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Gen Z को Judge नहीं, समझने की जरूरत है

Gen Z needs to be understood, not judged


दीपक कुमार रथ


आपको मालुम ही होगा की अभी हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने Gen G और Gen Alpha के साथ संवाद स्थापित करने की शुरुआत की।  कई लोगों ने इस पर बहुत कुछ कहा।  सब ने अपनी अपनी तरह से इसका इंटरप्रिटेशन किया।  लेकिन जो एक बात किसी के समझ नहीं आयी, आज हम उसी पर चर्चा करेंगे।

मित्रों, भागवत जी का Gen Z संवाद केवल युवाओं को संबोधित करने वाला एक सामान्य वक्तव्य नहीं है। उसे ध्यान से, पूरी तरह और पूर्वाग्रह से मुक्त होकर सुना जाना चाहिए। Gen Z और Gen Alpha को लेकर उनका दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज की सबसे बड़ी समस्या युवाओं का व्यवहार नहीं, बल्कि उनके और पिछली पीढ़ियों के बीच बढ़ता हुआ Generation Gap है। हम Millennials (30-45 age), Gen X(46-61), Boomers(62-80) और उससे भी पुरानी पीढ़ियां आज के बच्चों को अपने अनुभवों की कसौटी पर परख रहे हैं, उनके संस्कारों पर सवाल उठा रहे हैं और उनकी प्राथमिकताओं को लेकर चिंतित हैं। लेकिन क्या हमने कभी ठहरकर यह पूछा कि जब हम युवा थे, तब हमारे माता-पिता हमें किस नजर से देखते थे?

हर पीढ़ी अपने से पहले वाली पीढ़ी को पुरानी और अपने से बाद वाली पीढ़ी को अपरिपक्व मानने की भूल करती रही है। यही Generation Gap का मूल है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज Gen Z और Gen Alpha का संसार पहले की किसी भी पीढ़ी से कहीं अधिक तेज, डिजिटल और बदलता हुआ है। इसलिए उनके साथ संवाद का तरीका भी बदलना होगा। भागवत जी का दृष्टिकोण इसी बिंदु पर महत्वपूर्ण हो जाता है।

एक बड़े भाई का छोटे भाई से रिश्ता केवल यह पूछने तक सीमित नहीं हो सकता कि पढ़ाई कैसी चल रही है। पिता का बच्चे से संवाद केवल उसकी जरूरतों, करियर और भविष्य की चिंता तक सीमित नहीं हो सकता। बाबा-पोते का रिश्ता केवल दुलार और संस्कारों की बातें करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली संवाद तब शुरू होता है जब हम बच्चे से पूछते हैं कि वह सोचता क्या है? देश को किस नजर से देखता है? राजनीति को कैसे समझता है? धर्म उसके लिए क्या मायने रखता है? समाज में हो रहे बदलावों को लेकर उसकी क्या राय है? वह किन मूल्यों को स्वीकार करता है और किन्हें अस्वीकार करता है?

हम अक्सर कहते हैं कि आज की पीढ़ी सुनती नहीं है। लेकिन क्या हमने कभी ईमानदारी से कोशिश की कि पहले उसे सुना जाए? संवाद का अर्थ केवल अपनी बात समझाना नहीं, दूसरे की बात समझना भी है। यदि हम युवाओं को हर बातचीत में केवल उपदेश देंगे, तो वे हमें सुनने के बजाय हमसे दूरी बनाना शुरू करेंगे। Lecture से Generation Gap नहीं टूटता, संवाद से टूटता है।

इस संदर्भ में एक और महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। जंतर-मंतर या किसी राजनीतिक आंदोलन में दिखाई देने वाले कुछ चेहरों को देखकर पूरी Gen Z या Gen Alpha का चरित्र प्रमाणपत्र जारी करना बौद्धिक ईमानदारी नहीं है। हर पीढ़ी में अच्छे-बुरे, रचनात्मक-विनाशकारी और राष्ट्रवादी-राष्ट्रविरोधी विचार रखने वाले लोग रहे हैं। Millennials में उमर खालिद, कन्हैया कुमार और शरजील इमाम जैसे चेहरे हैं, लेकिन क्या उनकी वजह से पूरी Millennial पीढ़ी को उसी रंग में रंग दिया गया? नहीं।

Gen X में राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे राजनीतिक चेहरे हैं। Boomers में अरुंधति रॉय जैसी मुखर वैचारिक आवाज रही है। उससे पहले की पीढ़ी में रोमिला थापर जैसी इतिहासकार रही हैं। क्या इन व्यक्तियों के विचारों के आधार पर पूरी पीढ़ियों को Radical घोषित कर दिया गया? यदि नहीं, तो Gen Z के साथ यह दोहरा मापदंड क्यों?

यदि किसी पीढ़ी के भीतर अभिजीत दीपिके, सौरभ दास या नेहा बोरा जैसे लोगों के विचार या आचरण आपत्तिजनक हैं, तो उनका मूल्यांकन कीजिए, उनके विचारों का विरोध कीजिए और जहां आवश्यक हो, उनकी आलोचना कीजिए। लेकिन कुछ चेहरों के आधार पर पूरी पीढ़ी को दोषी ठहराना उसी Generation Gap को और गहरा करेगा, जिसे हम समाप्त करना चाहते हैं।

यही वह जगह है जहां भागवत जी और मोदी जी का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण दिखाई देता है। युवा पीढ़ी को केवल भाषण देने, उसकी कमियां गिनाने या उसे संस्कारों का पाठ पढ़ाने से काम नहीं चलेगा। उसके बीच जाना होगा, उसके सवाल सुनने होंगे, उसकी भाषा समझनी होगी और उसके भीतर मौजूद सकारात्मक ऊर्जा को पहचानना होगा। Gen Z को बदलने का रास्ता उसे खारिज करने से नहीं, उसके साथ खड़े होकर संवाद करने से निकलेगा।

किसी भी पीढ़ी का भविष्य उसके सबसे ज्यादा शोर करने वाले लोगों से तय नहीं होता। वह उन करोड़ों शांत, ईमानदार और रचनात्मक युवाओं से तय होता है जो अपने समय को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए Gen Z को कटघरे में खड़ा करने से पहले उससे बात कीजिए। शायद हमें पता चले कि समस्या पूरी पीढ़ी में नहीं, बल्कि हमारी उसे समझने की  जल्दबाजी में है।

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