logo

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव : बीजेपी की आंधी में उड़ गई कांग्रेस

Maharashtra Assembly Elections: Congress lost in the storm of BJP

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इस चुनाव में बीजेपी की अगुवाई में महायुति गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। बीजेपी की आंधी में कांग्रेस समेत विपक्ष की उद्धव बालासाहेब ठाकरे ( यूबीटी ) और शरद पवार की एनसीपी उड़ गए। विपक्ष की अघाडी 50 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने 'एक हैं तो सेफ हैं' का नारा दिया था। उनका यह नारा काम कर गया और लोकसभा चुनाव में मिले बड़े झटके के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी पूरी तरह से सुरक्षित हो गई है।

बीजेपी की महायुति ने किन मुद्दों पर चुनाव जीता
महाराष्ट्र में बीजेपी की अगुवाई में महायुति ने चुनाव जीतने के लिए ख़ास रणनीति बनाई थी। लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ संविधान बदलने का नैरटिव सेट कर ज़ोरदार प्रचार किया था। इस वजह से महाराष्ट्र में उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। राज्य के अल्पसंख्यक समाज के वोटरों ने भी बीजेपी के खिलाफ खुल कर मतदान किया था। वहीं आरक्षण के मुद्दे को लेकर मराठा व दलित और ओबीसी समाज भी पार्टी से नाराज थे। ऐसे में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले के केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने ख़ास प्लान बनाया। वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आक्रामक रूप से ' बंटेंगे तो कटेंगे' का नारा दिया। लेकिन पीएम मोदी और अमित शाह थोड़ा सेफ खेलते हुए ' एक हैं तो सेफ' का ज्यादा प्रचार किया। बीजेपी ने यह भी बताया कि संविधान बदलने के नाम पर लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने झूठा प्रोपेगेंडा फैलाया था। साथ ही यह संदेश दिया कि अगर हिन्दू मतदाता आपस में बंटते हैं तो इसका खामियाजा उन्हें आगे उठाना पड़ सकता है। बीजेपी के इस प्रचार रणनीति का व्यापक असर हुआ और चुनाव के दौरान महायुति के पक्ष में बम्पर वोटिंग हुई। 23 नवम्बर को घोषित हुए परिणाम इसे पूरी तरह से साबित करते हैं।

चुनाव परिणाम पर एक नज़र
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के विश्लेषण से पहले इसके परिणाम पर एक नज़र डालते हैं। विधान सभा की कुल 288 सीटों में से सत्ताधारी महायुति को 235 और विपक्ष की महाविकास अघाडी को मात्र 47 सीटों पर सफलता मिली। निर्दलीय और एआईएमआईएम और कुछ छोटे दल सिर्फ 6 सीटें जीत पाए। बीजेपी नंबर वन पार्टी बनी और उन्हें 132 सीटों पर जीत मिली। यह बीजेपी का राज्य में अब तक सबसे बढ़िया प्रदर्शन है। महायुति की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 57 और अजीत पवार की एनसीपी को 41 सीटों पर जीत हासिल हुई। महाविकास अघाड़ी में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना सिर्फ 20 सीटों पर जीत पाई। कांग्रेस को 16 और शरद पवार की एनसीपी 10 सीटों से संतोष करना पड़ा।अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिलीं।

बिना एलओपी के विधानसभा
विपक्ष की हालत इतनी ख़राब है कि इस बार उनके पास नेता विपक्ष का पद नहीं होगा। महाविकास अघाड़ी में शामिल शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी ( एसपी) में से कोई भी पार्टी महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद के लिए पात्र नहीं है। विधानसभा की 288 सीटों में से 10 प्रतिशत यानी 29 सीटों वाली पार्टी इस पद पर अपना दावा ठोक सकती हैं। लेकिन विपक्ष के किसी भी दल के पास इतने विधायक नहीं हैं।

आरएसएस का बड़ा रोल
महाराष्ट्र में बीजेपी को मिली बड़ी सफ़लता के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का भी बड़ा रोल है। आरएसएस ने बीजेपी को बताया कि अगर महाराष्ट्र के रण को जीतना है तो हिन्दू वोटरों के साथ - साथ बाकी वर्ग के वोटरों को एकजुट करना होगा। आरएसएस ने कांग्रेस की जाति जनगणना कार्ड को भी काउंटर करने के लिए ख़ास रणनीति बनाई। इसके तहत यह प्रचारित किया गया कि कांग्रेस जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बांटना चाहती है। ऐसे में हमें एक हैं तो सेफ हैं के नारे के साथ चुनाव में जाना चाहिए। इसका यह भी संदेश था कि अगर हिन्दू वोटों का बंटवारा हुआ तो इसका फायदा दूसरे समाज के लोगों को हो सकता है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम को देखने से यह साफ़ है कि बीजेपी यह बात लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रही। साथ ही आरएसएस ने अपनी सभाओं के माध्यम से भी बीजेपी के इस मिशन में उनकी बड़ी मदद की। यही वजह है की 23 नवम्बर को चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी के कद्दावर देवेन्द्र फडणवीस सीधे  नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय पहुंचे थे।

लाडली बहना का चल गया जादू

महाराष्ट्र में महायुति को मिली बड़ी सफ़लता के पीछे चुनाव के ठीक पहले लागू की गई लाडली बहना योजना का भी बड़ा रोल है। महायुति ने मध्य प्रदेश सरकार की योजना की तर्ज पर यहां भी
महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए देने का ऐलान किया। राज्य में करीब ढाई करोड़ से ज्यादा महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाया। इन महिलाओं ने भारी संख्या में महायुति के पक्ष में
मतदान किया और इसका फायदा सत्ताधारी दल को मिला। एक आंकड़े के मुताबिक जिन सीटों पर महिलाओं ने पुरुष मतदाता से ज्यादा वोट डाले हैं, वहां 80 प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर महायुति के उम्मीदवारों की जीत हुई है।

सीएम शिंदे ने लाडली बहनों का किया धन्यवाद
राज्य के सीएम एकनाथ शिंदे व दोनों डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस व अजीत पवार ने भी माना कि लाडली बहनों का उन्हें काफी आशीर्वाद मिला। यही वजह है कि महायुति इतनी बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रही।

विदर्भ पर ख़ास ध्यान
बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से सबक लेते हुए इस बार विदर्भ पर खास ध्यान दिया। उन्होंने अपने इस क्षेत्र में वोट बैंक को फिर से अपने पक्ष में करने की रणनीति बनाई । ख़ास तौर से अमित शाह ने अपनी चुनावी रैली के साथ अपने स्टार नेताओं को यहां ज्यादा फोकस करने का निर्देश दिया। बीजेपी ने यहां के किसानों के लिए कर्जमाफी और कपास और सोयाबीन के उचित मूल्य दिए जाने का वादा किया।जिसका असर चुनाव परिणाम में देखने को मिला।

महाराष्ट्र में बीजेपी को संजीवनी
इस साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को महाराष्ट्र में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। बीजेपी 27 सीटों पर चुनाव लड़ी थी लेकिन सिर्फ 9 सीट जीतने में कामयाब रही थी। इस वजह से बीजेपी को बड़ा झटका मिला था। लेकिन विधानसभा चुनाव में बंपर जीत से महाराष्ट्र में बीजेपी को नई संजीवनी मिली है। साथ ही देवेन्द्र फडणवीस पार्टी के सबसे बड़े नेता के तौर पर उभर कर सामने आएं हैं।

पीएम मोदी के हाथ हुए मजबूत
लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने से अब चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या मोदी लहर खत्म हो गई है। लेकिन हरियाणा के बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मोदी के भी हाथ मज़बूत हुए हैं। वे पार्टी में यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि अभी भी बीजेपी के अंदर उनसे बड़ा नेता कोई नहीं है और देश में उनका जलवा कायम है।

कांग्रेस बैकफुट पर
लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के हौसले काफी बुलंद थे। यह पार्टी महाराष्ट्र में 13 सीट जीतने में कामयाब रही थी। उन्हें लग रहा था कि देश के संविधान बदले जाने की बात कह कर वे काफी हद तक बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ हवा बनाने में कामयाब रहे हैं।



उसी तर्ज पर कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव में संविधान की रक्षा और जाति जनगणना का मुद्दा उठा कर बीजेपी को घेरने की कोशिश की, लेकिन उनका यह दांव सफल नहीं रहा। कांग्रेस ने 103 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन सिर्फ 16 प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल रहे।

यहां तक कि 8 बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले दिग्गज नेता बाला साहेब थोरात को भी संगमनेर में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण भी अपना चुनाव हार गए। यह कांग्रेस के लिए बड़ा धक्का है। हरियाणा के बाद महाराष्ट्र का चुनाव हार जाने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है। अब उन्हें इस सदमे से उबरने में समय लगेगा।

पवार का खेल खत्म
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक खिलाड़ी शरद पवार का खेल ख़त्म हो गया है। पवार ने अपने भतीजे अजीत पवार को पटखनी देने के लिए बारामती सीट से अपने पोते युगेन्द्र पवार को अजीत के खिलाफ चुनाव में उतारा था। लेकिन अजीत ने युगेन्द्र को हरा कर बड़े पवार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब माना जा रहा है कि जल्द ही शरद पवार राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर सकते हैं। वे पहले भी कह चुके इस बार राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। माना जा रहा है कि अब पार्टी की बागडोर पूरी तरह से पवार की बेटी सुप्रिया सुले संभाल लेंगीं।

हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण: पवार
शरद पवार ने विधानसभा चुनाव में मिली हार को लेकर अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा कि महायुति की जीत के पीछे लाडली बहना योजना और हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण अहम कारण है। हालांकि उन्होंने विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं की तरह ईवीएम को लेकर सवाल खड़े नहीं किए हैं। पवार ने कहा कि हमारे पास ईवीएम के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। तब तक मैं इस पर सवाल नहीं खड़ा कर सकता हूं।

राहुल गांधी ने कहा अप्रत्याशित नतीजे
महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे के बारे में कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने कहा कि ये अप्रत्याशित हैं। उन्होंने कहा कि इस नतीजे का हम विस्तार से विश्लेषण करेंगे। ऐसी रिपोर्ट है कि महाराष्ट्र में  मिली इस बड़ी हार से राहुल काफी नाराज़ हैं और जल्द ही राज्य के अंदर बड़ी सर्जरी होगी और नए नेताओं को कमान मिल सकता है।

लोकसभा और विधानसभा के मुद्दे अलग
विपक्ष विधानसभा का चुनाव भी लोकसभा चुनाव के एजेंडे के साथ लड़ रही थी। जबकि दोनों चुनाव के मुद्दे अलग - अलग थे। विपक्ष को लोकल मुद्दों पर ज्यादा फोकस करने की जरुरत थी। वहीं शुरू में लाडली बहना को पैसे दिए जाने पर सवाल उठाना भी उन्हें भारी पड़ा। साथ ही सीटों के बंटवारे में हुई देरी की वजह से भी विपक्ष पिछड़ गया।
 


लतिकेश शर्मा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

Leave Your Comment

 

 

Top