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आतंकवाद की जड़ पर प्रहार अत्यावश्यक

It is imperative to strike at the root of terrorism

मन की व्यथा समेट,

नहीं तो अपनेपन से हारेगा।

मर जायेगा स्वयं,

अगर तू सर्प को नहीं मारेगा।।
 

राष्ट्रकवि  रामधारी सिंह दिनकर की उपरोक्त पंक्तियां आज यह स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि अगर पाकिस्तान जैसे सर्प का फन नहीं कुचला गया, तो कई पहलगाम होंगे, कई पुलवामा होंगे। लेकिन अब इस सर्प को प्यास से मारकर उसकी कमर तोड़ने की शुरुआत की जा चुकी है, यानी  सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया गया है। इसका मतलब है कि पानी के बहाने ही सही, जंग की शुरुआत तो हो चुकी है। लेकिन क्या यह वास्तविक जंग में भी बदल सकता है? क्या है डरावनी सच्चाई?
 

पाकिस्तान के लिए बेहद अहम था सिंधु जल समझौता

19 सितंबर 1960 को सिंधु जल समझौता करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु खुद पाकिस्तान पहुंचे थे। वह भी तब, जब पाकिस्तान में लोकतंत्र नहीं था। बल्कि वहां का राष्ट्राध्यक्ष अयूब खान नाम का  सैनिक तानाशाह था। पाकिस्तान के लिए इस समझौते की क्या अहमियत थी, वह इसी बात से समझी जा सकती है कि जब यह समझौता हो गया तब पाकिस्तानी इतने खुश हो गए थे कि उन्होंने नेहरूजी को एक खुली जीप में बिठाकर रावलपिंडी की सड़कों पर घुमाया था।  सिंधु जल समझौते के मुताबिक अगर कोई भी पक्ष इस समझौते को एकतरफा रद्द करता है तो इसे युद्ध का ऐलान माना जाएगा। यानी कि भारत  की तरफ से युद्ध का ऐलान कर दिया गया है।


पाकिस्तान ने नकल में मारी अपने पैर पर कुल्हाड़ी
जिसके बाद खबर आई कि भारत द्वारा सिंधु जल समझौता रद्द किए जाने के बाद पाकिस्तान ने भी 2 जुलाई 1972 को हुआ शिमला समझौता अपनी तरफ से स्थगित कर दिया है। जो कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में पाकिस्तानी सेना की करारी हार के बाद इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में जुल्फिकार अली भुट्टो को करना पड़ा था। इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और पाकिस्तान अपने विवादों के निपटारा बातचीत की टेबल पर शांतिपूर्ण तरीके से करेंगे और कभी भी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी लाइन ऑफ कंट्रोल को पार नहीं करेंगे। लेकिन पाकिस्तान ने भारत को जवाब देने के चक्कर में शिमला समझौते को स्थगित कर दिया है। जो कि भारत के लिए बहुत ही अच्छा है क्योंकि इससे लाइन ऑफ कंट्रोल को पार करने में कोई दुविधा नहीं रह जाएगी। शिमला समझौते के स्थगित होने से भारत की जांबाज फौजों का रास्ता खुल गया है। वह कभी भी नियंत्रण रेखा को पार करके आतंकवादी कैंपों को ध्वस्त करने के लिए स्वतंत्र हो गई है।


पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष ने भड़काई हिंदुओं के खिलाफ हिंसा
वास्तव में देखा जाए तो पहलगाम में मासूम पर्यटकों पर जो हमला हुआ, वह पाकिस्तान के फौजी जनरल आसिफ मुनीर के भड़कावे का नतीजा था। चंद दिनों पहले ही पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष ने खुलेआम हिंदुओं पर हमले के लिए कट्टरपंथियों  को भड़काया था। आसिम मुनीर ने अपने बयान में कहा था कि''हमारे पूर्वजों का मानना था कि हम हर आयाम में हिन्दुओं से अलग हैं। हमारा मज़हब, रिवाज, परंपरा, सोच और मक़सद सब अलग हैं।'' जिसका नतीजा रहा कि पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवादियों को शह मिली और उन्होंने निहत्थे बेगुनाह पर्यटकों पर हमला कर दिया और धर्म पूछ-पूछकर उन्हें गोलियां मारी। कुल 26 जानें गई हैं, जिसमें 25 हिंदू और एक घोड़े चलाने वाला स्थानीय मुस्लिम था। इन सबकी मौत की जिम्मेदारी आसिम मुनीर और आतंक के केन्द्र बने उसके देश पाकिस्तान की है। ऐसे कट्टरपंथियों को सबक सिखाने का एक ही तरीका है कि उन्हें बर्बाद कर दिया जाए। बिना एक गोली चलाए या बिना एक बम गिराए। जिस पाकिस्तान और वहां बैठे आसिम मुनीर जैसे कठमुल्लों ने भारत राष्ट्र और सनातन धर्म पर आंख उठाने का दुस्साहस किया है। वह भूख और प्यास से तड़प उठें, यही सबसे बेहतर प्राकृतिक न्याय होगा।
 

सिंधु जल समझौते को रोकना एक दिन का फैसला नहीं
भारत में जब सिंधु जल समझौते को स्थगित करने की खबर आई। तो कई लोग सवाल उठाने लगे कि इतना पानी आप कहां रखेंगे? आपकी क्या तैयारी है? क्या आपने बांध बनाए भी हैं?

लेकिन भारत ने सिंधु जल समझौता रद्द करने जैसा बड़ा फैसला कैसे आनन फानन में नहीं लिया है। हमारे देश का दूरदर्शी नेतृत्व जानता था कि आंतरिक रुप से बर्बाद हो चुका पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए कभी भी पहलगाम जैसा दुस्साहस कर सकता है। क्योंकि अतीत में भी ऐसा ही होता आया है। जब भी पाकिस्तान मुश्किल में पड़ा उसने भारत के खिलाफ हिंसा भड़काई है और फिर भारत की प्रतिक्रिया का डर अपनी जनता को दिखाकर उसे एकजुट करने कोशिश की है। इसीलिए यह तय था कि पाकिस्तान कोई ना कोई दुस्साहस जरुर करेगा।
 

मोदी की चाल से निपटना पाकिस्तान के निकम्मे नेताओं के लिए संभव नहीं
इसीलिए मोदी जी की तैयारी साल 2016 से ही जारी थी। ताकि बिना खून बहाए, बिना अपने सैनिकों की जान जोखिम में डाले भी पाकिस्तानियों को सबक सिखाया जा सके। सिंधु जल समझौते को अभी तो सिर्फ स्थगित किया गया है, अगर इसे पूरी तरह रोक दिया गया, तो आधे से ज्यादा पाकिस्तान की जनता ना सिर्फ प्यास से तड़पने लगेगी, बल्कि पाकिस्तान की खेती पूरी तरह से चौपट हो जाएगी। भारत पिछले 9 सालों से सिंधु नदी बेसिन में  कई वाटर_रिजर्व बना रहा था। वर्षों से सिंधु नदी जल आयोग की बैठक भी नहीं हुई। इंडियन लॉबी ने पाकिस्तान के वाटर कमिश्नर को इतना भ्रमित कर रखा है कि वह पाकिस्तान छोड़कर कनाडा में बस चुका है और पिछले एक दशक से पाकिस्तान को उल्टे सीधे बयान देकर गुमराह कर रहा है। विश्व_बैंक, जो कि सिंधु नदी जल समझौते में गारंटर है, पाकिस्तान ने जब उससे शिकायत की कि भारत यह वाटर रिजर्व क्यों बना रहा है, तो उसने कोई जवाब ही नहीं दिया। यह बरसों तक विदेशी मंचों पर अपनी लॉबी मजबूत करने का नतीजा है। अब पाकिस्तान रोना रो रहा है कि सिंधु जल समझौते को बहाल कराने के लिए हम इस्लामी मुल्कों के पास जाएंगे, विश्व बैंक के पास जाएंगे, यूनाइटेड_नेशन के पास जाएंगे, अमेरिका के पास जाएंगे।  आज कोई भी पाकिस्तान की मदद करने वाला नहीं है। इंडियन लॉबी ने हर जगह अपना पक्ष रखकर पहले से ही भारत की स्थिति मजबूत कर ली है और पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि आतंकवादी कहां पनपते हैं और आतंकवाद को लगातार संरक्षण कौन दे रहा है। अब पाकिस्तान चाहे तो पूरी दुनिया में रोना रो लो, ना तो विश्व बैंक सुनेगा, ना यूनाइटेड नेशन सुनेगा और ना ही उसकी इस्लामी बिरादरी वाले।


अमेरिका से पाकिस्तान के अब तक के सबसे खराब रिश्ते
भारत द्वारा वैश्विक लॉबीइंग का नतीजा भी दिखाई देने लगा है। पहलगाम हमले के बाद अमेरिकी एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल रुबिन ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर की तुलना अल कायदा के सरगना रहे आतंकी ओसामा बिन लादेन से कर दी है। रुबिन ने कहा कि असीम मुनीर और लादेन में सिर्फ इतना फर्क है कि मुनीर महल में रहता है जबकि लादेन गुफा में रहता था। लेकिन दोनों ही आतंकवादियों को पालने पोसने का काम कर रहे  हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लगातार आतंक को पनाह दी है और दुनिया के लिए खतरा बना है। ऐसे में पाकिस्तान को एक आतंकी देश घोषित कर देना चाहिए। पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा कि हम जानते हैं कि पाकिस्तान कई आतंकवादी समूहों का घर है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा भी शामिल है। दुर्भाग्य से, पाकिस्तानी राजनयिकों द्वारा पश्चिम को मूर्ख बनाने के कारण आतंकवाद विरोधी कार्रवाई की कमी के कारण, अब हमारे पास न केवल पाकिस्तान में बल्कि बांग्लादेश में भी ऐसी ही समस्या का विस्तार हो रहा है।

माइकल रुबिन का यह बयान बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहलगाम हमले पर अमेरिका में वर्तमान ट्रंप प्रशासन के रुख को दर्शाता है। यह बताता है कि पाकिस्तान के लिए दुनिया में कहीं भी ठिकाना मौजूद नहीं है।
 

खतरे में घिरा पाकिस्तान दे रहा है युद्ध की गीदड़भभकी

पहलगाम हमले की भारत में व्यापक प्रतिक्रिया हुई है। शायद पाकिस्तान को इसकी गंभीरता का अंदेशा नहीं था। उसे अंदाजा नहीं था कि जिस भारत ने पिछले चार युद्धों के दौरान भी सिंधु जल समझौते को हाथ नहीं लगाया, उसने अचानक उसे स्थगित करने का बड़ा फैसला कैसे कर लिया। इसीलिए पाकिस्तान के हाथ पांव फूल गए हैं। जिसके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साफ तौर पर भारत को युद्ध की धमकी देने पर उतर आए हैं। शरीफ ने पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमिटी की बैठक के बाद बयान दिया है कि भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को रद्द किए जाने को युद्ध के तौर पर  देखा जाएगा यानी Act of War माना जाएगा।

जब शहबाज शरीफ यह बयान दे रहे थे ठीक उसी समय 24 अप्रैल को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति से मुलाकात करने की खबरें आईं है। जिससे यह खबर फैल गई कि शाह और जयशंकर की यह मुलाकात क्या महामहिम राष्ट्रपति से युद्ध की अनुमति मांगने के लिए की गई है। युद्ध की इस खबर को इस बात से भी बल मिल रहा है क्योंकि पीएम मोदी ने भी ट्विट करके कहा है कि भारत पहलगाम हमले में शामिल हर आतंकवादी की पहचान करके, उनका पीछा करके दंडित करेगा। हम धरती के आखिरी हिस्से तक इन आतंकियों का पीछा करेंगे। ये आतंकवादी भारत का हौसला नहीं तोड़ सकते। इन सभी बातों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि कुछ बड़ा होने वाला है। 

क्या होना चाहिए भारत का कदम
आज जब पहलगाम में मासूमों पर हमला होने के बाद पाकिस्तान का काला चेहरा एक बार फिर से बेनकाब हो गया है। तो यह कहने का समय आ गया है कि गुलाम कश्मीर को आजाद करा लेना चाहिए। क्योंकि यही समय है, सही समय है और सही रणनीति का हिस्सा भी है। हर कोई यह जानता है कि आखिर कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कहां से होती है? हथियार कहां से आते हैं? ड्रोन कहां से घुसे चले आते हैं? आतंकवादियों के ट्रेनिंग सेन्टर और लांच पैड कहां पर है?

जाहिर सी बात है पाकिस्तान कब्जे वाले गुलाम कश्मीर में। तो क्यों ना इस समस्या को जड़ से खत्म कर दिया जाए। यानी पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर पर कब्जा कर लिया जाए। क्योंकि कश्मीर के इसी हिस्से में हाजी पीर का दर्रा मौजूद है, जो कि समुद्र से 8,652 फीट की ऊंचाई पर है। यहां से पूरे PoK यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर घाटी का नजारा दिखता है। लेकिन रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण यह हाजीपीर दर्रा पाकिस्तान के कब्जे में है और यह कश्मीर घाटी में आतंकवादियों के घुसपैठ का मुख्य रास्ता बन चुका है। अगर यह दर्रा भारत के पास होता तो इससे पुंछ और उरी के बीच सड़क की दूरी 282 किलोमीटर से घटकर 56 किलोमीटर हो जाती। इससे जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होती। इससे सेना की रसद आपूर्ति और कारोबार में भी सुधार होता। विभाजन से पहले उत्तर कश्मीर यानी जम्मू घाटी को दक्षिण कश्मीर यानी मुख्य कश्मीर घाटी से जोड़ने वाली सड़क हाजी पीर से होकर गुजरती थी। लेकिन 1948 में पाकिस्तान ने PoK पर कब्जा कर लिया, जिसमें हाजी पीर दर्रा भी शामिल था। इससे यह रास्ता भारत के हाथ से निकल गया। लेकिन वक्त अब फिर से हमारे पक्ष में करवटें ले रहा है। पाकिस्तान इस वक्त भारी दबाव में है। 24 बेगुनाह भारतीयों का खून उसके सिर पर है। वह इन बेगुनाह मौतों की कराह से बच नहीं सकता। उसे इसी फानी दुनिया में इन मासूम बेगुनाहों के खून का जवाब देना पड़ेगा।
 

पाकिस्तान ने भारत को हथियार थमा दिया है

पाकिस्तान शिमला समझौते को स्थगित करने का ऐलान करके सिंधु जल समझौते को भारत द्वारा स्थगित करने का जवाब देना चाहता था। लेकिन ऐसा करके वह अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार चुका है। क्योंकि शिमला समझौते की बुनियाद ही इस बात पर है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने वाली लाइन ऑफ कंट्रोल का सम्मान करेंगे और किसी भी विवाद की स्थिति में एलओसी का उल्लंघन नहीं करेंगे। लेकिन अब पाकिस्तान ने शिमला समझौते को स्थगित करके भारत को बहाना दे दिया है कि जब शिमला समझौता रहा ही नहीं, तो लाइन ऑफ कंट्रोल कैसी? LOC के उस पार का हिस्सा भी तो कश्मीर ही है। जिसे वापस लेने की कसमें भारतीय संसद में खाई जा चुकी हैं। रही बात पाकिस्तानी सेना की, तो उसे चार बार भारत पटखनी दे चुका है, एक बार और सही।

बुरी तरह डरा हुआ है पाकिस्तान
पाकिस्तान को पहलगाम हमले के बाद भारतीयों की प्रतिक्रिया देखकर डर लगने लगा है। उसने अपनी फौज को अलर्ट पर कर दिया है।  मंगलवार 22 मार्च को हमले के दिन कुछ घंटे बाद से ही पाकिस्तान के एयरस्पेस में पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों की असामान्य गतिविधि देखी गई थी। इसके साथ ही भारतीय सीमा के पास अवॉक्स विमान उड़ाने के बारे में भी जानकारी मिली थी।  पाकिस्तानी सेना भारत से लगी सीमा के पास भारी मात्रा में हथियार जमा कर रही है। पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी बॉर्डर के पास बढ़ाई जा रही है। भारतीय सीमा पर  दो अतिरिक्त रेजीमेंटों को और तैनात किया है। इसके साथ ही भारी मात्रा में हथियार भी पहुंचाए जा रहे हैं। इनमें टैंक और बख्तरबंद वाहन शामिल है।  पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमान नूर खान एयर बेस, चकला - रावलपिंडी के निकट कम ऊंचाई पर उड़ानें (अभ्यास) कर रहे हैं। 24 अप्रैल को पाकिस्तान आर्मी की 15 डिवीजन (सियालकोट) और 37 डिवीजन (खारियान) की मूवमेंट के बारे में जानकारी मिली है। पाकिस्तानी सेना की यह गतिविधियां बताती हैं कि उसने गुनाह तो कर दिया है, लेकिन अब उसे ढंकना पाकिस्तानियों को भारी पड़ रहा है।
 

पाकिस्तान ऐतिहासिक रुप से बुरी हालत में
पाकिस्तान की स्थिति अभी जितनी बुरी है उतनी इतिहास में कभी नहीं रही। अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन से उसका टकराव जारी है। बलोच लिबरेशन आर्मी और तहरीके तालिबान पाकिस्तान जैसे अतिवादी संगठनों ने पाकिस्तानी फौज की नाक में दम कर रखा है।  पाकिस्तान के अंदरुनी हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि अज्ञात स्थानों से आए अज्ञात लोग पता नहीं कब पाकिस्तान की सीमा में शरण लिए हुए आतंकी आकाओं को ढेर करके चले जाते हैं, किसी को पता ही नहीं चलता।

ऐसे में एक परिस्थिति की कल्पना करिए कि पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर बलोचिस्तान की मुक्ति फौज के सिपाही पूरी ताकत से पाकिस्तानी फौज पर हमला कर दें। अफगान तालिबान अपने उपर हुए जुल्मों-सितम का  बदला लेने के लिए पाकिस्तान की सीमा पर गोलीबारी शुरु कर दे। पाकिस्तान के हर हिस्से में मौजूद तहरीके तालिबान पाकिस्तान के अतिवादी अचानक बम विस्फोट करने लगें।

पाकिस्तान में बैठे अज्ञात हमलावर वहां के महत्वपूर्ण नीति नियंताओं को निशाना बनाना शुरु कर दें। रातों रात बड़े आतंकी, सैन्य अधिकारी और नेता मार दिए जाएं। लाहौर, कराची, इस्लामाबाद, कहूटा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर बम विस्फोट होने लगे।

तो ऐसे हालात में पाकिस्तान अपने पश्चिमी मोर्चे को संभालेगा या फिर जबरदस्ती कब्जे में किए हुए कश्मीर की रक्षा करने आएगा। क्योंकि गुलाम कश्मीर की जनता लगातार पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में जुटी हुई है।

पाकिस्तान की बर्बादी का पहला चरण सिंधु जल समझौते को स्थगित करने से शुरु हो चुका है। जल्दी ही POK को आजाद करवा के उसकी  बर्बादी का काम पूरा किए जाने की जरुरत है। तभी पहलगाम में मारे गए मासूमों को इंसाफ मिलेगा।





अंशुमान आनंद

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