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NGOs के लिए FCRA नियम में सरकार की सख्ती, विदेशी फंडिंग के नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने में किया संशोधन

Government tightens FCRA rules for NGOs; amends penalties for violating foreign funding regulations.

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय (MHA) ने NGOs से Foreign donations लेने और इस्तेमाल करने से जुड़े FCRA 2010 कानून के कई उल्लंघनों के लिए लगने वाले जुर्माने में बदलाव कर दिया है। मंत्रालय ने सोमवार को इस कानून की धारा 41(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये आदेश जारी किए। एक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, इस बात की जानकारी मिली है।

विदेशी फंडिंग उल्लंघनों पर कितना जुर्माना?

  • नए संशोधित प्रावधानों के अनुसार, अगर कोई संगठन विदेशी चंदे का 20 प्रतिशत से ज्यादा पैसा प्रशासनिक खर्चों (एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च) पर लगा देता है, जो अधिनियम की धारा 8 का उल्लंघन है, तो उसे एक लाख रुपये या सीमा से ज्यादा खर्च की गई राशि का 5 प्रतिशत (जो भी ज्यादा हो) जुर्माना भरना पड़ेगा।
  • विदेशी चंदे को सट्टेबाजी या जोखिम वाली गतिविधियों में लगाने पर (जो अधिनियम की धारा 8(1) और 2011 के नियम 4 का उल्लंघन है) अब एक लाख रुपये या ऐसी गतिविधियों में लगाए गए पैसे का 30 प्रतिशत (जो भी ज्यादा हो) जुर्माना लगेगा। इसके अलावा, उस गतिविधि से हुई पूरी कमाई (100 प्रतिशत) भी सरकार वसूल कर लेगी।
  • अगर विदेशी चंदा किसी खास काम के लिए मिला था और उसे दूसरे किसी काम में इस्तेमाल कर दिया जाता है, तो 30 प्रतिशत जुर्माना या एक लाख रुपये (जो भी ज्यादा हो) लगाया जाएगा। इसी तरह, अगर कोई संगठन कानून का उल्लंघन करते हुए विदेशी चंदा स्वीकार करता है, इस्तेमाल करता है, या बिना पंजीकरण वाले उद्देश्य या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में उसका उपयोग करता है, तो भी वही जुर्माना लगेगा।

विदेशी फंड पाने के नियम क्या हैं?

  • सोमवार को जारी एक अलग नोटिफिकेशन में, सरकार ने विदेशी फंड पाने से जुड़े नियमों में बदलाव किया। इसके तहत, NGOs को 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, 2010' के तहत अप्लाई करते समय पहले से तय लिस्ट में से अपने मकसद और काम के क्षेत्रों को चुनना होगा।
  • बदले हुए नियमों में कई तरह की धार्मिक गतिविधियों की इजाज़त है, लेकिन एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए योग्य कैटेगरी में धर्म-परिवर्तन को साफ़ तौर पर बाहर रखा गया है।
  • मंत्रालय ने यह भी कहा कि अगर किसी संस्था के मुख्य पदाधिकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो उन्हें एक्ट के तहत विदेशी फंड पाने के लिए रजिस्ट्रेशन या पहले से मंज़ूरी देने पर "आमतौर पर विचार नहीं किया जाएगा"।
  • हालांकि, बदले हुए नियमों में एक अपवाद भी है। इसके तहत केंद्र सरकार एक आदेश के ज़रिए ऐसे खास मामलों या हालात के बारे में बता सकती है, जिनमें विदेशी नागरिकों को उस संस्था के मुख्य पदाधिकारी के तौर पर काम करने की इजाज़त दी जा सकती है जो एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन या पहले से मंज़ूरी चाहती है।

प्वाइंटर्स में आसान भाषा में समझिए

  • सरकार ने FCRA नियम 2011 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब एनजीओ और अन्य संगठनों को विदेशी पैसा लेने और इस्तेमाल करने में ज्यादा जवाबदेही और सख्ती बरतनी होगी।
  • मुख्य पदाधिकारी की परिभाषा को और व्यापक कर दिया गया है। अब इसमें कंपनी के डायरेक्टर, फर्म के पार्टनर, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) का कर्ता, संगठन के मैनेजमेंट पर कंट्रोल रखने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल हैं।
  • विदेशी फंडिंग के लिए रजिस्ट्रेशन चाहने वाले एनजीओ को अब साफ-साफ बताना होगा कि वे किस मकसद से काम करेंगे और किन-किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में काम करेंगे।
  • आवेदन में केवल उन मकसदों को चुनना होगा जो सरकार की अनुसूची में दिए गए हैं। इन मकसदों में मुख्य रूप से धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं।
  • ये बदलाव एनजीओ को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए किए गए हैं।

 

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