एशियाई खेलों में भारतीय क्रिकेट टीम ने गोल्ड जीतने के बाद कंगारु टीम के खिलाफ खेले गए अपने 5 मैचों की टी-20 श्रृंखला में कंगारु टीम को 4-1 से हराया। 23 नवंबर को विशाखापट्टनम में शुरु हुए इस टी-20I श्रृंखला में सभी मैच काफी रोमांचक रहे। भारतीय टीम ने पांच में से चार मैचों में जीत हासिल कर इस श्रृंखला को अपने नाम भी किया। जिसका प्रमुख कारण भारत की नई और युवा टीम थी। वर्ल्डकप के तुरंत बाद खेले जा रहे इस सीरीज में भारत के कई प्रमुख और सीनियर खिलािड़यों को बीसीसीआई की तरफ से आराम दे दिया गया। जिसके बाद इस सीरीज में भारतीय टीम की कमान टी-20 के नंबर एक बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव को दी गई। जिसे सूर्यकुमार यादव ने बखूबी निभाया भी। भारतीय टीम के लिए यह श्रृंखला इस बात के लिए भी खास थी कि भारतीय टीम के पास विश्वकप फाइनल में कंगारु टीम से हार के बाद उस हार का हिसाब चुकाने का पूरा मौका था। जिसे भारतीय टीम ने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में पार करके दिखाया। इस पूरे श्रृंखला में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा चैलेंज कंगारु टीम की अनुभवी गेंदबाजी और बल्लेबाजी थी। सीरीज से पहले जब दोनों ही टीमों ने अपने-अपने दल की घोषणा की, तो उसे देखकर कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स का कहना था कि ऑस्ट्रेलिया के इस टीम के सामने भारतीय टीम कहीं भी नहीं टिक पाएगी। लेकिन हुआ इस भविष्यवाणी का ठीक उल्टा ही। जहां कहा जा रहा था कि कंगारु टीम 4-1 से श्रृंखला जीतेगी वहीं भारतीय टीम ने इस श्रृंखला को 4-1 से जीता। कंगारुओं के खिलाफ इस सीरीज में भारतीय टीम पूरी नई थी। सीरीज में अधिक मात्रा में अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अनुभव केवल ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव के पास था। बाकि सभी खिलािड़यों का अनुभव केवल आईपीएल और घरेलू मैचों का था। वहीं कंगारु टीम में सभी एक से बढ़कर एक खिलािड़यों का नाम सूची में शामिल था। जिसमें प्रमुख नाम स्टीव स्मिथ, मैथ्यू वेड, ग्लैन मैक्सवेल, एडम ज्यांपा, मार्कस स्टॉयनिस, जेसन बेहरनडार्फ, ट्रेविस हेड, टीम डेविड का आता है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय टीम के द्वारा जारी की गई सूची में ऋतुराज गायकवाड, यशस्वी जयसवाल, इशान किशन, सूर्यकुमार यादव, रिंकू सिंह, अक्षर पटेल, जितेस शर्मा, रवि विश्नोई, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, आवेश खान का था। बाद में भारतीय टीम में स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर और गेंदबाज दीपक चहर को शामिल किया गया। जब भारतीय टीम श्रृंखला में 2-1 की बढ़त पर थी और भारत को सीरीज पर कब्जा करना था। यानी की चौथे टी-20 मैच में इस दो खिलािड़यों को जगह दी गई।
पूरे श्रृंखला में भारतीय टीम ने सभी मैंचों में जमकर कंगारु गेदबाजों को आड़े हाथ लिया और रनों की बौछार की। भारत ने इस टी-20आई श्रृंखला में रिकॉर्ड कंगारु टीम के सामने अपना सबसे अधिक टोटल बनाया भी और चेज भी किया। भारतीय बल्लेबाजों ने पहले ही मुकाबले में कंगारु टीम के 200 से अधिक रनों के लक्ष्य को सफलतापूर्वक पार किया। जिसके बाद ठीक अगले ही मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए कंगारु टीम के सामने अपना सर्वाधिक टी20 स्कोर खड़ा किया। जिसमें भारतीय टीम ने कंगारु टीम के सामने कुल 235 रनों का लक्ष्य रखा। जिसे भारत ने 44 रनों से जीता। इसके बाद भारत को ऑस्टेलियाई टीम से तीसरे रोमांचक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। लेकिन भारतीय टीम ने हार नहीं मानी और अगले ही मुकाबले में कंगारु टीम को एक बार फिर से हराकर श्रृंखला में अपनी अगली जीत और सीरीज को अपने नाम किया। आखरी मुकाबले में मात्र औपचारिकता को पूरा करने के ध्येय से उतरी कंगारु टीम को भारत ने एक बार फिर से रोमांचक आखरी ओवर में पटखनी दी। और श्रृंखला को 3-1 से 4-1 की ओर पटल दिया। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने क्रिकेट एक्सपर्टों और बुद्धिजीवियों के मुह पर ताला लगा दिया। खास बात इस श्रृंखला की यह रही भारतीय टीम ने एकता के साथ खेल खेला। जहां गेंदबाजों को काम करना था वहां गेदबाजों ने काम किया औऱ जहां बल्लेबाजों का जिम्मा था वहां बल्लेबाजों ने कहर बरपाया। इस पूरे सीरीज में कई अन्य बड़ी चीजें घिटत हुई जो इस प्रकार हैं-
रिंकू सिंह ने मचाई धूम

गायकवाड़ के अलावा एक दूसरे बल्लेबाज़ जिसने सबसे ज्यादा सम्मान हासिल किया वो रिंकू सिंह हैं। रिंकू ने पूरे सीरीज में काफी धूम मचाया। पूरी सीरीज में वो ज़बरदस्त फॉर्म में दिखे और 52.50 की औसत से 106 रन बनाए। जिस गति से उन्होंने रन बनाए हैं उसने उन्हें वर्ल्ड कप की टीम में फिनिशर की भूमिका के लिए एक मजबूत दावेदार बना दिया है। भारत को सीरीज़ में 4-1 की जीत दिलाने में रिंकू सिंह ने बड़ी भूमिका निभाई।
यशस्वी जायसवाल ने गंवाए मौके

जहां ऋतुराज गायकवाड़ ने अपने बल्ले से जलवे दिखाए, वहीं उनके साथी ओपनर यशस्वी जायसवाल कई अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद चल नहीं पाए। यशस्वी ने जहां कुछ शानदार और आक्रामक शॉट जरुर खेले। पर वहीं दूसरी तरफ हर बार जल्दबाजी के कारण गलत शॉट से अपना विकेट गंवाया भी। इस श्रृंखला के 5 मैचों में 27 की औसत से कुल 138 रन बनाये जो उनकी प्रतिभा से न्याय नहीं कर पाते।
गायकवाड़ की परिपक्व बैटिंग

इस सिरीज़ में भारतीय टीम के लिए सबसे सुखद बात रही ओपनर ऋतुराज गायकवाड़ का फॉर्म। गायकवाड़ ने पांच पारियों में 55.75 की औसत से 223 रन बनाए जिसमें एक शतक और एक अर्द्धशतक शामिल रहे। उन्होंने तीसरे टी20आई में सिर्फ 57 गेंदों पर 123 रन बना डाले और इस दौरान 7 छक्के और 13 चौके लगाए। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ टी20आई में किसी भारतीय की ओर से सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।
सिरीज़ की टाइमिंग की हुई निंदा
इस सिरीज़ की टाइमिंग की कई ऑस्ट्रिलियाई खिलाड़ियों ने निंदा की थी। पांचवें मैच से पहले ऑस्ट्रेलिया के मिचेल मार्श ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि ट्रैविस हेड ने क्या गलती की है कि उन्हें ये सिरीज़ खेलनी पड़ रही है? इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और कमेंटेटर माइकल वॉन ने भी इस ट्वीट को आगे बढ़ाया और कहा कि ये सबसे वाहियात सिरीज़ है, इसमें किसी खिलाड़ी को नहीं खेलना चाहिए था। दरअसल वॉन वर्ल्ड कप के ठीक बाद इस सिरीज़ में खेलने को लेकर हैरान हुए थे। वॉन के मुताबिक ये सिरीज़ खेलना अति हो गई और इसमें सिर्फ लालच छुपा बैठा था।
मुकेश कुमार का स्विंग और यार्कर

पेस डिपार्टमेंट में दीपक चाहर और मुकेश कुमार को भी आज़माया गया। उन सभी में सबसे कम अनुभवी मुकेश कुमार ही सबसे परिपक्व पेसर नज़र आए और कम से कम आखिरी मैच में उनकी स्पेल ने ही भारत को एक कड़े मुकाबले में जीत दिलवाई। चार पारियों में उन्होंने 36 की औसत और 9 की इकॉनमी से 4 सफलताएं हासिल की। जिसका प्रमुख कारण मुकेश का स्विंग और उनकी आखरी ओवरों के दौरान फेंकी जानी वाली यार्कर गेंद थी।
स्पिनर्स ने दिखाया जलवा

इस सीरीज़ में मुकेश कुमार को छोड़कर बाकी पेसर्स पिट गए लेकिन भारतीय स्पिनर्स ने टीम को हर मैच में बनाए रखा। रवि बिश्नोई टीम के मुख्य हथियार के रूप में में उभरे और अक्षर पटेल ने भी उनका अच्छा साथ दिया। इस सीरीज में बिश्नोई ने 18 की औसत से 9 विकेट लिए और किसी टी20 सीरीज में भारत के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाले रविचंद्रन अश्विन के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। बिश्नोई के पार्टनर के रूप में अक्षर पटेल ने भी बड़ी भूमिका निभाई। जहां बिश्नोई एक छोर से विकेट निकाल रहे होते, वहीं पटेल दूसरी छोर पर रन रोक रखते। उन्होंने 4 पारियों में 20.6 की औसत से 6 विकेट लिए और उनका इकॉनमी सिर्फ़ 6.2 रन प्रति ओवर रहा जो इस सीरीज का किसी भी सफल बॉलर के लिए सबसे बढ़िया इकॉनमी रही।
सात्विक उपाध्याय
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