नई दिल्ली: शुक्रवार, 29 मार्च को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हिमाचल प्रदेश के अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों को छात्रवृत्ति देने में करोड़ों रुपये के घोटाले में कथित तौर पर शामिल कई अधिकारियों सहित 20 संस्थानों और 105 व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। जिनमें उक्त संस्थानों के मालिक, उच्च शिक्षा निदेशालय, शिमला के कर्मी, बैंक अधिकारी और अन्य निजी व्यक्ति शामिल हैं।" इस बीच केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि उसने मामले में जांच पूरी कर ली है।
बता दें कि मामले की जांच के दौरान, उच्च शिक्षा निदेशालय, शिमला के कर्मचारियों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों और कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों सहित 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2013 से 2017 के दौरान लगभग 181 करोड़ की छात्रवृत्ति के फर्जी और धोखाधड़ी के दावों के लिए राज्य में निजी शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश सरकार के अनुरोध पर 2019 में सीबीआई द्वारा तत्काल मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद, हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालय ने भी तत्काल मामले की जांच की निगरानी की और साथ ही स्थिति की रिपोर्ट समय-समय पर दाखिल की गईं।
बता दें कि यह मामला एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों के छात्रों की मदद के लिए राज्य सरकारों के माध्यम से लागू की गई केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की योजना के कथित दुरुपयोग से संबंधित है। इस घोटाले का खुलासा उन रिपोर्टों के बाद हुआ था जब हिमाचल के लाहौल और स्पीति जिले में आदिवासी स्पीति घाटी के सरकारी स्कूलों के छात्रों को पिछले पांच वर्षों से छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं किया गया था।
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