logo

क्या भूकंप के टाइम बम पर खड़ा है भारत ?

Is India standing on an earthquake time bomb?

प्राकृतिक आपदाएं तो कई प्रकार की होती हैं पर कुछ प्राकृतिक आपदाएं जहन में चोट कर जाती हैं। दुनिया में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को लेकर वैज्ञानिकों की ओर से चेतावनी दी जाती है। चाहे वो भूस्खलन, भारी बारिश, चक्रवात, सुनामी या फिर भूकंप ही क्यों ना हो।  इस बार उन्होंने भारत के भूगर्भीय भविष्य को लेकर एक बेहद चिंताजनक अलर्ट जारी किया है। भू वैज्ञानिकों ने संकेत दिया है कि लगातार कुछ समय से भारतीय प्लेट अब दो हिस्सों में बंटने की प्रक्रिया से गुजर रही है और यह घटनाक्रम देश में आने वाले समय में भूकंपों की संभावना को बढ़ा सकता है। अमेरिका के जियोफिजिकल यूनियन में प्रकाशित एक शोध में इस स्थिति को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई है।  जिसमें सीधे और साफ तौर पर यह बताया गया है कि भारतीय प्लेट अब एक नई भूगर्भीय प्रक्रिया से गुजर रही है, जिसे "डेलिमिनेशन" कहा जाता है।  डेलिमिनेशन एक भूगर्भीय प्रक्रिया है, जिसमें टेक्टोनिक प्लेट का निचला हिस्सा पृथ्वी के मेंटल में समा जाता है। इस दौरान प्लेट के अंदर बड़ी दरार उत्पन्न होती हैं, जिससे उसकी स्थिरता प्रभावित हो सकती है। यह प्रक्रिया प्लेटों की संरचना को बदल सकती है और उस इलाके में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना को बढ़ा सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भारतीय प्लेट, जो पिछले 60 मिलियन वर्षों से यूरेशियन प्लेट से टकरा रही थी, अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।

बीते कुछ दिनों में भूकंप की कई खबरें सामने आई हैं। जिसमें भारत के आस पास के देशों और खुद भारत में भी भूकंप के झटकों की खबरें सामने आई हैं जो चिंता का विषय है और सोचने पर मजबूर कर रहा है।  पूर्व माह यानी कि  28 मार्च  को म्यांमार में 7.7 की तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें अब तक कम से कम 2,719 लोग मारे गए। भूकंप से म्यांमार के पड़ोसी थाईलैंड में भी 17 लोगों की मौत हो गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, म्यांमार में आए भूकंप से निकली ऊर्जा 300 से ज्यादा परमाणु बमों के बराबर थी। इस भूकंप से इनवा ब्रिज ढह गया, कई बड़ी-बड़ी इमारतें जमींदोज हो गईं और कई परिवार ज़िंदा दफ़न हो गए। इन सभी घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी के साथ वायरल भी हुए थे, जिनसे कोई भी अछूता नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह भूकंप सागाइंग लाइन के साथ एक स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट के कारण आया था, जो पृथ्वी के बदलते प्रकोप की एक क्रूर याद दिलाता है। म्यांमार के बाद जापान ने भी चेतावनी दी है कि वहां जल्द ही एक बहुत बड़ा भूकंप आ सकता है, लेकिन यह खतरा सिर्फ म्यांमार या जापान तक ही सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन देशों के साथ ही भारत में भी भूकंप के गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सवाल यह नहीं है कि क्या ऐसी आपदा भारत में भी आएगी, बल्कि सवाल यह है कि कब आएगी। दशकों से, वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि भारत में 8 या उससे ज्यादा की तीव्रता का भूकंप आ सकता है जो उत्तरी भारत को तहस-नहस कर सकता है। इसके संकेत पहले से ही मिल रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक आने वाले तेज भूकंप के झटके बड़ी तबाही ला सकते हैं। भारत हर शताब्दी में तिब्बत के दक्षिणी किनारे से 2 मीटर नीचे खिसक जाता है। दुर्भाग्य से, इसका उत्तरी किनारा आसानी से खिसकता नहीं है, बल्कि सैकड़ों वर्षों तक घर्षण द्वारा लटका रहता है और जब यह घर्षण दूर हो जाता है, तो कुछ ही मिनटों में वापस आ जाता है। फिसलन की घटनाएं, जिन्हें हम भूकंप कहते हैं, इसी गति का परिणाम होते हैं। कुछ सौ वर्षों में हिमालय पर आठ की तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। लेकिन पिछले 70 वर्षों से इतना बड़ा भूकंप नहीं आया है।  तो जिस हिसाब से भारत के आस पास के देशों और खुद भारत के कुछ राज्यों में भूकंप की घटनाएं देखने को मिली है उनको देखा जाए तो ऐसा हो सकता है कि आने वाले दिनों में भारत में बड़ी तीव्रता का और बड़ा भूकंप आ सकता है। जो बड़ी तबाही का द्योतक हो सकता है। इस बात को गंभीरता से देखना होगा ना कि इसे हल्के में जाने देना।



भारत में भूकंप से कहां-कहां मच सकती है तबाही-

विगत एक साल में भारत में 1000 से अधिक छोटे-बड़े भूकंप के झटके आए हैं। इस कड़ी में भारत में  नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच में कुल 159 भूकंप आ चुके हैं। वहीं वर्ष 2024 में विश्व भर में कुल 14 हजार से अधिक भूकंप के झटके आए हैं। इन आंकड़ों को देखकर यह कहा जा सकता है कि भारत का आधे से ज़्यादा हिस्सा यानी लगभग 59% हिस्सा भूकंप के प्रति संवेदनशील है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड,  दिल्ली, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और  पूरा पूर्वोत्तर राज्य भूकंप के डेंजर जोन में हैं और यह सिर्फ़ दूरदराज के शहरों तक ही सीमित नहीं है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहर भी  खतरनाक फॉल्ट लाइनों पर बने हैं, जिसमें से दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र IV में आती है। ऐसे में अगर दिन के समय कोई बड़ा भूकंप आता है, तो काफी लोगों की जान जाने का खतरा है। तो ऐसे में उत्तर भारत के अधिकतर राज्य भूकंप के जोन में हैं और अगर अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो इसका काफी बूरा असर देखने को मिल सकता है। 

30 करोड़ से अधिक लोग हो सकते हैं प्रभावित

भारत में, इमारतें अक्सर भूकंप से ज़्यादा जानलेवा हो सकती हैं। भूकंप-रोधी निर्माण नियम को अक्सर अनदेखा किया जाता है। बिल्डिंग के अलावा अस्पताल, स्कूल, बिजली संयंत्र, जैसी जगहों को भी भूकंप से बचने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है। जब धरती हिलती है, तो सबसे पहले बड़ी इमारतें ही गिरती हैं। 2001 में भुज में आए भूकंप से गुजरात को लगभग 10 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। 2015 में नेपाल में आए भूकंप ने उत्तर भारत के कई हिस्सों को तबाह कर दिया था, जिससे 7 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। फिर भी इससे सबक नहीं लिया गया है। ऐसे में अगर इस बार भारत में भूकंप आता है औऱ उसकी तीव्रता अधिक होती है, तो लगभग 30 करोड़ लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं।  भूकंप से बचने के लिए भारत ने अब तक ऐसी कोई तैयारी नहीं की है। जिससे यह कहा जा सके कि अगर कोई ऐसी अप्रिय घटना घटित होती है तो भारत उसका सामना करने को तैयार है।  भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के पास भूकंप-रोधी कोड हैं - लेकिन अक्सर उनकी अनदेखी की जाती है। भूकंप रोधी कोडों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त कानूनी एक्शन लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही लोगों को भूकंप से बचाव के लिए तैयार करना चाहिए। भारत में कई पुरानी इमारतें हैं जो भूकंप के लिहाज से काफी खतरनाक हैं। उन्हें फिर से तैयार करना बहुत ज़रूरी है। पुलों और सार्वजनिक इमारतों जैसे बुनियादी ढांचे को भी पहले से ही मजबूत किया जाना चाहिए, भूकंप आने के बाद नहीं। हमें शहरों में लोगों के सुरक्षित रूप से बाहर निकलने के लिए निर्दिष्ट खुली जगहों की भी ज़रूरत है। स्कूलों में बच्चों को भूकंप से सुरक्षा के बारे में सिखाना चाहिए। कार्यालयों और अपार्टमेंट में भूकंप से बचाव के लिए नियमित अभ्यास होना चाहिए। हर घर में भूकंप से बचने के लिए आपातकालीन चीजें होनी चाहिए।

वैज्ञानिकों के मुताबिक जब हिमालय में भूकंप आएगा, तो वह समुद्र में नहीं, बल्कि ज़मीन पर आएगा, जो इस बात को और भी घातक बनाती है। भूकंप हमें कितना नुकसान पहुंचाएगा इसका किसी भी तरह से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों के रिसर्च और शोध की मानें तो जो चेतावनी उन सभी के द्वारा भारत को दी गई है उसके हिसाब से  "भविष्य में आने वाला एक बड़ा हिमालयी भूकंप 8.2 और 8.9 के बीच की तीव्रता वाला और अभूतपूर्व होगा।  क्योंकि हिमालय दुनिया में एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां ज़मीन पर इतना बड़ा भूकंप आ सकता है, जिससे लगभग 300 मिलियन लोग यानी कि 30 करोड़ से अधिक लोग लंबे समय तक हिंसक झटकों के संपर्क में रहेंगे। तटीय सुनामी के विपरीत, इस तरह का जमीनी भूकंप भारत की आबादी और आर्थिक केंद्रों पर हमला करेगा। इससे होने वाली क्षति भयावह हो सकती है। इसका उदाहरण म्यांमार में हुई त्रासदी है जो भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी है। भारत के पास तैयारी करने के लिए विज्ञान, विशेषज्ञता और इंजीनियरिंग का ज्ञान है। लेकिन जो कमी है, वह है कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति। अगला बड़ा भूकंप आना ही है। लेकिन बड़े पैमाने पर हताहतों की संख्या कितनी होगी कहा नहीं जा सकता है। इसलिए भूकंप से मुकाबला करने के लिए, उससे बचाव के लिए अब तैयार होने का समय आ गया है। जैसा कि कोविड के समय पर देखा गया था। भारत के त्वरित प्लान और एक्शन के कारण कोविड के दौरान सबसे कम असर भारत पर हुआ। ऐसे में भारत को इस आगामी गंभीर समस्या को भी गंभीरता से लेना होगा और इसको लेकर सतर्कता बरतनी होगी।






सात्विक उपाध्याय
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

Leave Your Comment

 

 

Top