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लखनऊ अग्निकांड: आखिर कोचिंग सेंटर में कैसे लगी इतनी बड़ी आग, कहां-कहां थी गड़बड़ियां? जानें पूरी खबर

Lucknow Fire Incident: How exactly did such a massive fire break out at the coaching center, and where were the lapses? Read the full story.

नई दिल्ली: सोमवार, 22 जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़ा हादसा हो गया। जहां रिहायसी इलाके में मौजूद एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद से सीएम योगी ने खुद मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया और फिर उन्होंने घायलों का हाल भी जाना साथ ही मामले में सख्त कार्रवाई करने के सीधे निर्देश दिये हैं। वहीं बता दें कि हादसे के बाद घायलों से मिलने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी KGMU का दौरा किया। जहां उन्होंने घायलों और पीड़ित परिवारों के सदस्यों का मनोबल बढ़ाया और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। 

वहीं घटना के कुछ देर बाद ही इस मामले में जांच के लिए एसआईटी का गठन भी कर दिया गया है। मंगलवार सुबह एसआईटी घटनास्थल पर पहुंची और वहां की स्थिति का जायजा लिया। एसआईटी ने यह भी जानने की कोशिश की कि आखिर किस वजह से यहां पर इतना बड़ा हादसा हुआ। इस दौरान बिल्डिंग के निर्माण में कई गड़बड़ियां भी निकलकर सामने आईं।

जानिए कहां-कहां थी बड़ी गड़बड़ियां-- 

1- दरअसल, अलीगंज का ये इलाका आवासीय इलाका है, जहां ये बिल्डिंग बनी है। यहां सिर्फ घर बनाये जा सकते हैं। यहां कमर्शियल एक्टिविटी नहीं हो सकती है। ये इलाका लखनऊ विकास प्राधिकरण के अंदर आता है। अलीगंज के सेक्टर D के मकान का आवासीय नक्शा 2014 में पास हुआ था। ये प्लॉट 2013 में वीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला ने खरीदा और आवासीय नक्शा पास कराया, लेकिन यहां कॉमर्शियल कॉप्लेक्स बन गया। ये प्लाट 1992 स्कॉयर फिट है। 

2- LDA के नियमों के मुताबिक यहां 3 मीटर आगे और 3 मीटर पीछे सेटबैक छोड़ना जरूरी होता है। यानि 3 मीटर आगे और 3 मीटर पीछे तक कोई निर्माण नहीं हो सकता। इसके अलावा बीच में आंगन भी होना जरूरी है। कॉमर्शियल बिल्डिंग में भी आने जाने के दो रास्ते होने चाहिए, लेकिन यहां सिर्फ एक ही रास्ता था। इस रास्ते में भी AC की आउटर यूनिट्स लगी हैं। इसी वजह से 2016 में इस बिल्डिंग को अवैध भी घोषित किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में बिल्डिंग कागजों में लीगल हो गई।

3- जानकारी के मुताबिक बिजली के काम में भी लापरवाही हुई। अच्छी क्वालिटी के तार और सामान नहीं लगाए गए। एनिमेशन सेंटर के निकलने के दरवाजे में बायोमेट्रिक सिस्टम लगा था, जबकि ऊपर के फ्लोर में ताला लगा था। फायर डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक जो बिल्डिंग 15 मीटर से ऊंची होती है, उन्हें ही NOC लेनी पड़ती है। ये बिल्डिंग 15 मीटर से कम ऊंची थी, इसलिए फायर NOC नहीं ली गई।

SIT की टीम कर रही जांच

फिलहाल हादसे वाली बिल्डिंग में इस समय SIT की टीम जांच कर रही है। एसआईटी सबसे पहले बिल्डिंग के अंदर एनिमेशन सेंटर में गई। वहां से बाहर निकलने के रास्ते देखे, फिर सीढ़ियों को देखा कि कैसे वहां एसी की आउटर यूनिट्स लगी हैं। इसके बाद SIT छत पर गई, जिसका दरवाजा हादसे के वक्त बंद था। फिर टीम ने PET सेंटर का भी मुआयना किया। बताया जा रहा है कि करीब 40 मिनट तक मुआयना करने के बाद टीम बाहर निकली है।

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