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गूगल मैप औऱ नेविगेशन पर भरोसा करना कितना सही

How right is it to trust Google maps and navigation?

जैसे किसी ग्राहक को किसी सामान की आवश्यकता होती है तो वह तुरंत उसके लिए किसी दुकान या उस समस्या या फिर विषय से जुड़े स्थान पर जाता है। ऐसा ही विगत कुछ वर्षों में हमें सड़क मार्ग को लेकर देखने को मिला है। जैसे-जैसे समय बदला है सड़क मार्ग और उन पर चलने के नजरिये भी बदलते देखे गए हैं। पहले के समय में भी लोग यात्रा के लिए सबसे सुगम जरिया सड़क यात्रा को मानते थे और आज भी ऐसा ही कुछ है। बस बदलाव इस चीज का हुआ है कि लोग अब रुक कर किसी से पूछते नहीं या फिर मील के पत्थर पर लिखे दिशा निर्देश को नहीं देखते...बल्कि अब पूरी तरह से सहारा लेते हैं गूगल मैप का। जी हां, जो कई मायनों में सही है तो कई मायनों में इसके बेहद नकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले हैं। गूगल मैप राहगीरों के लिए आसानी तो लाता है पर कई बार बड़े औऱ खतरनाक समस्या का कारण भी बन जाता है। अब लगभग सभी के हाथों में मोबाइल फोन है और उसमें ' गूगल मैप और नेविगेशन एप्लिकेशन'। इस एप्लिकेशन ने यात्राओं को न सिर्फ सहज बना दिया है, अपितु इस चिंता से भी छुटकारा दिला दिया है कि सुनसान रास्तों से अगर कोई राहगीर जाता है या फिर होकर गुजरता है और उस समय आस-पास कोई भी चीज या फिर जरुरी निर्देश नहीं दिख रहा है तो यह अपने आधुनिक फीचर्स के जरिये उन सभी चीजों को समय-समय पर बताता रहता है और सतर्क भी करता रहता है। जैसी की कहां रोड बंद है , कहां सड़क पर डायवर्जन है, पेट्रोल पंप कहां औऱ कितनी दूर है जैसी चीजें ।  गूगल मैप ने यह बिल्कुल भी सोचने से हमें दूर कर दिया है कि अगर हम कहीं फंस जाते हैं या फिर अनजाने जगह पर हैं तो किससे आगे का मार्ग पता करेंगे या फिर कैसे आगे बढ़ेंगे। गूगल मैप के जरिये यह बिल्कुल भी हमारे मन में ये नहीं आता है कि अभी हमारा गंतव्य कितना दूर है, सबकुछ फोन में मौजूद गूगल मैप संभाल लेता है।

गूगल मैप भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में सर्वाधिक प्रयोग होने वाला नेविगेशन और मैपिंग एप्लिकेशन है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बरेली में घटी एक घटना ने इससे जुड़ी सुसुप्त बहस को एक बार फिर से जीवंत कर दिया है। शादी समारोह से लौट रहे तीन युवक गूगल मैप के भरोसे रात्रि में जा रहे थे और नेविगेशन की गलती से अर्धनिर्मित पुल पर गाड़ी लेकर चले जाते है और वहां से नीचे नदी में गिर जाते है और अपने प्राण गंवा बैठते हैं। ये इकलौता मामला नहीं है जो गूगल मैप पर पूर्ण भरोसा करने से हुआ है। ऐसे कई मामले हुए है औऱ कई बार ऐसा होते हुए देखा गया है। आप गूगल मैप के द्वारा कहीं जाना चाहते हैं और वो स्थान मुख्य मार्ग पर है। पर गूगल मैप टेढ़ी-मेढ़ी गलियों के भीतर से, गांवों में से निकलने का रास्ता आपको बता देता है और जब आप वहां पहुंचते है तब महसूस करते है की अरे! गूगल का प्रयोग न करते तो बेहतर होता। जी हां गंतव्य तो आपके सामने होता है पर बीच में कुछ ऐसा होता है जो इस बात को सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या गूगल मैप पर भरोसा करना वाजिब है या फिर नहीं।


पहाड़ों पर गूगल मैप की समस्या

सोचने वाली बात तब होती है जब हम गूगल मैप का सहारा पहाड़ों पर यात्रा के दौरान लेते हैं। क्योंकि सबसे अधिक समस्या गूगल को पहाड़ों पर होती है। वहां पर जिस दूरी को आप सौ या दो सौ मीटर में पूरा कर सकते थे वहां गूगल कई किलोमीटर का सफर तय करवाता है। ये समस्याएं मैप्स को इसलिए भी होती है क्योंकि कभी कभार उनका डाटा बहुत पुराना हो चुका होता है और कभी कभार डाटा ही गलत होता है क्योंकि ये अपना अधिकतर डाटा या तो थर्ड पार्टी से लेते है या फिर स्वयं गूगल यूजर से। पहाड़ों पर अक्सर गूगल मैप में फ्यूल लोकेशन को लेकर काफी समस्या देखने को मिलती  है। लोकेशन में जगह कुछ और रहती है औऱ सच्चाई में होता कुछ अलग ही है, जो अधिकतर यात्रियों को समस्या में डाल देती है और अपने विश्वसनीयता पर एक सवालिया निशान छोड़ देती है।

यह सोचने वाली बात होती है कि तकनीक पर अत्यधिक अंधा विश्वास तलवार लिए सुरक्षा में खड़े बंदर के जैसा है, जो जब-तक सही चल रहा तब तक तो ठीक है पर ये कब आपका नुकसान कर देगा कुछ कहा नहीं जा सकता। तकनीक कोई भी हो उस पर हद से अधिक भरोसा नहीं करना चाहिए इसे हमेशा सहायक के तौर पर प्रयोग करना चाहिए। गूगल मैप का प्रयोग करते समय हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए, जब कभी गूगल मैप का प्रयोग कर के गाड़ी चलाए अत्यधिक गति से न चलाए और कही भी इसके भरोसे निकलने से पहले रास्ते के विषय में थोड़ी बहुत जानकारी अवश्य कर लें।






सत्यम त्रिपाठी 
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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