद्रयान-3 की सफलता भारत और वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह मिशन दर्शाता है कि भारत अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक गंभीर खिलाड़ी है, और यह भविष्य में चंद्रमा और उससे आगे के अभियानों के लिए मार्ग प्रशस्त करने में मदद करेगा।

दीपक कुमार रथ
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