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चुनौतीपूर्ण दुनिया में भारत की ताकत है उसकी एकता

India in a challenging world  The strength of is its unity

भारत की एकता उसके इतिहास की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। महात्मा गांधी और अनगिनत गुमनाम नायकों के नेतृत्व में प्रेरक स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 21वीं सदी में देश के वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने तक, भारत ने लगातार विजय प्राप्त की है, क्योंकि भारतवासी अपने साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक साथ उठ खड़े होते हैं। फिर भी, जैसे-जैसे राष्ट्र में आधुनिक जीवन शैली की जटिलताएं आ रही है, उसे एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करना पड़ रहा है: वह है लगातार चलाए जा रहे विभाजनकारी आख्यानों के विरुद्ध अपनी एकता की रक्षा करना, जो इसकी मूल ताकत को कमजोर करने की धमकी देती है। चाहे राजनीतिक, सांस्कृतिक हो या आर्थिक क्षेत्र, भारत की उपलब्धि विविधता को अपनाने और सामूहिक रूप से काम करने की क्षमता में निहित हैं। देश का स्वाधीनता संग्राम इसका एक ज्वलंत उदाहरण है, जब अलग-अलग पृष्ठभूमि और विचारधाराओं के लोग औपनिवेशिक उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट हुए। ऐसे अनेक उदाहरण हैं- जैसे हरित क्रांति, 1990 के दशक के आर्थिक सुधार और रक्षा क्षेत्र, आर्थिक के साथ चंद्रयान और गगनयान मिशन जैसे अंतरिक्ष संबंधित क्षेत्रों में हाल की प्रगति, यह बताती है कि एकजुट होकर भारत कितना कुछ हासिल कर सकता है। यह एकता "वसुधैव कुटुंबकम" (दुनिया एक परिवार है) के दर्शन में समाहित है। जो अलग अलग राष्ट्रीयताओं के  बीच एक पुल निर्मित करने की भारत की भूमिका को दर्शाती है। हालाँकि, बार बार की विभाजनकारी बयानबाजी इस भावना के लिए एक गंभीर खतरा है। आज एक चिंताजनक प्रवृत्ति उन आख्यानों का उदय है जो भारत को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकृत रोशनी में चित्रित करने की कोशिश करते हैं। हालांकि रचनात्मक आलोचना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए आवश्यक है। लेकिन अतिशयोक्ति और गलत सूचनाएं विभिन्न समुदायों में दरार डालने और सामाजिक ताने-बाने तो नष्ट करने का जोखिम पैदा कर रही हैं। राजनीतिक और वैचारिक उद्देश्यों से प्रेरित ऐसे आख्यान स्वयं को दिए हुए घाव के रुप में कार्य करते हैं, जो वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति और इसकी आंतरिक एकता को कमजोर करते हैं।

ये आख्यान हम भारतीयों के लचीलेपन, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और शासन जैसे क्षेत्रों में राष्ट्र द्वारा की जा रही महत्वपूर्ण प्रगति को नकारते हुए एक नकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करने की लगातार कोशिश करते हैं। यह प्रयास राष्ट्रीय गौरव को बाधित करने के लिए किया जाता है । इसका उद्देश्य देश की प्रगति के लिए आवश्यक सामूहिकता की भावना को कमजोर करना है। भारत की विविधता एक दायित्व नहीं बल्कि एक ताकत है। इसकी असंख्य भाषाएँ, धर्म, परंपराएँ और संस्कृतियाँ एक अनोखी पच्चीकारी का निर्माण करती है जिससे दुनिया ईर्ष्या करती है। इस विविधता को सम्मान और सद्भाव के साथ अपनाना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। एक अखंड भारत: स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है। राष्ट्र को बाहरी खतरों से बचाता है। भू-राजनीतिक चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला करता है। रचनात्मकता और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। विभाजन को पाटता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में सक्षम एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की छवि को मजबूत करता है। लेकिन इस एकता को कायम रखने की जिम्मेदारी हमारी-आपकी सबकी है। नीति निर्माताओं और शिक्षकों से लेकर मीडिया और नागरिक समाज तक, प्रत्येक भारतीय को संकीर्ण हितों को परे रखकर राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देनी चाहिए। भारत की उपलब्धियों का जश्न मनाना, जानकारीपूर्ण बहस को बढ़ावा देना और साझा लक्ष्यों पर जोर देना विभाजनकारी प्रवृत्तियों का प्रतिउत्तर हो सकता है। भारत एक स्वाभाविक तौर पर वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रुप में उभर रहा है। उसे आंतरिक कलह को निर्मूल करना होगा और सामूहिक प्रगति के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करनी होगी। अब कार्य करने का समय आ गया है - एकजुट होकर हम मजबूती से खड़े होते हैं, और विभाजित होते ही ध्वस्त हो जाते हैं। स्वामी विवेकानन्द के शब्दों में कहा जाए तो: "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।" शांति, प्रगति और समृद्धि के साझा दृष्टिकोण की खोज में प्रत्येक नागरिक को एकजुट करते हुए, इस आह्वान को पूरे भारत में गूंजने दें।




दीपक कुमार रथ

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