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भारतीय स्टार्टअप का अंतरिक्ष में परचम

Indian startup's flag in space

दुनिया आधुनिक होती जा रही है और मानव उस आधुनिकता को तेजी के साथ अपनाते जा रहा है। समय के मायने और भी अधिक बढ़ गये हैं। लोग नए तथा रोचक पहलुओं पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। इसी का जीता जागता उदाहरण इस समय में स्टार्टअप है। जो कि सभी वर्गों ओर विश्व के सभी तबके को लोगों को अपनी ओर तेजी के साथ आकर्षित कर रहा है। लोग उच्च जीवन शैली के लिए स्टार्टअप पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस विषय को लेकर दुनिया की लगभग सभी सरकारें भी मदद कर रही हैं। हाल ही में भारत में एक स्टार्टअप कंपनी के द्वारा ऐसा कारनामा किया गया है कि इसके चर्चे पूरे विश्व में हैं। निजी अंतरिक्ष कंपनी अग्निकुल कॉसमोस ने धरती से आसमान का सफर तय किया है, या यूं कहें तो स्पेस में भारत का परचम लहराया है। अंतरिक्ष स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस ने सफलतापूर्वक 30 मई को अपने पहले रॉकेट की उड़ान का परीक्षण किया। हालांकि अग्निकुल कॉसमॉस द्वारा अग्निबाण का परीक्षण पहले किया जाना था, परन्तु कुछ तकनीकी कारणों से लॉन्चिंग को 2 बार टाल दिया गया। लेकिन सभी कठिनाइयों के परे इसका परीक्षण किया गया और वह सफल भी रहा। परीक्षण के सफल होने के बाद निजी कंपनियों और अंतरिक्ष विभाग के बीच ब्रिज का काम करने वाले इनस्पेस ने कंपनी की तरफ से यह जानकारी साझा की और बताया कि अग्निकुल के रॉकेट अग्निबाण का सफलतापूर्वक 30 मई को परीक्षण किया गया।  अग्निबाण का सफल परीक्षण भारत का सभी मायनों में मजबूत होना दर्शाता है। स्टार्टअप तो कई प्रकार के होते हैं, पर उन स्टार्टअप में कुछ ऐसे होते हैं जो कुछ अलग करने की सोचते हैं। अग्निकुल कॉसमॉस उसका बेहतरीन नमूना है और उसके किया भी कुछ ऐसा ही। अग्निबाण का सफल परीक्षण भारत के लिए अंतरिक्ष में एक नये द्वारा का होना दर्शाता है।

 

अग्निबाण रॉकेट की खास बातें

अग्निबाण की खासियत यह है कि इसका सेमी-क्रायोजेनिक इंजन पूरी तरह से 3-डी प्रिंटेड है। इंजन में कोई भी घटक या मूविंग पार्ट नहीं है। इसमें कोई जोड़ नहीं है, कोई वेल्डिंग नहीं है और कोई फ्यूजिंग नहीं है। यह हार्डवेयर का एक चिकना सिंगल पीस है। स्पेस हार्डवेयर में 3-डी प्रिंटिंग का इस्तेमाल कोई नया विचार नहीं है। लेकिन किसी ने भी 3-डी प्रिंटेड पूरे इंजन का इस्तेमाल नहीं किया है। 3-डी प्रिंटिंग से कार्यकुशलता बढ़ सकती है, लागत कम हो सकती है और कुछ गलत होने की संभावना कम हो सकती है। एक इंजन में जो कई गतिशील बिंदुओं का संयोजन होता है, प्रत्येक जोड़ या वायरिंग त्रुटि का संभावित स्रोत होता है। अग्निबाण का इंजन, जिसका नाम अग्निलेट है, पूरी तरह से इन-हाउस डेवलपमेंट है।

अग्निकुल कॉसमॉस का अग्निबाण रॉकेट दो चरणों वाला रॉकेट है। यह रॉकेट 700 किमी की ऊंचाई और 300 िकलोग्राम तक का पेलोड को ले जाने में सक्षम है। बता दें कि इससे पहले साल 2022 में स्काईरूट कंपनी ने भारत के पहले प्राइवेट रॉकेट को इसरो के प्रक्षेपण स्थल से लॉन्च किया था।

अग्निकुल की स्थापना 2017 में श्रीनाथ रविचंद्रन, मोइन एसपीएम और आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर एसआर चक्रवर्ती द्वारा की गई थी। दिसंबर 2020 में यह भारत की पहली ऐसी कंपनी बनी जिसने इसरो के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन-स्पेस पहल के तहत हुए इस एडवांस समझौते ने अग्निकुल को इसरो की विशेषज्ञता और अत्याधुनिक सुविधाओं तक अभूतपूर्व पहुंच प्रदान की। यह कंपनी भारत के सबसे अधिक फंडेड अंतरिक्ष स्टार्टअप में से एक है और अब तक 42 मिलियन डॉलर जुटा चुकी है।

निजी स्वामित्व वाले लॉन्च पैड से प्रक्षेपण गर्व की बात
अग्निबाण को निजी स्वामित्व वाले लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाना भारत के लिए पहली बार है और साथ ही गर्व की बात है। अब तक, सभी अंतरिक्ष प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा में दो इसरो लॉन्च पैड में से एक से किए गए थे। लेकिन अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की संख्या में तेज वृद्धि की संभावना को देखते हुए, इसरो तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के कुलसेकरपट्टिनम में एक दूसरा अंतरिक्ष बंदरगाह विकसित करने की प्रक्रिया में है । इसका उपयोग मुख्य रूप से SSLV लॉन्च के लिए किया जाना है।

अग्निकुल का खुद का लांच पैड
अग्निकुल नामक कंपनी ने इसरो की मदद से श्रीहरिकोटा रेंज के अंदर अपना खुद का लॉन्च पैड बनाया है। यह इसरो की बहुत सारी सुविधाओं का उपयोग करता है, लेकिन अलग लॉन्च पैड इसे जब चाहे तब अपने लॉन्च शेड्यूल करने की सुविधा देता है। अग्निकुल को उम्मीद है कि वह हर साल अपने अग्निबाण रॉकेट के 35 से 40 लॉन्च कर सकेगा। अग्निकुल के रचनात्मक नाम अग्निबाण रॉकेट की पहली उड़ान स्काईरूट की सफलता पर आधारित है और भारत के अंतरिक्ष बाजार में खुलने वाले विकल्पों की श्रृंखला का संकेत देती है। वर्ष 2022 में भी भारत की एक स्टार्टअप कंपनी के द्वारा विक्रम नामक रॉकेट का सफल परीक्षण किया गया था। जो भारत के लिए काफी गर्व की बात थी। लेकिन अब इस सूची में बढ़ोतरी होना भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। अग्निकुल और स्काईरूट दोनों ही अंतरिक्ष स्टार्टअप कंपनी को इस बात की उम्मीद है कि वे एक साल के भीतर अपने रॉकेट पर वाणिज्यिक उपग्रहों को लॉन्च करना शुरू कर देंगे।

 अग्निकुल कॉसमॉस कंपनी का यह भी दावा है कि उसे ख़रीदारों की इच्छाओं के अनुसार डिज़ाइन किया जा सकता है। पहले चरण में चार से सात इंजन हो सकते हैं और फिर ज़रूरत के हिसाब से दूसरे चरण के लिए छोटा इंजन भी इसमें शामिल हो सकता है। रॉकेट को अभी 10 से अधिक स्थानों से और भविष्य में 25 से अधिक जगहों से लॉन्च करने की योजना है।

निजी स्वामित्व वाले लॉन्च पैड से प्रक्षेपण गर्व की बात

अग्निबाण को निजी स्वामित्व वाले लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाना भारत के लिए पहली बार है और साथ ही गर्व की बात है। अब तक, सभी अंतरिक्ष प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा में दो इसरो लॉन्च पैड में से एक से किए गए थे। लेकिन अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की संख्या में तेज वृद्धि की संभावना को देखते हुए, इसरो तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के कुलसेकरपट्टिनम में एक दूसरा अंतरिक्ष बंदरगाह विकसित करने की प्रक्रिया में है । इसका उपयोग मुख्य रूप से SSLV लॉन्च के लिए किया जाना है।

 

 

सात्विक उपाध्याय

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