कांग्रेस पार्टी के मालिक राहुल गांधी लोकसभा में सबसे बड़ी विरोधी पार्टी के नेता होने के कारण विपक्ष के नेता तो बन गए पर वे विपक्ष की भूमिका निभाने में कमजोर ही नहीं माईनस दिखाई दे रहे हैं। विपक्ष का काम सत्ताधारी पार्टी की कमियां और जनता की परेशानियों को पटल पर लाना होता है, सरकार की गलतियों को पकड़ कर उन पर बहस करने का होता है। राहुल गांधी के खाते में एक भी ऐसा मुद्दा, बहस, जन प्रदर्शन नहीं है जो जनता से जुड़ा हुआ हो। सरकार कितनी भी चुस्त, क्रियाशील, समझदार, ईमानदार हो पर काम करने में या क्रियान्वन स्तर पर गलतियां हो सकती हैं। राहुल को जनता की समस्यायों से कोई लेना देना नहीं। बहस में उनके आचार व्यवहार से और बयानबाजी से ऐसा लगता है जैसे कोई बच्चा किसी रट या जिद पर अड़ जाता हो। राहुल गांधी की सोच, घड़ी की सुईयांे की तरह एक ही जगह पर अटकी हुई है। 24 घंटे अम्बानी-अडानी की रट लगाये रहते हैं। अम्बानी-अडानी की तरह के और भी दर्जनों उद्योगपति हैं पर उन्हें केवल यही उद्योगपति खराब नजर आते हैं। इन उद्योगपतियों की प्रधानमंत्री से नजदीकियां हों या न हों पर उनके प्रधानमंत्री के करीब होने का आभास ही राहुल की समस्या है। सवाल ये है कि उनकी गड़बड़ियां उजागर करते, उनकी बेईमानी, जनता को धोखा या सरकार को लगायी जाने वाली कोई आर्थिक चपत के प्रमाण ला कर संसद में उस पर चर्चा करते तो लोगों को लगता कि आप कोई पते की बात कह रहे हैं।
राहुल गांधी महीने में एक दो बार यह जरूर कहते हैं, जताते रहते हैं कि मैं मोदी से नहीं डरता “ राहुल ने कोई प्रमाण नहीं दिये कि मोदी ने उन्हें कब डराया, धमकी दी या किसी से धमकी दिलवायी। मोदी के खिलाफ कोई FIR दर्ज करवायी होती कि मोदी आपको डराता है। हो सकता है राहुल ने ऐसा कोई काम किया हो जिससे उन्हें पकड़े जाने का अंदेशा हो।” इसलिये ये बात कहते रहते ताकि जब पकड़े जाये तो कह सकें कि हम मोदी से नहीं डरते, उन्हें चैलेंज देते रहते हैं इसलिये हमारे ऊपर केस बना दिया और जेल भेज दिया। जहां तक डर का सवाल है दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी इसी तरह बोलते थे शायद उन्हें भी अपने भ्रष्ट आचरण के कारण पकड़े जाने का खतरा था। जनता ने उन्हें खुद ही निबटा दिया।
ऐसा अहंकार बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी हो गया। बात-बात में मोदी के खिलाफ बोलना, राज्यपाल से पंगा लेना और केन्द्र सरकार के अफसरों से बदतमीजी करना यहां तक कि बांग्लादेश सीमा पर आर्मी कोे फेंस नहीं लगाने देना जैसा घटियापन उनकी राजनीति का हिस्सा है। आखिर सुप्रीम कोर्ट से दोनों ही बातों में ममता के खिलाफ आदेश आया। नेशनल हेराल्ड प्रकरण में राहुल गांधी पर भ्रष्टता का आरोप है। फैसला तो सुप्रीम कोर्ट करेगा, फिलहाल वे जमानत पर हैं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल जो कांग्रेस के नेता रहे, ने चिल्ला-चिल्ला कर कहा था, संसद में भी बोला था कि मुसलमान किसी से नहीं डरता। उसके कुछ ही महीनों बाद अपनी बात पलटते हुवे बोले कि मुसलमान डरा हुआ है। उनकी कौन सी बात सच है वो ही जानते होगें।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री केन्द्रीय मंत्री हेमबतीनंदन बहुगुणा के पुत्र विजय बहुगुणा कांग्रेस छोड़ कर चले गये। यदि राहुल गांधी चाहते तो उन्हें रोका जा सकता था अगर वो कांग्रेस में होते तो कांग्रेस की ये दुर्दशा उत्तराखण्ड में नहीं होती।
कांग्रेस के वरिष्ठतम नेता गण जो संगठन में हाईकमान के सदस्य और केन्द्र में मंत्री रह चुके हैं की टिप्पणियां राहुल गांधी के बारे में जरा गौर कीजिये।
-गुलाम नबी आजाद
“व्यक्तिगत पसंद के कारण अपने आदमी को आसाम का मुख्यमंत्री बनाने के लिये राहुल गांधी ने डाॅ0 हिमन्ता बिस्बा शर्मा को मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया। नतीजा सत्ता तो खोयी पर साथ ही आसाम में पार्टी भी खो दी। जबकि सोनिया गांधी उन्हें बनानें को तैयार थी। आजाद ने कहा कि राहुल गांधी के बस की बात नहीं है राजनीति” ये उनसे नहीं होगा
-मणि शंकर अय्यर पूर्व केन्द्रीय मंत्री
राहुल गांधी को विरोधी गठबंधन यूपीए का नेतृत्व छोड़ कर ममता बनर्जी को देना चाहिये। यहां तक कि तेजस्वी यादव को उनसे बेहतर नेता बताया यानि राहुल नेता विरोधी दल बनने के भी लायक नहीं हैं।
-शकील अहमद पूर्व केन्द्रीय मंत्री
राहुल गांधी वरिष्ठ नेताओं के साथ सहज नहीं रहते हैं। राहुल से अधिकांश वरिष्ठ कांग्रेसी दुखी हैं। राहुल गांधी सबसे डरपोक और असुरक्षित नेता हैं। कांग्रेस पार्टी हमारे ऊपर हमला करवा सकती है।
-ज्योतिरादित्य सिंधिया पूर्व कांग्रेसी केन्द्रीय मंत्री
पूर्व केन्द्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया के पुत्र कांग्रेस शासन में केन्द्रीय मंत्री रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को राहुल गांधी के कारण कांग्रेस छोड़ने पर मजबूर हुये। मध्य प्रदेश से भी कांग्रेस की सत्ता चली गयी जिसका महत्वपूर्ण कारण था राहुल का दिग्विजय सिंह के हाथों में खेलना।
-विजय बहुगुणा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री
अकेले उत्तर प्रदेश में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष, यूपी की पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ. रीता बहुगुणा जोशी, पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के राजनैतिक सचिव, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रहे जितेन्द्र प्रसाद के पुत्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री जतिन प्रसाद पार्टी छोड़ कर चले गये। प्रदेश में मंत्री रहे एवं पूर्व राज्यपाल सी पी एन सिंह के पुत्र केन्द्रीय मंत्री रहे आर पी सिंह ने भी पार्टी छोड़ दी। इन लोगांे को राहुल गांधी के नेतृत्व में विश्वास नहीं जम सका। स्वतंत्रता सेनानी पूर्व विधायक रमानाथ खैरा के पुत्र डाॅक्टर्स प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक एआईसीसी सदस्य रहे लेखक ने उनसे पहले ही राहुल गांधी को कमजोर और दिशाविहीन नेता बता कर पार्टी छोड़ दी। भाजपा प्रवक्ता रहते हुये लेखक का टीवी डिबेट में बयान “राहुल गांधी कांग्रेस को माइनस करते जा रहे थे अब प्रियंका गांधी के आने से पार्टी डबल माइनस हो गयी है।” इस तरह देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण प्रदेश में सोनिया गांधी के समय में बची बचायी कांग्रेस का सफाया राहुल ने कर दिया। भले कुछ सीटंे समाजवादी पार्टी की गोदी में बैठ कर मिल गयी हो। इस तरह बड़े-बड़े असरदार वरिष्ठ नेता जिन्होंने अपना सारा जीवन कांग्रेस में लगा दिया एक एक करके कांग्रेस छोड़कर चले जा रहे हैं। इन सभी को राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं था। बहुत से लोग उनके अहंकारी व्यवहार से भी तंग आ गये।
कद्दावर नेता पार्टी छोड़ते गये अब राहुल दूसरे तीसरे-चौथे दर्जे के नेताओं से अपनी पार्टी चला रहे हैं। बेपरवाह होकर अहंकार के मद में पार्टी का सत्यानाश दिनांे दिन करते जा रहे। सभी अन्य संगठन महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस एनएसयूआई सेवा दल आदि पहले से ही समाप्त हो चुके हैं। प्रधानमंत्री बननें की योग्यता रखना अलग बात है और मुंगेरी लाल के सपने देखना अलग बात है।

डाॅ. विजय खैरा
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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