जब काम का दबाव व्यक्ति की क्षमता से अधिक हो जाता है तो वह शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार महसूस करता है। काम से संबंिधत तनाव के संकेतों को पहचानने व इससे जल्दी निपटने से इसके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। कार्यस्थल पर हल्का तनाव व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है परंतु दबाव व मांग बहुत अधिक हो जाए व लंबे समय तक जारी रहे तो इससे कार्य संबंधी तनाव होता है। कार्य संबंधी तनाव शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर न केवल नकारात्मक प्रभाव डालता है बल्कि काम को प्रभावी ढंग से करना कठिन बना देता है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 में लगभग हर 40 श्रमिकों में से एक श्रमिक को कार्य संबंधी तनाव से प्रभावित पाया गया था।
कार्य संबंधी तनाव के कारण
कार्य संबंधी तनाव के लक्षण
काम से संबंधी तनाव शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है। काम से संबंधित तनाव के लक्षण व्यक्ति के समायोजन क्षमता और दबाव के प्रति उसकी प्रतिक्रिया के आधार पर भिन्न-2 हो सकता है।
भावनात्मक लक्षण:-
शारीरिक लक्षण:-
व्यवहारिक लक्षण:-
कार्य संबंधी तनाव का प्रबंधन:-
कार्य संबंधी तनाव का उपचार
कार्यस्थल पर काम करने के ढंग एवं वातावरण में परिवर्तन करने से कार्य संबंधी तनाव को प्रबंधित करने में मदद मिलती है, किंतु उसके बाद भी यदि लगातार तनाव महसूस हो रहा है तो यह मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसलिए प्रशिक्षित एवं अनुभवी मनोवैज्ञानिक से मदद लेने की आवश्यकता होती है। तनाव के लिए कोई दवा नहीं है, मनोवैज्ञानिक अनेक विधियों द्वारा कार्य संबंधी तनाव को कम करने में सहयोग प्रदान करते हैं। मनोवैज्ञानिक कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) से चिंता व तनाव को कम करने में मदद करते हैं। पूरक उपचार के रूप में एक्यूपंक्चर और योग कार्य संबंधी तनाव को कम करने में कारगर साबित होता है।
कार्य का चुनाव व्यक्ति को अपने क्षमता एवं रूचि के अनुसार करना चाहिए यदि कार्य व्यक्ति के क्षमता एवं रूचि के अनुरूप नहीं है तो यह व्यक्ति में कार्य संबंधी तनाव उत्पन्न करता है। कार्य संबंधी तनाव होने पर व्यक्ति को ऊपर वर्णित उपायों को अपनाकर अपने कार्य संबंधित तनाव को व्यवस्थित व नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए यदि फिर भी कार्य संबंधी तनाव नियंत्रित नहीं होता है तो व्यक्ति को प्रशिक्षित व अनुभवी मनोवैज्ञानिकों से संपर्क करके मनोवैज्ञानिक परामर्श व मनोचिकित्सा के माध्यम से कार्य संबंधी तनाव से बचा जा सकता है।
डॉ मनोज कुमार तिवारी
(लेखक वरिष्ठ परामर्शदाता, एआरटी सेंटर, एस एस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, हैं)
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
Leave Your Comment