नई दिल्ली: भारत का पड़ोसी देश चीन तिब्बत क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक विशाल बांध का निर्माण करने जा रहा है। चीन की इस योजना को लेकर भारत भी पूरी तरह से सतर्क है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ये बयान दिया है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में शामिल होते हुए कहा कि भारत सरकार इस मामले को लेकर सतर्क है। राजनाथ सिंह ने आगे कहा- ‘‘पहले जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलता था तो लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन अब जब भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है।’’
ब्रह्मपुत्र नदी इसलिए भी अहम है क्योंकि ये नदी तिब्बत से निकलकर भारत होते हुए बांग्लादेश जाती है। यह दुनिया की 15वीं सबसे लंबी नदी है।
भारत ने क्या कहा?
चीन की ओर से ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने की घोषणा के बाद भारत की ओर से बयान जारी किया गया है। भारत ने कहा है कि वह इस मामले में अपने हितों की रक्षा के लिए निगरानी जारी रखेगा और आवश्यक कदम उठाएगा। जानकारी के मुताबिक, भारत ने चीन से ये सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि ब्रह्मपुत्र के ऊपरी इलाकों में होने वाली गतिविधियों से निचले बहाव वाले इलाकों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे।
दूसरी ओर ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध के मामले में चीन का कहना है कि बांध की प्रस्तावित परियोजना गहन वैज्ञानिक सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। इससे नदी प्रवाह के निचले इलाकों में स्थित भारत और बांग्लादेश पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें कि ब्रह्मपुत्र नदी पर इस बांध का नाम 'यारलुंग जांगबो' होने जा रहा है। बांध में करीब 137 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की लागत लग सकती है।
(इनपुट: भाषा)
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