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ग्रीन एनर्जी: भारत के भविष्य का शिल्पकार

Green Energy: The architect of India's future

परिवर्तन ही संसार का नियम है... इस पंक्ति का आज के बदलते समाज, वातावरण और जलवायु के साथ बेहद ही गहरा संबंध है। समाज, वातावरण और जलवायु में बीते कई दशकों को काफी कुछ देखने को मिला है साथ ही परिवर्तन का एक नया स्वरूप और आयाम सबके सामने उभर कर आया है। बदलते परिवेश और माहौल के साथ समाज और वातावरण का बदलना एक चक्र के समान है। परन्तु बीते कुछ सालों में लगातार और काफी बड़े पैमाने पर जलवायु में परिवर्तन चिंता का विषय बना हुआ था। लेकिन इसका का भी तोड़ आज मानव समाज की तरफ से निकाल लिया गया है। जो कि ग्रीन एनर्जी है। जलवायु परिवर्तन वर्तमान में एक ऐसी समस्या है जो कि मानव इतिहास के क्रम को बदतर दिशा की ओर बदल देने की क्षमता रखता है। ऐसे में बेहतर भविष्य के लिये, ग्रीन एनर्जी एक प्रमुख समाधान है जिसके माध्यम से वर्ष 2070 तक भारत के शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को भी पूरा किया जा सकता है। बड़े पैमाने पर निकलने वाले ग्रीन हाउस गैस और उसके नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए सीधा और सरल उपाय ग्रीन एनर्जी है, जो वातावरण और जलवायु पर नगण्य प्रभाव डालता है। भारत में आज ग्रीन एनर्जी एक ऐसा विषय है जो कि भारत के भविष्य को एक सकारात्मक विकास की दिशा प्रदान कर रहा है। आज इस बदलते समय में और विकास के दिशा में अग्रसर हो रहे सभी देशों के बीच भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपयोगकर्ता देश है। लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण वर्ष 2000 के बाद से ऊर्जा का उपयोग दोगुना हो गया है और यही कारण है कि आज भी 80 प्रतिशत मांग कोयला, तेल और ठोस बायोमास द्वारा पूरी की जा रही है। विकसित भारत और एक नये भारत या यूं कहें कि भारत के भविष्य को सकारात्मक दिशा प्रदान करने के लिए 80 प्रतिशत कोयला, तेल और ठोस बायोमास की जगह हमें हमें 80 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल करना होगा। जो भारत के भविष्य को नया रूप प्रदान करेगा साथ ही बेहतर भविष्य की नींव रखेगा। इस दिशा में बीते कुछ सालों में काफी बड़े स्तर पर कार्य किया गया है। ग्रीन एनर्जी को प्रमुख ऊर्जा बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। इसको देखते हुए महत्त्वपूर्ण ग्रीन एनर्जी स्रोतों में सौर, पवन, भूतापीय, बायोगैस, निम्न-प्रभाव पनबिजली और कुछ योग्य बायोमास स्रोतों द्वारा उत्पादित बिजली को शामिल किया जा रहा है। जो भारत में एक नई क्रांति लाने के साथ ही भारत के उज्जवल भविष्य को दिशा भी दिखायेगा।

प्रति व्यक्ति आधार पर देखें तो भारत का ऊर्जा उपयोग और उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। जिसको ध्यान में रखते हुए ग्रीन एनर्जी बेहतरीन स्रोत है। ग्रीन एनर्जी भारत में विकास होने वाले विकास के परिवर्तन की दिशा में एक सफल प्रयास है। वर्ष 2019 में भारत ने घोषणा की की थी कि वह वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा की अपनी स्थापित क्षमता को 450 GW तक ले जाएगा। इस लक्ष्य को पार करने को ध्यान में रखते हुए भारत ने वर्तमान में यानी कि फरवरी 2024 तक, बड़े जलविद्युत सहित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की संयुक्त स्थापित क्षमता 183.49 गीगावॉट है। इस आंकड़े को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत अपने रखे गए लक्ष्य को वर्ष 2030 तक पार कर लेगा। उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना यानी कि PLI एक ऐसी योजना है भारत सरकार की जिसने भारत के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सक्षम है। यह योजना भारत में ग्रीन एनर्जी के उत्सर्जन में कार्यरत है। नवीकरणीय ऊर्जा के लिए कच्चे माल के उत्पादन हेतु विनिर्माण क्षेत्र के संवर्धन के संबंध में भारत सरकार की एक और पहल है। ग्रीन एनर्जी के कारण आज भारत में बिजली का उत्पादन, वाहनों का संचालन, जल पंपों का सोलराइज़ेशन उपभोक्ता के दरवाज़े पर उपलब्ध बिजली वितरण की दिशा में एक कदम है।

भारत सरकार की तरफ से ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में कई कार्य किये जा रहे हैं। इसको आकार देने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (SAUBHAGYA - सौभाग्य), ग्रीन एनर्जी गलियारा (GEC), राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड मिशन (NSGM) और राष्ट्रीय स्मार्ट मीटर कार्यक्रम (SMNP), हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का तेज़ी से अंगीकरण और विनिर्माण (FAME), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) इन सभी पहलों के माध्यम से इसे साकार करने की कोशिश लगातार औऱ बड़े पैमाने पर की जा रही है। मुख्य रुप से ग्रीन एनर्जी में पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, हाइड्रोलिक या पनबिजली ऊर्जा, बायोमास और बायोगैस, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, तरंग ऊर्जा, बायोएथेनॉल, बायोडीजल शामिल हैं, जो भारत के भविष्य को आकार दे रही हैं। ग्रीन एनर्जी उत्पादन प्रक्रियाओं में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करते हैं  , जिससे वे पर्यावरणीय क्षरण को रोकने के लिए सबसे स्वच्छ, सबसे व्यवहार्य समाधान बन जाते हैं। स्वच्छ ऊर्जाएं  सूर्य के समान ही उपलब्ध हैं, जहां से वे उत्पन्न होती हैं और प्राकृतिक चक्रों के अनुकूल होती हैं, इसलिए उनका नाम "नवीकरणीय या ग्रीन एनर्जी" है। यह उन्हें एक स्थायी ऊर्जा प्रणाली में एक आवश्यक तत्व बनाता है  जो भविष्य की पीढ़ियों को जोखिम में डाले बिना आज विकास की अनुमति देता है। हरित उर्जा एक ऐसे स्रोतों से आते हैं जो कभी समाप्त नहीं होंगे, इसका मतलब है कि ग्रीन एनर्जी का व्यावहारिक रूप से अनंत तक उपयोग किया जा सकता है, इस डर के बिना कि संसाधन समाप्त हो सकते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि, जैसा कि हमने पहले कहा है, पर्यावरण पर प्रभाव मामूली है, इस प्रकार यह ग्रह की सुरक्षा के लिए एक महान कदम का प्रतिनिधित्व करता है।

 वर्तमान में ग्रीन एनर्जी का प्रयोग विश्व में ही नहीं अपितु भारत में भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। बेहतर हवा और रोग मुक्त वातावरण के लिए आज ग्रीन एनर्जी के उत्पादों का प्रयोग किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हवाई अड्डों के साथ की कई संस्थानों और फैक्ट्रियों में सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जा रहा है। ईंधनों के कम प्रयोग के लिए सौर ऊर्जा के गैसों, वाहनों और कई अन्य चीजों का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही लोगों को जलवायु और वातावरण, हवा की शुद्धता को लेकर इसके अधिक प्रयोग के बारे में प्रेरित भी किया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी के बढ़ते प्रयोग से रोजगार के साधन लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का महत्व, अधिक व्यावहारिक तरीके से, इस तथ्य में भी निहित है कि यह उन लोगों को ऊर्जा की खपत से उत्पन्न होने वाली परिवर्तनीय लागतों पर काफी बचत करने की अनुमति देता है, चाहे वह कोई कंपनी हो या निजी नागरिक हो। ग्रीन एनर्जी या नवीकरणीय ऊर्जा आज भारत के भविष्य को उज्जवल करने का कार्य कर रही है साथ ही उसे मजबूत बनाने और भारत के आर्थिक विकास को भी कई मायनों में दिशा दशा दिखाने का कार्य कर रही है। लगातार कम हो रहे कोयले का प्रयोग, कर में कमी और सुधार, औद्योगिक रणनीति और व्यापार नीति में सुधार, नवीकरणीय उपकरणों का विनिर्माण, निवेश और एफडीआई, अलग-अलग नवीकरणीय ऊर्जा का लगातार बढ़ता प्रयोग भारत के भविष्य को एक बेहतर मार्ग प्रदर्शित कर रहा है।



सात्विक उपाध्याय
 

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