नई दिल्ली: असम में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति दिलचस्प होती नजर आ रही है। एक ओर असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार फिर से सत्ता में आने के लिए दमखम लगा रही है तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी की प्रमुख नेता और राज्य खेल और युवा कल्याण मंत्री नंदिता गरलोसा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के खेमे में शामिल हो गई हैं। गरलोसा ने यह कदम BJP की तरफ से टिकट नहीं दिए जाने के बाद उठाया है। कांग्रेस की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, नंदिता गरलोसा, दिमा हसाओ जिले की हाफलोंग विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस ने पहले इस विधानसभा सीट से अपनी स्टेट यूनिट के जनरल सेक्रेटरी निर्मल लंगथासा को मौका दिया था, लेकिन उन्होंने अब गरलोसा को पार्टी का टिकट दिए जाने पर सहमति जताई है।
कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि हमें यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि नंदिता गरलोसा कांग्रेस में आ गई हैं। वह पिछले 5 साल से दीमा हसाओ की आवाज बनी हुई हैं। वह अपने विश्वासों और सिद्धांतों के लिए हमेशा दृढ़ता से खड़ी रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि असम की खेल और युवा कल्याण मंत्री गरलोसा को BJP में इसकी कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि सीएम सरमा को केवल आदिवासियों की जमीनें बड़ी कंपनियों को बेचने में दिलचस्पी है।
असम कांग्रेस का कहना है कि गरलोसा, विधानसभा में हाफलोंग का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन BJP ने इस बार इस विधानसभा क्षेत्र से रुपाली लांगथासा को अपना कैंडिडेट बनाया है। जान लें कि नंदिता गरलोसा मंत्री पद और BJP की सदस्यता से इस्तीफा देने के तुरंत बाद कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया को भेजे त्यागपत्र में नंदिता गरलोसा ने लिखा कि मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से अपना औपचारिक त्यागपत्र दे रही हूं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बीते रविवार को हाफलोंग स्थित गारलोसा के घर गए थे। हालांकि, सीएम सरमा और गरलोसा ने बैठक के नतीजों को लेकर कोई बयान नहीं जारी किया था। असम की 126 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए 9 अप्रैल, 2026 को मतदान होगा जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे।
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